पंजाब की पांचों नदियों में आया परिवर्तन का सैलाब देश भर में फैलेगा!
पंजाब की पांचों नदियों में परिवर्तन का सैलाब उमड़ गया है। इसका असर पूरे देश में होगा। आम आदमी पार्टी ने 92 सीट जीत कर एक नया इतिहास बनाया है।
चंडीगढ़, 13 मार्च। पंजाब की पांचों नदियों में परिवर्तन का सैलाब उमड़ गया है। इसका असर पूरे देश में होगा। आम आदमी पार्टी ने 92 सीट जीत कर एक नया इतिहास बनाया है। अरविंद केजरीवाल की सिर्फ 10 साल पुरानी पार्टी ने वह कर दिखाया जो एक सौ छत्तीस साल पुरानी पार्टी नहीं कर सकी। भ्रष्टाचार और जातिवाद से उबी हुई जनता नयी हवा में सांस लेना चाहती थी। उसने वोट से आप की तिजोरी भर दी। अरविंद केजरीवार किसी जात के नेता नहीं। इसलिए उन्हें सिखों और हिन्दुओं का भरपूर समर्थन मिला। हरित क्रांति के बाद पंजाब में अब राजनीतिक क्रांति की जमीन तैयार हो रही है। अगर पंजाब की प्रयोगशाला में राजनीति का यह प्रयोग सफल रहा तो देश की जनता भी इसे स्वीकार कर लेगी। पंजाब में अगर असंभव संभव हुआ तो देश में भी हो सकता है। क्रांति वक्त की मोहताज नहीं होती।

हंसने वाले हंसते रहें, आप का कमाल दर कमाल
आप ने पंजाब में जो ऐतिहासिक जीत हासिल की है उससे उसकी राष्ट्रीय स्वीकार्यता बढ़ेगी। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने शासन का नया मॉडल पेश किया। आलोचक अरविंद केजरीवाल के पहनावे और घोषणाओं की हंसी उड़ाते रहे। लेकिन इन बातों बेपरवाह केजरीवाल, दिल्ली में चुनाव दर चुनाव जीतते रहे। अगर नरेन्द्र मोदी की लहर के बीच आप लगातार चुनाव जीत रही है तो यह उसकी मकबूलियत का सबूत है। किसी के हंसने या नजरअंदाज करने से क्या होगा ? जिसके साथ जनादेश है वही सबसे बड़ा नेता है। दो राज्यों की जनता अब केजरीवाल के साथ है। इसका दायरा अभी और बढ़ेगा। एक मुख्यमंत्री भी बहुत बड़ा फर्क पैदा कर सकता है। उसकी कामयाबी कैसे राष्ट्रीय परिदृश्य को बदलती है, यह नरेन्द्र मोदी को देख कर समझा जा सकता है। अरविंद केजरीवाल नरेन्द्र मोदी का विकल्प बनेंगे, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। कांग्रेस की दो राज्यों में सरकार है। लेकिन उसकी स्थिति अब क्षेत्रीय दलों से भी कमजोर है। अब तो प्रियंका गांधी भी फेल हो गयीं। सो कांग्रेस में नरेन्द्र मोदी का विकल्प बनने की क्षमता नहीं है। दूसरी तरफ अरविंद केजरावील ही ऐसे एकमात्र नेता हैं जिनके दल की दो राज्यों में सरकार होगी। इस लिहाज से वे ममता बनर्जी, चंद्रशेखर राव, जगन मोहन रेड्डी, स्टालिन जैसे क्षेत्रीय महारथियों से बहुत आगे हैं। ऐसे में अगर आप, राष्ट्रीय विकल्प बनने की तरफ अग्रसर होगी तो किसी को आश्चर्य नहीं।
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परिवर्तन का प्रवाह इसी तरह आता है
भाजपा बेशक बड़ी पार्टी है। लेकिन वह 2004 और 2009 में लगातार दो चुनाव हार कर हताशा के भंवर में फंसी थी। अटलबिहारी वाजपेयी जैसे चमत्कारी नेता राजनीति से अवकाश ले चुके थे। लेकिन नरेन्द्र मोदी एक धुमकेतू की तरह उभरे और देखते देखते भारत की राजनीति पर छा गये। नरेन्द्र मोदी के इस शक्तिशाली स्वरूप की किसी ने कल्पना नहीं की थी। उनकी छवि तो बेदाग रही। लेकिन रोजगार सृजन और महंगाई नियंत्रण के मामले में वे जनता की उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाये। अगर पेट में रोटी की आग लगी हो तो विचारधारा उसमें भष्म हो जाती है। देश की जनता भी जीवन में नया सवेरा देखना चाहती है। अभी विकल्प नहीं है। लेकिन वह आप की तरफ आशा भरी नजरों से देख रही है।
नया विकल्प चाहती थी जनता
पंजाब की जनता ने अकाली दल और कांग्रेस के शासन को देख लिया था। नशाखोरी की मार से जनता त्रस्त थी। रोजगार की कमी से नौजवान अपने रास्ते से भटक रहे थे। अकाली दल और कांग्रेस, दोनों ने जनता की उम्मीदों को पूरा नहीं किया। बल्कि कहें तो धोखा दिया। आरोप लगा कि ड्रग सिडिंकेट राजनीतिक संरक्षण में चल रहा है। अकाली दल के कई नेताओं को कठघरे में खड़ा किया गया। किसानों के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने अपना वायदा पूरा नहीं किया। किसान जितना भाजपा से नाराज थे उतना ही कांग्रेस से भी। अवैध रेत खनन मामले में चरणजीत सिंह चन्नी के भतीजे का नाम आने के बाद लोगों का कांग्रेस सरकार से भरोसा उठ गया। जनता कांग्रेस और अकाली दल, दोनों को खारिज करना चाहती थी। वह आप की तरफ देख तो रही ती लेकिन उसके मन में खटका था। पंजाबियों को लग रहा था कि जीतने पर केजरीवाल कहीं किसी बाहरी को सीएम न बना दें। लेकिन जैसे ही आप ने भगवंत मान को अपना चुनावी चेहरा बनाया, जनता की सारी दुविधा दूर हो गयी। क्या किसान, क्या जाट सिख ,क्या दलित सिख, क्या हिंदू, सभी ने आप के लिए एकतरफा वोट किया। कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा को सबक सिखा कर जनता ने बता दिया कि वह किसी तुर्रम खां को नहीं जानती। वोट लेकर धोखा देने वाले नेताओं को उनकी हैसियत बता दी। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का दोनों सीटों से हारना, एक बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश है।
ऐसे बदला जनता का मन
किसान नेताओं के चुनाव लड़ने से भी जनता गुमराह नहीं हुई। भगवंत मान के सीएम प्रोजेक्ट होते ही उसने अपना लक्ष्य तय कर लिया। पंजाब में सत्ता का रास्ता मालवा से होकर निकलता है। आप ने मालवा की 69 सीटों में से 66 सीटों पर कब्जा जमाया। पंजाब का यह इलाका किसान आंदोलन का केन्द्र था। किसानों ने आप के लिए एकतरफा वोट कर दिया। बदलाव की आंधी ऐसी चली कि भाजपा के हिंदू वोटर भी आप की तरफ मुड़ गये। आप को करीब 36 फीसदी हिंदू वोट मिले हैं। नाराजगी के तूफान में कैप्टन अमरिंदर सिंह भी उड़ गये। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने चन्नी ने अधिक शासन किया था। नरेन्द्र मोदी भी पंजाब में असर पैदा नहीं कर सके। पंजाब में आज तक कोई दलित मुख्यमंत्री नहीं बना था। कांग्रेस ने चन्नी को इस कुर्सी पर बैठा कर नया दांव खेला था। लेकिन उसका यह दांव भी फेल हो गया। जनता अगर बदलाव का मन बना ले तो सभी पूर्वनिर्धारित मानदंड ध्वस्त हो जाते हैं।
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