मां-बेटी ने ली दीक्षा: 11 साल की सारा सबसे कम उम्र की संन्यासिनी बनी, मां ने छोड़ी सरकारी नौकरी
Youngest Monk Sara From Pratapgarh Rajasthan: राजस्थान में मां-बेटी की जोड़ी ने संन्यास ले लिया। इसके लिए मां ने सरकारी नौकरी से इस्तीफा तक दे दिया। वहीं, बेटी भी महज 11 साल की उम्र में संयम मार्ग चुना है। ऐसा करके वह सबसे कम उम्र की संन्यासिनी बन गई है।
राजस्थान के प्रतापगढ़ के छोटी सादड़ी के नगर में रविवार सुबह आचार्य कुलबोधी सुरीश्वर महाराज आदिठाणा पांच एवं साध्वी सौम्यरत्ना श्रीजी आदि ठाणा पांच की पावन सान्निध्य में भव्य दीक्षा समारोह का आयोजन किया गया।

आयोजन में मां बेटी ने दीक्षा ग्रहण की। सरकारी से इस्तीफा देकर दीक्षा ग्रहण करने वाली 40 वर्षीय प्रीति बेन को नया नाम प्ररार्थ रत्ना और 11 साल की बेटी सारा को नया नाम गीतार्थ दिया गया है।
बता दें कि दीक्षा समारोह सकल जैन श्रीसंघ के संतों के सान्निध्य में हुआ। इससे पहले प्रीति बेन ने जब खुद व बेटी सारा के दीक्षा का विचार घर पर शेयर किया तो हर किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश की।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रीति को परिजनों ने उनसे कहा कि बेटी अभी महज 11 साल की है। उसके सामने पूरी जिंदगी पड़ी है, जबकि जो राह वह चुन रही वो काफी कठिन डगर है। लेकिन प्रीति व उसकी बेटी संयम मार्ग पर चलने के लिए अड़ी रही। 21 अप्रैल को दीक्षा ले ली।
रविवार को जब मां-बेटी ने सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यास धारण किया तो परिजनों की आंखें भर आई। दोनों ने धवल वस्त्र धारण किए और साध्वी बन गई। बाकी जीवन धर्म की राह पर चलने का फैसला लिया है।
पूर्व में मीडिया से बातचीत में प्रतापगढ़ के छोटी सादड़ी में विराजित आचार्य कुलबोधी सुरीश्वर ने बताया कि हमारे दिशाहीन जीवन को सही दिशा देने का एकमात्र मार्ग दीक्षा ही है। दीक्षा संसार से विरक्त होकर संयम पथ पर चलने का सारे कर्मों को खपाकर मोक्ष मार्ग की तरह बढ़ने का एक मात्र साधन है।












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