रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी ने दिया इस्तीफा, भाजपा से लड़ सकते हैं चुनाव
रायपुर। चुनाव आते ही नेताओं के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों पर भी सियासी रंग चढ़ने लगा है। इसी क्रम में तमाम अटकलों के बाद रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी ने इस्तीफा दे दिया। वे 2005 बैच के आईएएस अफसर हैं। हालांकि अभी उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है लेकिन ये चर्चाएं हैं कि भाजपा ने उन्हें मना लिया है और रायगढ़ जिले की खरसिया विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार होंगे।

दरअसल खरसिया विधानसभा हमेशा से कांग्रेस का गढ़ रही है। 1989 के बाद से अब तक भाजपा को जीत नहीं मिली। पहले इस सीट से मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह लड़ा करते थे। उसके बाद दिवंगत कांग्रेसी नेता व पूर्व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल इस सीट से लड़ते रहे हैं। अब इस सीट से उनके बेटे उमेश पटेल चुनाव लड़ते हैं। ऐसे में खरसिया सीट पर सेंध लगाने के लिए भाजपा को एक बड़े कद के नेता की जरूरत थी। जो कि ओपी चौधरी पर पूरी हुई। चूंकि चौधरी रायगढ़ जिले से ही आते हैं। इतना ही नहीं वे अघरिया समुदाय से भी हैं जिस जाति की खरसिया सीट में बहुलता है। वे क्षेत्र में खासे लोकप्रिय भी हैं। ऐसे में सियासी समीकरण के हिसाब से वे फिट बैठते हैं। इसी कारण भाजपा पुरजोर कोशिश में लगी थी कि वे पार्टी ज्वाइन कर लें।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओपी चौधरी का इस्तीफा डीओपीटी पहुंच गया है। साथ ही खबर है कि इस्तीफा मंजूर भी कर लिया गया है। रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी के भाजपा में शामिल होने की चर्चा कई दिनों से चल रही है, अब इस चर्चा पर मुहर लगते दिखाई दे रहा है |
जानकारी के मुताबिक बीते दो माह से भाजपा आलाकमान से ओपी चौधरी की चर्चा चल रही थी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रायपुर आगमन के दौरान भाजपा प्रवेश की तैयारी भी चल रही थी, लेकिन शाह का दौरा टलने से प्रवेश नहीं हो सका। अब आगमी कुछ दिनों में किसी बड़े कार्यक्रम में प्रवेश कराया जाएगा। ओपी चौधरी रायगढ़ जिले के बयांग गांव के रहने वाले हैं और अघरिया समुदाय के रोल मॉडल माने जाते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के बेहद खास माने जाते हैं चौधरी
23 साल की उम्र में आईएएस बनने वाले ओपी चौधरी मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेहद खास माने जाते हैं। उन्हीं के समझाने के बाद चौधरी ने ये फैसला लिया है।
खरसिया में सक्रीय हैं चौधरी
अचानक खरसिया में सक्रियता बढ़ाने के कारण पहले से ही ये उम्मीद जताई जा रही थी कि ओपी चौधरी राजनीति में प्रवेश करने वाले हैं लेकिन इस्तीफे के बाद इस पर मुहर लग गई है।












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