IAS Tina Dabi के नाम जुड़ गया एक और विवाद, UPSC टॉपर डीएम के इलाके में स्कूली पढ़ाई ने दी टेंशन!
IAS Tina Dabi News: यूपीएससी टॉपर टीना डाबी अक्सर ही किसी न किसी वजह से चर्चा में रहती हैं। 26 जनवरी पर झंडा फहराने के बाद गलत तरीके से सलामी देने का उनका वीडियो वायरल हुआ था। अब रेगिस्तानी जिलों जैसलमेर और बाड़मेर में स्कूल से बच्चों के ड्रॉपआउट की वजह से खबरों में हैं। संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में इन जिलों में 30 प्रतिशत से अधिक छात्र पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुके हैं।
इन जिलों की प्रशासनिक कमान चर्चित आईएएस अधिकारी टीना डाबी संभाल चुकी हैं। पहले जैसलमेर में और वर्तमान में बाड़मेर में कलेक्टर के रूप में। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में आंकड़े पेश किए थे। पढ़ाई बीच में छोड़ देने के लिए सरकारी महकमे को भी जिम्मेदार माना जाता है।

जैसलमेर और बाड़मेर में हैरान करने वाले आंकड़े
- संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, जैसलमेर और बाड़मेर में प्राइमरी से सेकेंडरी स्तर के बीच 26.4% छात्र स्कूल छोड़ रहे हैं।
- सबसे खराब स्थिति जैसलमेर की है, जहां कुल ड्रॉपआउट दर 30.9% तक पहुंच गई है। इनमें सेकेंडरी स्तर पर पढ़ाई छोड़ने वालों का आंकड़ा 15.3% है।
- बाड़मेर में भी हालात चिंताजनक हैं, जहां ड्रॉपआउट दर 21.3% दर्ज की गई है।
IAS Tina Dabi के इलाके में स्कूल ड्रॉपआउट चुनौती
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का मानना है कि समस्या केवल आर्थिक कमजोरी तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों और शैक्षिक रिपोर्ट्स का कहना है कि स्कूलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहद खराब है। कहीं पक्की इमारत नहीं है, तो कहीं शौचालय और पेयजल जैसी न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षकों के खाली पद, नियमित पढ़ाई का नहीं होना और स्कूलों की लंबी दूरी भी बड़ी बाधा बन रही है। रेगिस्तानी क्षेत्रों में परिवहन साधनों की कमी के कारण मिडिल और सेकेंडरी स्तर तक पहुंचते-पहुंचते बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं।
Rajasthan News: सीमावर्ती इलाकों में गहराता संकट
- विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रॉपआउट दर का इतना अधिक होना सीमावर्ती जिलों के सामाजिक-आर्थिक ढांचे की कमजोरी को दर्शाता है।
- अगर समय रहते स्कूलों का ढांचा मजबूत नहीं किया गया, शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई और छात्राओं के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था नहीं बनी, तो आने वाली पीढ़ी के लिए हालात और कठिन हो सकते हैं।
- शिक्षा विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इन जिलों में बच्चों को दोबारा स्कूलों से जोड़ा जाए और उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया जाए। सरकार की योजनाएं तभी सफल होंगी, जब जमीनी स्तर पर सुविधाएं मजबूत होंगी।












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