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जानिए छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट का अहम फैसला, अब विधवा बहू को मिले जरूरी अधिकार !

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिलाओं के अधिकार के संबंध में एक महत्त्वपूर्ण फैसला सुनाया है। फैसले के मुताबिक अब विधवा हो चुकी महिला को ससुराल वालों से भरण पोषण मिलेगा।

बिलासपुर, 13 जुलाई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिलाओं के अधिकार के संबंध में एक महत्त्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस फैसले के मुताबिक अब विधवा हो चुकी महिला को ससुराल वालों से भरण पोषण मिलेगा। दरअसल इस फैसले से पहले तक हिंदू विवाह अधिनियम में इस संबंध में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। देश में महिला अधिकारों को लेकर हमेशा चर्चा होती रही है। इस बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से आया महत्वपूर्ण आदेश महिलाओं को जानना जरुरी है।

यह है मामला

यह है मामला

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय के जस्टिस गौतम भादुड़ी की डिवीजन बेंच ने एक सुनवाई के दौरान कहा है कि पति की मौत के बाद अगर ससुर अपनी बहू को घर से बेदखल कर देता है, तो पीड़ित बहू को कानूनी रूप से भरण-पोषण का हकदार होगा। यानि ऐसी स्थिति में विधवा हो चुकी महिला कोर्ट के समक्ष अपने भरण पोषण का दावा कर सकती हैं। दरअसल इस मामले में हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के निर्णय को सही ठहराया है।

मिली जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ के कोरबा निवासी एक युवती का विवाह वर्ष 2008 में जांजगीरचांपा निवासी युवक के साथ हुआ था। शादी के बाद साल 2012 में महिला के पति की मौत हो गई, जिसके बाद उसके ससुर और ससुराल वालों ने युवती को घर निकाल दिया। ससुराल से निकाले जाने के बाद पीड़िता अपने मायके में रहने लगी। आगे चलकर 2015 में विधवा महिला ने जांजगीर-चांपा जिले की फैमिली कोर्ट में परिवाद दायर करके अपने ससुर और ससुराल पक्ष से भरण पोषण राशि देने की मांग की। फैमिली कोर्ट ने महिला के हित में निर्णय देते हुए ससुर को आदेशित किया कि विधवा बहू को भरण पोषण के लिए पैसे दे।

फैमिली कोर्ट के निर्णय को दी थी चुनौती

फैमिली कोर्ट के निर्णय को दी थी चुनौती

विधवा महिला के ससुर ने फैमिली कोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील की थी। इसमें उन्होंने फैमिली कोर्ट के आदेश को अवैधानिक बताया। कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत कोई भी महिला अपने पति से भरण पोषण के लिए दावा कर सकती है, लेकिन उसकी मौत के बाद ससुरालवालों पर दावा नहीं कर सकती। लिहाजा, फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज किया जाए।

भरण पोषण की हकदार है हिंदू महिला

भरण पोषण की हकदार है हिंदू महिला

बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की सुनवाई के पश्चात् यह स्पष्ट किया है कि हिंदू विवाह अधिनियम के भीतर महिला के पति की मौत के [पश्चात् बहू के पालन की जिम्मेदारी ससुर और ससुरालवालों पर होती है। ऐसे में बहू को उसके पति के घर से बाहर निकालने पर भरण पोषण की जिम्मेदारी भी ससुरालवालों की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पति की मृत्यु के बाद विधवा महिला अपने ससुर या ससुरालवालों पर भरण पोषण के लिए क्लेम कर सकती है।

नहीं था स्पष्ट प्रावधान

नहीं था स्पष्ट प्रावधान

यह फैसला महिला अधिकारों को मजबूती देने वाला एक बड़ा पक्ष है,क्योंकि इससे पहले तक यदि विवाह संबंध विच्छेद होता था.तब हिंदू विवाह अधिनियम के तहत महिला अपने पति से जीवन चलाने के लिए भरण पोषण की मांग कर सकती थी । यह साफ़ नहीं था कि यदि पति की असमय मौत हो जाए और विधवा महिला को ससुराल से बेदखल किये जाने की स्थिति में उसके जिम्मेदारी और भरण पोषण की जवाबदेही किसकी होगी। लेकिन, हाईकोर्ट के इस निर्णय के पश्चात अब विधवा महिला अपने ससुराल पक्ष पर भरण पोषण के लिए दावा कर सकती हैं।

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