पंजाब में किरकिरी के बाद सिद्धू से दूरी बना रही कांग्रेस, साथियों को भी किनारे लगाने में जुटी पार्टी
चंडीगढ़, 11 अप्रैल। पंजाब कांग्रेस पार्टी का एक बड़ा राज्य था जहां पार्टी काफी मजबूत स्थिति में थी और लंबे समय तक सरकार में भी रह चुकी है। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में जिस तरह से कांग्रेस को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा उसके बाद पार्टी की काफी फजीहत हो रही। पार्टी की हार के पीछे की सबसे बड़ी वजह आंतरिक कलह को माना जा रहा है। जिस तरह से नवजोत सिंह सिद्धू ने पहले पार्टी के भीतर ही तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला, उसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह को उनके पद से हटाया गया, चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री पद सौंपा गया। पार्टी के इस फैसले से नाराज अमरिंदर सिंह ने अलग होकर अपनी पार्टी बना ली तो सिद्धू खुद को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज नजर आ रहे थे, इन तमाम सियासी उठापटक का असर सीधे चुनाव में देखने को मिला और आम आदमी पार्टी ने प्रदेश में ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

राजा वड़िंग को मिली कमान
जिस तरह से नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस पार्टी में आने के बाद पंजाब में पार्टी के सियासी समीकरण में बदलाव किए, गतिरोध को बढ़ाया और पार्टी की चुनाव में दुर्गति हुई उसके बाद माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी अब नवजोत सिंह सिद्धू से दूरी बनाने का मन बना चुकी है। दरअसल अमरिंदर राजा वड़िंग को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया है। अहम बात यह है कि अमरिंदर राजा का सुरजीत धीमान ने विरोध किया था। सुरजीत धीमान को सिद्धू का करीबी माना जाता है और वह अमरगढ़ से कांग्रेस के पूर्व विधायक भी रह चुके हैं। याद रखने वाली बात यह है कि धीमन को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।
धीमान ने लगाए थे गंभीर आरोप
सुरजीत धीमान ने आरोप लगाया था कि जब अमरिंदर राजा यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष थे तो उस दौरान वह भ्रष्टाचार में लिप्त थे। धीमान ने यह तक कहा था कि राजा वड़िंग को कमिटी का अध्यक्ष बनाना गलत फैसला है, वह भ्रष्ट और मौकापरस्त हैं। उन्होंने इस फैसले को पंजाब के खिलाफ बताया था। उन्होंने टिकट बेचने तक का काम किया है,लोगों को उनपर भरोसा नहीं है, लिहाजा हमे उनसे कुछ खास उम्मीद भी नहीं है।
करीबियों को किया गया नजरअंदाज
गौर करने वाली बात है कि पंजाब में कांग्रेस की हार के बाद आला कमान ने नवजोत सिंह सिद्धू से प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने को कहा था। जिसके बाद संगठन को फिर से नए कलेवर में तैयार करने की कवायद शुरू हुई। पार्टी के नए प्रतिनिधित्व में सिद्धू के करीबी सुखपाल सिंह खैरा को दूर रखा गया। लिहाजा जिस तरह से पहले सिद्धू की पार्टी अध्यक्ष के पद से छुट्टी हुई, उसके बाद एक के बाद उनके करीबी नेताओं को अहम पदों से दूर किया गया, माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी सिद्धू से अब दूरी बनाना ही बेहतर समझ रही है।












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