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राजस्थान: 700 सालों से शापित गांव, जहां दो मंजिला घर बनाना है मना

चूरू, 24 नवंबर: भारत गांवों का देश है और यहां हर गांव की अपनी अलग कहानी है। राजस्थान का भी एक ऐसा गांव है, जिसके बारे में सुनकर एक बार आपको विश्वास नहीं होगा, लेकिन यह हकीकत है। यहां का एक गांव 700 साल पुराने एक शाप से आज भी इतना सहमा हुआ है कि पूरे गांव में अब तक लोग घर की दूसरी मंजिल बनाने से डरते हैं। क्या है इस शापित गांव की कहानी और कैसे रहते हैं यहां के लोग, पढ़िए पूरी खबर...

गांव के आज भी दो मंजिला मकान नहीं

गांव के आज भी दो मंजिला मकान नहीं

राजस्थान की राजधानी जयपुर से 200 किमी दूर चूरू जिले की सरदारशहर तहसील के उडसर गांव के लोग आज भी दो मंजिला मकान नहीं बनाते हैं। इसे यहां के लोगों का भय कहें या फिर आस्था, लेकिन हकीकत यह है कि करीब 700 साल से इस गांव में ग्रामीणों ने अपने घर में दूसरी मंजिल बनवाने की सोची तक नहीं। यहां के ग्रामीणों का मानना है कि पूरा गांव एक शाप का दंश झेल रहा है, जो घर की दूसरी मंजिल बनाएगा उसके परिवार पर भारी विपदा आ जाएगी।

जिसने बनवाया उस पर आई विपदा

जिसने बनवाया उस पर आई विपदा

राजस्थान की धरती आस्थाओं और मान्यताओं की है। यहां हर गांव, हर अंचल की अपने लोकदेवता के प्रति गहरी आस्था हैं। हालांकि कई ऐसी मान्यताओं भी है, जिन पर विश्वास करना मुश्किल होता है, लेकिन फिर भी उन परंपराओं का ग्रामीण अपने पूर्वजों के दौर से निभाते आ रहे हैं और आगे भी पूरी आस्था के साथ निर्वहन करने की बात दोहराते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है चूरू जिले के उडसर गांव की। ग्राामीणों की मानें तो यहां जिसने भी घर की दूसरी मंजिल बनाने की कोशिश की है, उसके साथ कुछ ना कुछ अनहोनी जरूर हुई है।

700 साल पुरानी भोमिया जी की कहानी

700 साल पुरानी भोमिया जी की कहानी

ऐसे में चूरू का यह गांव आखिर कैसे शापित हुआ और ऐसा क्या कारण है, जिससे चलते गांव में कोई भी अपने घर पर दूसरी मंजिल का निर्माण नहीं कराता है। इसके लिए आपको 700 साल पुरानी एक कहानी को जानने होगा। दरअसल यह पूरी मान्यता लोकदेवता भोमिया जी से जुड़ी हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 700 साल गांव में भोमिया नाम के एक व्यक्ति रहते थे, जिनकी गायों के प्रति गहरी आस्था थी। भोमिया जी का पास ही के गांव आसपालसर में ससुराल था। एक बार की बात है गांव में कुछ लुटेरे आए और वे गायों को चुराकर ले जाने लगे। इस पर भोमिया जी का उन लुटेरों से साथ भंयकर संघर्ष हुआ। युद्ध में गाय तो आजाद हो गई, लेकिन गोभक्त भोमिया जी बुरी तरह जख्मी हो गए थे।

सिर हाथ में लेकर लड़ते रहे भोमिया जी

सिर हाथ में लेकर लड़ते रहे भोमिया जी

युद्ध में बुरी तरह से घायल भोमिया जी भागते भागते अपने ससुराल पहुंच गए और वहां जाकर दूसरी मंजिल पर छिप गए थे और उन्होंने ससुराल के लोगों के अपने बारे में बताने से मना कर दिया था। ऐसे में भोमिया जी की तलाश में लुटेरे उनके ससुराल पहुंच गए और परिवार वालों से मारपीट करने लगे प्रताड़ित होकर उन लोगों ने भोमिया जी के बारे में बता दिया। बताया जाता है कि लुटेरों ने भोमिया जी को कमरे से निकाला और उनका सिर उनके शरीर से अलग कर दिया। लेकिन भोमिया जी अपने सिर को हाथ में लिए हुए चोरों से लड़ते रहे और लड़ते-लड़ते अपने गांव की सीमा के पास आ गए। आखिर में भोमिया जी का धड़ उड़सर गांव में गिरा, जहां भौमिया जी का मंदिर बनवाया गया है।

पत्नी ने दिया गांव को शाप

पत्नी ने दिया गांव को शाप

इस घटना के बाद भोमिया जी की पत्नी ने गांव वालों को शाप दिया कि अगर कोई भी गांव में अपने घर की दूसरी मंजिल पर मकान या कमरा बनाया तो उसका सर्वनाश हो जाएगा। इस शाप के बाद भोमिया जी की पत्नी सती हो गईं। बताया जाता है कि जब से ही इस गांव में लोग आज तक दो मंजिला मकान नहीं बनाया। हालांकि इस घटना का कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं है, लेकिन गांव में दूसरी मंजिल का घर ना होना इस शाप के बारे में लोगों के डर और आस्था दोनों का गवाह हैं।

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