20 साल पहले बना था चपरासी, आज 100 करोड़ का मालिक
लखनऊ। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने शुक्रवार को जेडीए ऑफिस में कार्यरत एक अधिकारी के ऑफिस और बंगले समेत चार अलग ठिकानों पर छापामारी की। छापेमारी के दौरान पकड़ी गई संपत्ति की रकम चौंकाने वाली है। एसीबी ने जेडीए में कार्यालय अधीक्षक पद पर तैनात मुकेश मीणा के तुंगा, बस्सी व लालकोठी पर छापा मारा। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायतों के मद्देनजर एसीबी ने यह कार्रवाई की थी। छापे की कारवाई में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को मीणा की 100 करोड़ की संपत्ति का पता चला है। मीणा ने 20 साल की नौकरी में सौ करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बटोरी है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक उसके बेनामी संपत्ति के 10 से अधिक ठिकाने हैं।

मुकेश मीणा की आठ आलीशान कोठियों बताई जा रही हैं और दो फार्महाउस जयपुर के बाहरी इलाके बस्सी और तुंगा में हैं। इसके अलावा मीणा ने अपने पैतृक गांव में भी कोठीनुमा घर बनवा रखा है। मीणा के पास से कई लग्जरी गाड़ियां भी मिली हैं। ऐसीबी की टीम ने मीणा के ठिकानों से काफी संख्या में कागज जब्त किए है। जिसकी जांच चल रही है।
करोड़पति बाबू
मुकेश मीणा का चपरासी से करोड़पति बनने तक का सफर बड़ा ही फिल्मी है। आपको बता दें कि जयपुर विकास प्राधिकरण में कार्यालय अधीक्षक मुकेश मीणा वर्ष 1991 में मृतक आश्रित कोटे में चपरासी के पद पर जेडीए में नियुक्त हुआ था। उसके पिता लल्लू लाल मीणा जेडीए में अकाउंटेंट थे। उनके निधन के बाद मुकेश को जेडीए में चपरासी बनाया गया। 1998 में मुकेश मीणा को एलडीसी पद पर नियुक्ति मिली। इसके बाद मीणा को कार्यालय अधीक्षक पद पर पदोन्नति मिली। अब मीणा जेडीए की विधि शाखा में कार्यालय अधीक्षक के पद पर कार्यरत है। बाबू बनने के साथ ही उसने गलत तरीके से प्रॉपर्टी बनाना शुरू कर दिया था। मीणा जयपुर शहर के विवादित पृथ्वीराज नगर योजना में कई सालों तक तैनात रहा इस दौरान इसने अवैध ढंग से काफी संपत्ति जमा की। इस दौरान जमीन कारोबारियों से भी उसके संबंध बन गए थे।












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