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बाड़मेर : बॉर्डर इलाके में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग, गंदा पानी पीने को मजबूर

बाड़मेर। ऐ ख़ुदा रेत के सहरा को समंदर कर दे,या छलकती हुई आँखों को भी पत्थर कर दे..

मरहूम शायर शाहिद मीर की लिखी गज़ल की ये पंक्तियां बाड़मेर के सैकड़ों गांवों पर सटीक बैठती हैं। रेगिस्तानी बालू मिट्टी में 45 डिग्री में तपते इलाके के लोगों ने पानी के अभाव में पीढ़ियों तक जीवन जिया है, लेकिन अब हालात ख़राब होते जा रहे हैं। अब लोग गड्ढों में रिसते गंदले पानी को पीकर जीने को मज़बूर हैं। हालांकि सियासत और उसके हाकिम सब ठीक हैं के दावे करते नज़र आते हैं।बाड़मेर जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर गांव भाचभर। 45 डिग्री से ज्यादा की भीषण गर्मी में इस गाँव की महिलाएं बून्द बून्द पानी का जुगाड़ करती हुईं अपनी जिंदगी काटने को मजबूर हैं। न कोई सुनवाई करने वाला न ही कोई पीड़ा समझने वाला। सुबह 7 बजे से रात तक यह जद्दोजहद कायम रहती है। इस इलाके के लिए सरकार के पास कोई पुख्ता योजना नहीं है।

गांव भाचभर में गंदा पानी पीने को मजबूर

गांव भाचभर में गंदा पानी पीने को मजबूर

जिला मुख्यालय 45 किलोमीटर दूरी पर स्थित बख्ते की बेरी भाचभर गाँव की महिलाएं कीचड़ युक्त गन्दला पानी पीने को मज़बूर हैं। इस गंदले दूषित पानी से प्यास बुझती है। इसी कारण यहां पानी की बारी पर भी घमासान मच जाता है। यहां की महिलाओं की मानें तो यह किसी नारकीय यातना से कम नहीं। पूरा दिन उन्हें इस भयंकर गर्मी में पानी का जुगाड़ करना ही पड़ता है।

 कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं

कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं

मुनाबाव रोड बख्ते की बेरी भाचभर की यह तस्वीर रोज आते जाते लोग देखते हैं। सियासतदानों से लगाकर हाकिम यह शर्मनाक तस्वीरे देखकर आंखे फेर लेते हैं। जनप्रतिनिधि, अधिकारी पानी की पर्याप्त उपलब्धता के दावे करते हैं, लेकिन अभी तक लोगों को पानी नसीब नहीं हुआ। जलदाय विभाग को कई बार शिकायत करने के बाद समाधान नहीं हो रहा है। यहां बनी जलदाय विभाग की टंकी जर्जर हो गई। पाइप लाइन भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। यहां की महिलाएं क्षतिग्रस्त पाइप के नीचे गड्ढे में बर्तन से बाल्टी भर पानी का जुगाड़ करती हैं।

 अंतिम छोर तक नहीं पहुंचता पानी

अंतिम छोर तक नहीं पहुंचता पानी

ग्रामीणों का कहना है रामदेरिया से बख्ते के बेरी तक पाइप लाइन से पानी आता था, लेकिन अब काफी समय से बीच में अवैध कनेक्शन और सात दिन में एक बार सप्लाई के चलते पानी अंतिम छोर तक पहुंच ही नहीं पाता है। जलदाय विभाग के अधिकारी सोनाराम बेनिवाल के अनुसार "नर्मदा नहर परियोजना का कार्य पूरा हाेने में अभी दाे वर्ष और लगने की संभावना है। संवेदक द्वारा कार्य धीमी गति से कराने काे लेकर करीब सवा कराेड़ रुपए का जुर्माना भुगतना पड़ा है।

 इन गांवों में पानी की समस्या

इन गांवों में पानी की समस्या

बता दें कि बाड़मेर जिले में गांव आरबी की गफन, चांदे का पार, सजन का पार, सरगीला, कुंभाराें का पार, मठार का पार गांव में पानी की किल्लत है। रमजान की गफन, आरबी की गफन, सादूल की गफन, भाेजारिया, सजन का पार, कुंभाराें का पार, मठार का पार, सरगीला, चांदे का पार, गरडिया सहित कई गांवों में सरकार की तरफ से पानी के इंतजाम नहीं हैं। नर्मदा नहर याेजनांतर्गत शिव-रामसर योजना में 600.79 करोड़ रुपए की लागत से 205 गांवों को जोड़ा जाना है।

तालों में बन्द रहता है पानी

तालों में बन्द रहता है पानी

राजस्थान में पानी की क्या अहमियत है। उसकी तस्दीक बाड़मेर से सामने आई तस्वीरें कर रही हैं। भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर सरहदी इलाके में रहने वाले लोगों से बेहतर शायद ही कोई नहीं जानता होगा। लोगों को पानी की एक-एक बूंद सहेजकर रखनी पड़ती है। यहां तक की पानी की चौकसी के लिए लोग ताला तक लगा देते हैं। जिससे उनका पानी कोई चोरी ना कर ले। सरहदी गांवों में सर्दी हो या गर्मी पानी का पहरा लगा रहता है।

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