Rajasthan News: दुनिया का पहला ओम मंदिर जानिए कहां पर है,आज सीएम भजनलाल शर्मा ने की प्राण प्रतिष्ठा
Rajasthan News: प्रदेश के पाली में दुनियां का एकमात्र ओम आकृति में बने शिव मंदिर का आज मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में भव्य प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन हुआ।
दुनिया का एकमात्र ओम् आकार का शिव मंदिर की मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संतों के साथ विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की।

अयोध्या के राम मंदिर में भगवान रामलाल की भव्य और ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा के बाद देश के पाली मेंं एक और विशाल व भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हुई।
ओम् आकार में बनाए गए दुनिया के एकलौते मात्र शिव मंदिर का निर्माण पाली के जाडन स्थित ओम् आश्रम में किया गया है।
यह मंदिर इतना भव्य है कि इसे बनाने में 28 साल लग गए। इसका श्रेय जाता है विश्वदीप गुरुकुल के महामंडलेश्वर महेश्वरानंद महाराज को।
बचपन में गांव के जंगल में भेड़ बकरियां चराने वाले संत महेश्वरानंद ने पूरे विश्वभर में 45 हजार से ज्यादा ध्यान योग केंद्र की स्थापना की है।
उन्होंने लाखों विदेशियों को मांसाहार छोड़ योग और अध्यात्म के रास्ते पर चलने को प्रेरित किया है।
प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दोपहर 2.15 बजे पहुंचे और मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद वे संत महेश्वरानंद के साथ लौटे और मंदिर के बारे में चर्चा की।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभा को भी संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने किया संबोधित, कहा- मंदिर की भव्यता देख मुझे हर्ष हुआ ।
इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संबोधन में कहा कि मंदिर की भव्यता देख खुशी हो रही है। यह मंदिर 28 साल की लम्बी यात्रा और संघर्ष के बाद बना।
दुनिया का पहला ओमाकार शिव मंदिर है। यह भारतीय वास्तु शिल्प व स्थापत्य का सामंजस्य है। पीएम मोदी देश के मंदिरों का जीर्णोद्धार कर रहे हैं। सनानत धर्म, सांस्कृतिक परंपरा को दुनिया में स्थापित कर रहे हैं। काशी विश्वनाथ, उत्तराखंड केदारनाथ धाम, उज्जैन का महालोक काल का भव्य जीर्णोद्धार किया है।
राजस्थान में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सर्किट बना रहे हैं। बाणेश्वर धाम, त्रिपुरा सुंदरी, सीता माता अभ्यारण्य को जोड़कर तीर्थ सर्किट बनाया जा रहा है।
मंदिर जीर्णोद्धार के काम के लिए 300 करोड़ दिए हैं। खाटूश्याम, मेहंदीपुर बालाजी, पूंछड़ी का लौठा, सालासर धाम का जीर्णोद्धार किया गया है। महाराणा प्रताप का स्मारक बनाया जा रहा है, मीरांबाई के स्मारक का विकास किया जाएगा।
प्रदेश की पानी की समस्या पर भी काम किया जा रहा है। सरकार ने आते ही ईआरसीपी पर काम किया। इससे 12 जिलों को फायदा होगा। इसी तरह शेखावाटी के जिलों के लिए यमुना के पानी की व्यवस्था पर सरकार ने हरियाणा से बात की है।
पाली में जाडन के पास नेशनल हाईवे-62 पर विश्वदीप गुरुकुल (ओम् आश्रम) है। गुरुकुल का संचालन स्वामी महेश्वरानंद महाराज करते हैं। जिनके देश-विदेश में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं।
विश्वदीप गुरुकुल ट्रस्ट ने ही गुरुकुल परिसर में ओम् आकार का भव्य शिव मंदिर बनवाया है। जाडन आश्रम में मंदिर की नींव 1995 में रखी गई थी। अब शिव मंदिर बनकर तैयार है।
देव पूजन, ध्वज दंड हुआ
प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के तहत सुबह 9 बजे से ओम् आश्रम में देव पूजन, ध्वज दंड, शिखर पूजन हुआ। इसके बाद दोपहर में मूर्ति प्रतिष्ठा हुई।
साथ ही हवन, पूर्णाहुति, महाआरती के बाद प्रसादी कार्यक्रम हुआ। दोपहर 12.30 बजे से 1.30 बजे तक अभिजित मुहूर्त में बांसवाड़ा जिले के राजपुरोहित त्रिपुरा सुंदरी मंदिर के उपासक निकुंजमोहन पंड्या और सह आचार्य पंडित कपिल त्रिवेदी मंत्रोच्चारण के साथ विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम सम्पन्न कराया।
जानिए कैसे एक बकरियां चराने वाला बना महामंडलेश्वर
महामंडलेश्वर महेश्वरानंदपुरी महाराज ने दुनियाभर में 45 हजार से ज्यादा ध्यान योग केंद्र की स्थापना की है। दुनियाभर के लोगों को नॉनवेज छोड़ने के लिए प्रेरित किया और योग व अध्यात्म की शिक्षा दी। एक साधारण परिवार का बच्चा कैसे स्वामी महेश्वरानंद बना। वह बच्चा जो स्कूल छोड़कर जंगल में बकरियां ऊंट चराने चला जाता था।
संत महेश्वरानंद ने बताया- मेरा जन्म 15 अगस्त 1945 को पाली जिले के रूपावास पुरोहितान (सोजत) में हुआ। माता का नाम फूलीदेवी और पिता का नाम किशनाराम था। हम 4 भाई और 3 बहनें हैं। जब मैं 9 साल का था तो मेरा मन स्कूल में ज्यादा लगता नहीं था।
ऐसे में स्कूल से भागकर जंगल में शांति की तलाश में चला जाता था। वहां बकरियां और ऊंट चराता था और जंगल की शांति मेरे मन को काफी सुकून देती थी।
घर पर जब यह पता चला कि मैं स्कूल से भागकर जंगल में चला जाता हूं तो मां बहुत गुस्सा हुई और स्कूल में पढ़ाई करने के लिए कहा।
संत माधवानंद पुरी ने हाथ थामा तो बदला जीवन
उन्होंने बताया कि एक दिन नीपल धाम (देसूरी, पाली) के संत माधवानंद पुरी गांव आए थे। तब मां के साथ मैंने भी उनका आशीर्वाद लिया था। इस दौरान मां ने उनसे कहा कि यह पढ़ाई नहीं करता और जंगल में चला जाता है। बकरियां-ऊंट चराता है। इस पर उन्होंने कहा कि इसे मुझे सौंप दो, मैं इसे ऐसा बना दूंगा कि आपके परिवार को इस पर गर्व होगा।
इस पर मां से आज्ञा मिलने पर मैं 9 साल की उम्र में स्वामी माधवानंद के सान्निध्य में नीपल धाम चला गया। गुरुजी के सान्निध्य में रहकर योग, ध्यान, धर्म शास्त्र, अध्यात्म की सीख ली।
ओम आकृति में शिव मंदिर की क्या है खास बातें
ॐ के आकर में बने इस शिव मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंग स्वरूप भगवान शिव का मंदिर का निर्माण हुआ है। इस मंदिर को 4 खंडों में बांटा गया है। इस मंदिर में भगवान शिव की 1008 प्रतिमाएं ,7 ऋषियों की समाधियां विराजमान है।
इस मंदिर का शिलान्यास साल 1995 में हुआ था। 28 साल में बने इस भव्य मंदिर में 4 मंजिला इमारत में स्कूल और कॉलेज भी संचालित है। 108 कमरों का यह भव्य मंदिर करीब 250 एकड़ में फैला हुआ है।












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