राजस्थान के करौली में काली भैंस ने दिया सफेद बछड़े को जन्म, देखने को उमड़ा पूरा गांव
भैंस के बछड़े (बच्चा) का रंग भी उसी की तरह काली ही होता है, मगर राजस्थान के करौली जिले में अजीब मामला सामने आया है। यहां पर भैंस ने एक अनोखे बछड़े को जन्म दिया, जो दूध से भी ज्यादा सफेद दिखाई देता है। बछड़े के शरीर पर एक भी काला निशान या तिल नहीं है।

इस अनोखे बछड़े का जन्म होते ही उस इलाके के लोगों में चर्चा का विषय बन गया। बछड़े को देखने के लिए करौली के मचानी गांव में भारी भीड़ उमड़ रही है। बछड़े का गोरा सफेद रंग देखकर सभी हैरान रह गए और इसे आठवां अजूबा कहने लगे। यहां तक कि मालिक भी इस अनोखे बछड़े को मां के गर्भ से निकलते देख हैरान रह गया था।
भैंस के मालिक नीरज राजपूत ने बताया कि सफेद बछड़े का जन्म 17 जुलाई को सुबह 4 बजे हुआ था। यह अनोखा सफेद बछड़ा जन्म से ही पूरी तरह स्वस्थ है। बच्चा पूरी तरह सफेद है। इस अनूठे बछड़े को देखने के लिए दूसरे गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग रोजाना नीरज के घर आते हैं।
मालिक नीरज राजपूत ने बताया कि उसकी भैंस देसी नस्ल की है। यह पहली बार है कि भैंस ने सफेद बच्चे को जन्म दिया है। यह एक अन्य भैंस के साथ क्रॉस-ब्रीडिंग थी, लेकिन बछड़े का सफेद रंग होना हर किसी के लिए चौंकाने वाला है।
पशु चिकित्सक डॉ. ब्रह्म प्रकाश पांडे के अनुसार भैंस नस्ल के पशुओं में ऐल्बिनिज़म को एक आनुवंशिक स्थिति माना जाता है, जिसमें उसके शरीर के रंग को निर्धारित करने वाले वर्णक आंशिक या पूर्ण रूप से अनुपस्थित होते हैं, जो आमतौर पर आंखों, बालों और त्वचा में दिखाई देते हैं और कभी-कभी पूरे शरीर पर भी दिखाई देते हैं।
इसे एक ऑटोसोमल आनुवंशिक विकार माना जाता है जिसमें माता-पिता दोनों में इस स्थिति के लिए जीन होते हैं, और बछड़े में भी ऐल्बिनिज़म के लक्षण विकसित होते हैं। ऐसे बछड़ों को सामान्य माना जाता है, लेकिन पूरी तरह से रंगहीन होना एक दुर्लभ बात है, और ऐसे मामले हजारों में एक पाए जाते हैं।
से मामले हजारों में एक पाए जाते हैं।












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