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उम्र 60 बरस, 22 साल का कड़ा संघर्ष, अब मिलेंगे 367999 रुपये और हर महीने पेंशन !

हर इंसान अपने रिटायरमेंट की उम्र में शांति और सुरक्षा के साथ जीवन बिताना चाहता है। कोई नहीं चाहता कि 60 की उम्र में किसी नए संघर्ष से सामना हो, रायपुर की धनेश्वरी भी यही चाहती हैं।

रायपुर, 14 जुलाई। हर इंसान अपने रिटायरमेंट की उम्र में शांति और सुरक्षा के साथ जीवन बिताना चाहता है। कोई नहीं चाहता कि 60 की उम्र में किसी नए संघर्ष से सामना हो, रायपुर की धनेश्वरी भी यही चाहती हैं। 60 साल की अविवाहित धनेश्वरी ठाकुर स्वतंत्रता संग्राम सैनानी रहे ठाकुर घनश्याम सिंह की बेटी हैं ,जिन्हे 22 साल तक पेंशन के लिए दर दर ठोकरें खानी पड़ी।

पेंशन के लिए 12 साल तक लड़ना पड़ा मुकदमा

पेंशन के लिए 12 साल तक लड़ना पड़ा मुकदमा

रायपुर निवासी धनेश्वरी ठाकुर की उम्र 60 साल हो चुकी है। वह स्वतंत्रता संग्राम सैनानी रहे ठाकुर घनश्याम सिंह की बेटी होने के नाते सरकार से सम्मान निधि (पेंशन) की पात्र हैं, लेकिन उन्हें अपने हक़ के लिए 22 साल तक लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ी है। सालों तक न्याय की आस में अदालतो के चक्कर लगाते हुए उन्होंने डेढ़ लाख से अधिक रुपये खर्च कर दिए। लगभग 12 साल तक मुकदमा लड़ने के बाद 17 मार्च 2017 को हाईकोर्ट ने उनको पेंशन का हकदार मानते हुए, विवाह होने तक पेंशन और एरियर्स का भुगतान करने के आदेश दिए हैं । अब याचिकाकर्ता को 8 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ राशि देनी होगी।

नहीं की शादी ,पिता ही थे सब कुछ

नहीं की शादी ,पिता ही थे सब कुछ

धनेश्वरी जब वह 37 वर्ष की थीं ,तब उनके पिता घनश्याम सिंह ठाकुर का निधन हो गया था। घनश्याम ठाकुर ने 1942 में हुए भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजो के खिलाफ जंग लड़ी थी,इस कारण 2 फरवरी 1998 को मध्यप्रदेश शासन ने आदेश जारी कर उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा दिया था। देश के प्रति योगदान को ध्यान में रखते हुए घनश्याम सिंह ठाकुर को प्रति माह 1250 रुपए पेंशन मिलती थी । धनेश्वरी सिंह के अविवाहित रहने के कारण उनके पिता ने उन्हें अपना आश्रित घोषित माना था।

1999 में पिता के गुजर जाने के बाद धनेश्वरी सिंह ने शासन के समक्ष पेंशन और अन्य लाभ देने की मांग करते हुए आवेदन किया था ,जिसे 23 अगस्त 2005 को राज्य सरकार ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ही पेंशन की हक़दार होती है । इस मामले में घनश्याम सिंह ठाकुर की पत्नी की भी मृत्यु हो चुकी है,लिहाजा उनकी बेटी को पेंशन की पात्रता नहीं दी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

शासन के समक्ष दावा खारिज होने के बाद यह प्रकरण हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा । लगभग 12 साल तक मुकदमा लड़ने के बाद 17 मार्च 2017 को हाईकोर्ट ने धनेश्वरी को पेंशन का हकदार ठहराते हुए उनकी विवाह होने की दिनांक तक पेंशन और एरियर्स का भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं । याचिकाकर्ता को 8 फीसदी सालाना ब्याज के साथ राशि देनी होगी। न्यायमूर्ति संजय के अग्रवाल की पीठ ने मामले में शासन पर 10 हजार रुपए कास्ट किया है। इस मामले में अदालत की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को यथावत रखा है और शासन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील को खारिज कर दिया है ।

अब मिलेंगे 367999 रुपए और पेंशन

अब मिलेंगे 367999 रुपए और पेंशन

धनेश्वरी ठाकुर का कहना है कि जब उनका आवेदन निरस्त हुआ था , तब उनके पास हाईकोर्ट में प्रकरण लगाने के लिए भी पैसे नहीं थे। जब अफसरों से इस संबंध में बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मामले के संबंध में जानकारी लेते हैं। जो भी सही निर्णय होगा, हम लेंगे। बहरहाल छत्तीसगढ़ सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने आज़ादी की लड़ाई के नायक रहे घनश्याम सिंह ठाकुर की पुत्री धनेश्वरी की पेंशन मंजूर कर ली है। उन्हें बीते 22 साल के एरियर्स के बतौर 367999 रुपए मिलेंगे। इसके अतिरिक्त अब उन्हें जीवनभर हर माह पेंशन भी मिलेगा। 60 साल की धनेश्वरी अब इस सम्मान निधि के सहारे अपने बुढ़ापे को काट सकेंगी।

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