'बयानों पर मचे बवाल' पर सिद्धू के सलाहकार माली ने तोड़ी चुप्पी, कहा- मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर दिखाया
डॉ. गर्ग और मेरी बैठ नवजोत सिंह सिद्धू के साथ हुई। यह बैठक पंजाब के मुद्दों, सांप्रदायिक सद्भाव, किसानों के विरोध, धन की कमी और पंजाब में मोदी के एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रही ताक़तों से लड़ने के बारे मे थी।
चंडीगढ़, अगस्त 24, 2021। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार मालविंदर सिंह माली की बयानबाज़ी से सियासी पारा चढ़ा हुआ है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर निशाना साध रही है तो वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह भी सिद्धू के सलाहकार से नाराज़ हैं। इन सब मामले पर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के सलाहकार मालविंदर सिंह माली ने वन इंडिया हिंदी से बात की और कई बातों पर अपनी राय रखी।

6 घंटे तक हुई सिद्धू के साथ बैठक
मालविंदर सिंह माली ने कहा कि रविवार को छह घंटे तक डॉ. प्यारे लाल गर्ग और मेरी बैठक नवजोत सिंह सिद्धू के साथ हुई। यह बैठक पंजाब के मुद्दों, सांप्रदायिक सद्भाव, किसानों के विरोध, धन की कमी और पंजाब में मोदी के एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रही ताक़तों से लड़ने के बारे में 99.99 फिसद थी। लेकिन मीडिया में इस किसी और तरह से दिखाया गया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर इंदिरा गांधी वाला पोस्ट सिद्धू के सलाहकार नियुक्त होने से जून में किया था। माली ने कहा कि मेरे विचार मेरे सोशल मीडिया पर व्यक्त किए जाते हैं। मैं इसके लिए जिम्मेदार हूं। मीडिया मुझे किस तरह से पेश करती है मैं इसके लिए जिम्मेदार नहीं हूं। मीडिया मेरे इंटरव्यू को तोड़ मरोड़ कर दिखाती है।
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नवजोत सिंह सिद्धू के सम्पर्क में कैसे आए माली ?
मालविंदर सिंह माली ने बताया कि किस तरह से वह नवजोत सिंह सिद्धू से सम्पर्क में आए। उन्होंने बताया कि नवजोत सिंह सिद्धू से उनकी मुल़ाक़ात फरवरी में चंडीगढ़ में हुई थी। विधायक परगट सिंह के बेटे की शादी में नवजोत सिंह सिद्धू आए थे उसी दौरान उनसे मुलाक़ात हुई थी। नवजोत सिंह सिद्धू ने देखा कि मैं सक्रिय रूप से किसानों के विरोध का समर्थन कर रहा हूं। वह मेरी सोशल मीडिया के पोस्ट से काफ़ी प्रभावित हुए। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बन्ने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू दो बार मेरे घर भी आए थे। पहले वह चंडीगढ़ वाले आवास पर आए बाद में पटियाला मेरे पैतृक घर पर गए। यहां उन्होंने मेरी बीमार मां को देखा। नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार के बारे में घोषणा बाद में हुई थी।
छात्र नेता के तौर की राजनीति की शुरुआत
आपको बता दें कि संगरूर ज़िले के भवानीगढ़ के पास सकरौदी गांव से मालविंदर सिंह माली ताल्लुक रखते हैं। मालविंदर सिंह माली ने कॉलेज में एक छात्र नेता के तौर पर अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। 1980 के दशक में वह पंजाब छात्र संघ के राज्य महासचिव थे। मालविंदर सिंह माली को 1993 में पंजाब पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) और TADA के तहत उनके "भड़काऊ" लेखन के लिए उन्हे अरेस्ट किया था। डेढ़ महीने बाद हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें रिहा कर दिया गया। मालविंदर सिंह माली पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और कई पंजाबी अख़बारों में काम किया है, उन्होंने मोगा और बठिंडा में भी अध्ययन किया। पंजाब में आतंकवाद के दिनों में उग्रवाद के प्रति सहानुभूति रखने वाले के तौर पर भी उन्हें देखा जाता था।
2016 में सेवानिवृत्त हुए माली
मालविंदर सिंह माली स्कूली शिक्षक की नौकरी पर नियुक्त होने से पहले दिवंगत अकाली नेता गुरचरण सिंह तोहरा के प्रेस सचिव थे। 2002 से 2007 तक सीएम रहने के दौरान अमरिंदर और पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल दोनों के साथ एक जनसंपर्क अधिकारी थे। 2007-2012 में शिअद-भाजपा सरकार के दौरान शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका के साथ झगड़ा होने के बाद शिक्षा के अपने मूल विभाग में वापस कर दिया गया था। मालविंदर सिंह माली 2016 में पंजाब के रोपड़ में एक सरकारी स्कूल में शिक्षक के रूप में सेवानिवृत्त हुए।












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