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अजमेर ब्लास्ट के दोषी 11 साल के बाद आएंगे जेल से बाहर, नहीं मिले उनके खिलाफ सबूत

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    अजमेर। राजस्थान के अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर 11 अक्टूबर 2007 में हुए बम ब्लास्ट केस के दो आरोपियों को कोर्ट से राहत मिली है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को सजा को स्थगित कर जमानत पर छोड़ने के आदेश दिए है। बता दें कि दोनों उम्रकैद की सजा काट रहे थे। जस्टिस मनीष भण्डारी की खण्डपीठ ने यह आदेश जारी किए।

    culprits of ajmer blast will be released from jail after 11 years

    एडवोकेट मनोज शर्मा और जेएस राणा ने हाईकोर्ट में सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हुए बम ब्लास्ट के दोनों आरोपीस देवेन्द्र गुप्ता और भावेश पटेल के लिए जमानत याचिका दायर की थी। एडवोकेट राणा ने बताया कि उनके दोनों मुव्वकिलों के खिलाफ कोई सबूत नहीं थे। उन्हें केवल संभावनाओं के आधार पर ही दोषी करार दिया गया था। वकील ने कोर्ट को बताया कि भावेश पटेल का फोन 11 और 12 अक्टूबर को बंद था। केवल फोन बंद होने से ही यह नहीं माना जा सकता कि वह अजमेर आकर बम रखकर गया हो। इस दलील से न्यायाधीश संतुष्ट हुए।

    वहीं देवेन्द्र गुप्ता को लेकर दलील दी गई कि देवेन्द्र गुप्ता ने जो ड्राईविंग लाईसेंस बनवाया उसमें दलाल ने कूटरचित दस्तावेजों को काम में लिया। इसके आधार पर ही यह माना गया कि जो सिम दरगाह के पास से बरामद हुई वह देवेन्द्र गुप्ता के नाम से ली गई होगी, जबकि ऐसा भी प्रमाणित नहीं हुआ। इन सभी दलीलों को सुनकर न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों की सजा को स्थगित कर जमानत देने के आदेश जारी किए। राणा ने कहा कि दोनों आरोपी शुक्रवार को जेल से बाहर आएंगे।

    11 साल पहले हुआ था बम ब्लास्ट
    11 अक्टूबर 2007 को अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा साहब की दरगाह में बम ब्लास्ट किया गया था। जिसमें हैदराबाद निवासी तीन जायरीन की मौत हो गई थी जबकि कई घायल हो गए थे। इस मामले में चार आरोप पत्र पेश किए गए। इसके आधार पर 8 मार्च 2017 को सीबीआई कोर्ट ने भावेश पटेल, देवेन्द्र गुप्ता और सुनिल जोशी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया था। सुनिल जोशी की पूर्व में ही मृत्यु हो गई थी जबकि देवेन्द्र गुप्ता और भावेश पटेल को 2010 में गिरफ्तार कर लिया गया था।

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    English summary
    culprits of ajmer blast will be released from jail after 11 years

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