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पीवणा सांप ने इस परिवार के सदस्यों की छाती पर बैठकर मुंह में 19 बार छोड़ा जहर, देखें वीडियो

बाड़मेर। राजस्थान के सरहदी इलाके बाड़मेर में दूर-दूर फैले रेत के समंदर में इस बार जमकर बारिश हुई है। बारिश के साथ ही यहां के सेड़वा उपखण्ड में पीवणा सांपों का आतंक बढ़ गया है। रेगिस्तान में पाए जाने वाला पीवणा सांप सेड़वा के दुधाणी भीलों की ढाणी के एक परिवार के लिए जी का जंजाल बन गया है। पिछले 36 दिन से पीवणा सांप के कारण दहशत में जी रहे परिवार का दावा है कि पीवणा सांप उनके परिवार के सदस्यों को अब तब 19 बार शिकार कर चुका है।

कई सपेरों से करवाई तलाश

कई सपेरों से करवाई तलाश

सेड़वा के दुधाणी भीलों की ढाणी के बखताराम भील बताते हैं कि महज 36 दिन में परिवार के सदस्य 19 बार पीवणा सांप का शिकार बने हैं, गनीमत है कि पीवणा सांप कम जहरीला होता है। इसलिए सभी सही सलामत हैं। कई बार सपेरों को लाकर सांप की तलाश करवाई। चार दिन पहले ही एक सांप को मारा है। इसके भी सांपों का हमला जारी है।

बखताराम की बहू बची ना पोता

बखताराम की बहू बची ना पोता

शनिवार को जिला प्रशासन को समस्या से अवगत करवाने बाड़मेर आए बखताराम ने बताया कि उनकी पुत्रवधू, पत्नी और पोता समेत कई सदस्य पीवणा सांप की चपेट में आ चुके हैं। समस्या के कारण आर्थिक मानसिक और शारीरिक तौर पर परिवार खासा परेशान हो रहा है। अब जिला प्रशासन ने समस्या का कोई समाधान नहीं करवाया तो परिवार के सामूहिक रूप से आत्महत्या का कदम उठाने को मजबूर होगा।

जानिए क्या पीवणा सांप

जानिए क्या पीवणा सांप

विशेषज्ञों के अनुसार पीवणा सांप करीब सात फीट तक लम्बा होता है। इसका रंग बालू रेत की तरह का होता है, जिससे यह रेगिस्तान में आसानी से नजर नहीं आता। बारिश के बाद का मौसम इनके लिए सबसे अनुकूल रहता है। मानसून के दौरान इनकी संख्या एकाएक बढ़ जाती है। खास बात यह है कि दिन के उजाले में ​यह बिलों से बाहर नहीं निकलते हैं, लेकिन रात का अंधेरा में निकलते हैं और तभी अपना शिकार ढूंढ़ते हैं। इनमें सोते हुए इंसानों की गंध सूंघने की गजब की क्षमता होती है, जिससे ये अक्सर सोए हुए इंसान को अपना शिकार अधिक बनाते हैं और सूर्य उदय से पहले वापस बिलों में घुस जाते हैं।

ऐसे जहर छोड़ता है पीवणा सांप

ऐसे जहर छोड़ता है पीवणा सांप

ग्रामीणों का दावा मानें तो रेगिस्तान का पीवणा सांप इंसानों को काटने की बजाय नींद में सोए हुए आदमी की छाती पर बैठकर अपना फन फैलाकर उसकी श्वास में अपनी श्वास मिलाकर जहर छोड़ता है। जिसका असर सूर्य की रोशनी के साथ पड़ने लगता है और मुंह तालू में एक छाला बन जाता है, जो सूर्य की किरणें अधिक बढ़ने लगती हैं। उसकी छाती में दर्द बढ़ने लग जाता है। इससे पीड़ित की मौत भी हो सकती है।

बाड़मेर में है पीवणा सांप की कई प्रजाति

बाड़मेर में है पीवणा सांप की कई प्रजाति

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ रविंद्र शर्मा के अनुसार पीवणा सांप करैत सांप प्रजाति सांप है। इसकी प्रजातियों में से प्रजाति कई बाड़मेर के रेगिस्तान में भी हैं। इनके दांत सुई सरीखे बारीक होते हैं, जो बाइट के बाद साधारण आंखों से दिखाई नहीं देता है। ऐसे सांप काटते ही नर्वस सिस्टम को प्रभावित करते हैं। कई बार शिकार लकवाग्रस्त भी हो सकता है।

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