Rajasthan: चुनाव से पहले कांग्रेस में इस्तीफों की झड़ी, पूर्व MLA समेत 100 कार्यकर्ता छोड़ेंगे पार्टी
Rajasthan Congress: राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 की तारीखों के ऐलान से पहले भीलवाड़ा जिला कांग्रेस में फूट सामने आई है। यहां पर पूर्व विधायक, पंचायत समिति प्रधान समेत 100 कार्यकर्ता अपनी पार्टी के खिलाफ मुखर हो गए और इस्तीफे तक की पेशकश कर डाली है। पूरे विरोध का मुख्य कारण भीलवाड़ा जिले से अलग करके नए बनाए गए शाहपुर जिले की मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र की 16 ग्राम पंचायत हैं।

दरअसल, मांडालगढ़ विधानसभा क्षेत्र की इन 16 ग्राम पंचायतों नए जिले शाहपुरा में शामिल कर दिया गया जबकि ये ग्राम पंचायतें भीलवाड़ा जिले में ही रहना चाहती हैं। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार द्वारा नए जिलों के सीमांकन के बाद से ही इन 16 ग्राम पंचायतों को लेकर विरोध शुरू हो गया था, जो राजस्थान विधानसभा चुनाव में भी थमता दिखाई नहीं दे रहा।
भीलवाड़ा जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रामपाल शर्मा ने बताया कि मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र की 16 ग्राम पंचायतों की जनता नवगठित शाहपुर जिले में शामिल नहीं होना चाहती है। इसके लिए लोगों ने धरना भी दिया था। तब हम सब पदाधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया तो धरना उठ गया था, मगर समस्या का समाधान अभी तक नहीं हुआ है। राजस्थान पंचायत राज विभाग ने अपने 27 सितंबर के आदेश से स्पष्ट कर दिया है कि सभी 16 ग्राम पंचायतें शाहपुरा जिले में ही रहेंगी।
उसी समस्या के समाधान को लेकर गुरुवार शाम भीलवाड़ा सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत में रामपाल शर्मा, मांडलगढ़ के पूर्व विधायक प्रदीप कुमार सिंह, मांडलगढ़ पंचायत समिति के प्रधान जितेंद्र कुमार मूंदड़ा, पूर्व प्रधान सतीश जोशी, पूर्व प्रधान कन्हैयालाल जाट, पूर्व उप प्रधान भैरूलाल जाट, कांग्रेस के पूर्व ब्लाक अध्यक्ष शिवकुमार त्रिपाठी सहित सभी 16 ग्राम पंचायत के सरपंच और कांग्रेस के 100 कार्यकर्ताओं ने पार्टी से इस्तीफे से पेशकश की है।
इन कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ होने के बावजूद आगामी चुनाव में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ सकता है। रामपाल शर्मा ने तो यहां तक कहा कि इन सारी घटनाओं से अकेले मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र नहीं बल्कि पूरे जिले की सातों सीटों पर कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ेगा।












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