छत्तीसगढ़ : मतदाताओं का गुस्सा, सड़क नहीं तो वोट नहीं

गांव के लोगों ने एक बैठक में एकमत से निर्णय लिया कि जब तक सड़क नहीं, तब तक मतदान नहीं। ग्रामीणों ने गांव में लगे विभिन्न पार्टियों के चुनावी पोस्टर और बैनर भी हटा दिए हैं। बैठक में मौजूद ग्राम प्रमुख शेष नारायण वर्मा, पटेल जीवनलाल सिन्हा, सहित गज्जू वर्मा, लच्छन नायक, मोतीराम ध्रुव और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में यह गांव टापू बन जाता है। वहीं गर्मी के दिनों में चार इंच मोटी धूल जम जाती है। टेकारी के अलावा अमेठी, जेठानी, सुहेला व देवरानी गांवों में सड़क नहीं है।
ग्रामीण बताते हैं कि यहां केवल काली मिट्टी वाली पगडंडी या रास्ता है। धान की कटाई शुरू हो चुकी है और काली मिट्टी वाले रास्ते अमेठी-जेठानी पर धान के बीड़े से भरे दो-तीन ट्रैक्टर व बैलगाड़ियां पलट चुकी हैं। पड़कीडीह-टेकारी और टेकारी-रानीजरौद मार्ग के 15 अक्टूबर से प्रारंभ होने की जानकारी दी गई थी। लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने कहा कि अब वे किसी भी राजनीतिक दल के बहकावे में नहीं आने वाले हैं।
गांव के सरपंच अंजू खिलेंद्र वर्मा ने खुद को ग्रामीणों के साथ बताते हुए कहा, "बीते चार वर्षो में मैंने अपने स्तर पर सड़क निर्माण का प्रयास किया, विकास राशि मांगी, मिन्नतें कीं लेकिन सिर्फ असफलता ही हाथ लगी।" वहीं, पीएमजेएसवाई के इंजीनियर इग्नेश र्कु ने बताया कि पड़कीडीह, आमाकोनी, टेकारी मार्ग टेंडर, एग्रीमेंट और सर्वे भी हो चुका है। दीपावली थी, इसलिए काम शुरू नहीं हुआ। एक दो दिनों में शुरू हो जाएगा।
मामला बेहद संवेदनशील है। ग्रामीणों को अधिकारियों की बात पर भरोसा नहीं है। बहरहाल, चुनाव बहिष्कार की खबर से प्रशासन परेशान है।












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