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Rajasthan: जयपुर में गैस टैंकर विस्फोट के बाद आग की लपटों से घिरा व्यक्ति 600 मीटर चला, वीडियो बनाते रहे लोग

Rajasthan News: जयपुर-अजमेर राजमार्ग पर शुक्रवार सुबह हुए एक भीषण गैस टैंकर विस्फोट ने खौफनाक मंजर पैदा कर दिया। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। जिनमें 32 वर्षीय मोटर मैकेनिक राधेश्याम चौधरी भी शामिल थे। अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करते हुए राधेश्याम आग की लपटों के बीच 600 मीटर तक पैदल चले। लेकिन मदद के लिए पुकारने के बावजूद भीड़ ने उनकी मदद करने के बजाय उनके संघर्ष का वीडियो बनाने को प्राथमिकता दी।

भयावह हादसे का विवरण

राधेश्याम चौधरी जो नेशनल बियरिंग्स कंपनी लिमिटेड में मोटर मैकेनिक थे। सुबह-सुबह अपनी मोटरसाइकिल पर घर से निकले थे। जब वह पेट्रोल पंप के पास पहुंचे तो एक गैस टैंकर में हुए विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। आग की लपटों से बचने की कोशिश में राधेश्याम को अपनी मोटरसाइकिल छोड़नी पड़ी।

jaipur

घटना के बाद के दृश्य दिल दहला देने वाले थे। राधेश्याम जिनका शरीर 85 प्रतिशत तक जल चुका था। मदद की गुहार लगा रहे थे। लेकिन वहां मौजूद लोग मदद के लिए आगे आने के बजाय अपने फोन पर वीडियो बनाते नजर आए।

भाई की दर्दनाक कहानी

राधेश्याम के भाई अखेराम को सुबह करीब 5:50 बजे एक अजनबी ने फोन कर बताया कि उनका भाई हीरापुरा बस टर्मिनल के पास घायल अवस्था में है। अखेराम जब वहां पहुंचे तो उन्होंने राधेश्याम को सड़क पर तड़पते हुए पाया। अखेराम ने कहा कि वह मदद के लिए चिल्ला रहा था। लेकिन लोग केवल वीडियो बना रहे थे।

आखिरी संघर्ष और मौत

अखेराम ने अपने पड़ोसियों की मदद से राधेश्याम को तुरंत कार में डालकर जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल पहुंचाया। रास्ते में राधेश्याम होश में थे और उन्होंने विस्फोट के भयानक पलों को साझा किया। हालांकि अस्पताल में भर्ती होने के कुछ घंटों बाद उनकी गंभीर चोटों के कारण मौत हो गई।

13 लोगों की मौत और सुरक्षा सवाल

इस घटना में राधेश्याम सहित कुल 13 लोगों की मौत हो गई। जयपुर-अजमेर राजमार्ग को पहले से ही एक ब्लैकस्पॉट के रूप में पहचाना गया था। लेकिन इस हादसे ने राजमार्ग की सुरक्षा और आपातकालीन उपायों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सार्वजनिक प्रतिक्रिया पर सवाल

हादसे के दौरान लोगों की निष्क्रियता ने सामाजिक जागरूकता की कमी को उजागर किया है। जब राधेश्याम मदद के लिए पुकार रहे थे। लोग उनकी सहायता करने के बजाय अपने फोन से वीडियो बना रहे थे। यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी संवेदनशीलता और नैतिकता कहीं खो गई है।

जरूरत बेहतर सुरक्षा और जागरूकता की

इस त्रासदी ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि राजमार्गों पर सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और आपातकालीन स्थितियों में सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए जागरूकता फैलाने की तत्काल आवश्यकता है। यह घटना न केवल प्रभावित परिवारों के लिए एक दर्दनाक यादगार बन गई है। बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि ऐसी स्थितियों में मानवीयता और त्वरित प्रतिक्रिया कितनी महत्वपूर्ण है।

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