जानिए, कौन हैं सिद्धू के चार 'सिपहसालार' जिनके साथ बनेगी पंजाब जीतने की रणनीति ?
कांग्रेस पंजाब विधानसभा चुनाव में ज़रा सी भी चूक नहीं होने देना चाहती है। कांग्रेस ने ख़ुद को और मज़बूत करने के लिए नए सलाहकार नियुक्त किए हैं। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने चार सलाहकार नियुक्त किए हैं।
चंडीगढ़, अगस्त 11, 2021। कांग्रेस पंजाब विधानसभा चुनाव में ज़रा सी भी चूक नहीं होने देना चाहती है। कांग्रेस ने ख़ुद को और मज़बूत करने के लिए नए सलाहकार नियुक्त किए हैं। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने चार सलाहकार नियुक्त किए हैं। पंजाब कांग्रेस ने नवजोत सिंह सिद्धू को हाल ही में पंजाब कांग्रेस का अध्य़क्ष बनाया था उसी दौरान चार कार्यकारी अध्यक्ष भी पंजाब कांग्रेस ने बनाए थे। आज नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने सलाहकार नियुक्त करने का पत्र जारी किया । सांसद डॉ. अमर सिंह, पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफ़ा, मालविंदर सिंह माली और डॉ. प्यारे लाल गर्ग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने अपना सलाहकार नियुक्त किया है।

पंजाब कांग्रेस के इतिहास में पहली बार किसी अध्यक्ष ने अपने साथ चार सलाहकार नियुक्त किया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए नवजोत सिंह सिद्धू का ये फैसला काफ़ी चुनौती भरा देखा जा रहा है। क्योंकि आज तक कांग्रेस ने कभी इस तरह से सलाहकारों की नियुक्ति नहीं की है। वहीं सियासी गलियारों में ये चर्चा का विषय़ बना हुआ है कि कहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह के ख़िलाफ़ नवजोत सिंह सिद्धू समानांतर सरकार तो नहीं चलाना चाह रहे हैं। ग़ौर करने वाली बात यह है कि चार सलाहकार जिन्हें नियुक्त किया गया है उनमें से एक सांसद अमर सिंह भी हैं जो कभी नवजोत सिंह सिद्धू के मंत्री रहते हुए उनके ओएसडी के तौर पर नियुक्त किए गए थे और बाद में उन्हें ओएसडी के पद से हटा दिया गया था। नवजोत सिंह सिद्धू ने दोबारा से उन्हें अपने सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया है।
इसी तरह और सलाहकारों की नियुक्तियों को भी देखा जा रहा है। इनमें से एक है पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफ़ा जो 2017 चुनाव से पहले से ही सीएम अमरिंदर सिंह के क़रीबी अफ़सरों में शुमार किए जाते थे। पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफ़ा को यह लगता था कि उन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार बनी तो कैप्टन उन्हें डीजीपी बनाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार जैसे बनी उन्होंने पूराने डीजीपी सुरेश अरोड़ा को ही डीजीपी के पद पर बने रहने दिया। जब सुरेश अरोड़ा रिटायर हो गए तो उनकी जगह पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिनकर गुप्ता को डीजीपी का पदभार दे दिया जो कि मुहम्मद मुस्तफ़ा से तजुर्बे में काफ़ी कम थे।
पंजाब सरकार की तरफ़ उस वक़्त डीजीपी बनाने के लिए जो पैनल भेजा गया था उसमें भी मोहम्मद मुस्तफ़ा का नाम नहीं था। इस बाबत मोहम्मद मुस्तफ़ा ने कैट और हाईकोर्ट में चुनौती भी दी थी। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस रवैय्ये से नाराज़ होकर मोहम्मद मुस्तफ़ा कैप्टन अमरिंदर के खेमे को छोड़ कर सिद्धू के खेमे चले गए। मोहम्मद मुस्तफ़ा की मंत्री पत्नी रजिया सुल्ताना भी कैप्टन के खेमे से किनारा कर सिद्धू के खेमे में मानी जा रही है।
मालविंदर माली की बात की जाए तो पहले वह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा के मीडिया सलाहकार रह चुके हैं। लेकिन अब मालविंदर माली विभिन्न मुद्दों पर नवजोत सिंह सिद्धू को सलाह देंगे। मालविंदर माली काफ़ी वक़्त से पंजाब से जुड़े मुद्दों को सोशल मीडिया पर उजागर करने का काम कर रहे हैं। किसान आंदोलन को लेकर भी उनकीह अपनी अलग राय है। नवजोत सिंह सिद्धू को प्रधान बनाये जाने के बाद से मालविंदर माली उनके पक्ष में ही बोलते नज़र आए हैं। एक तरफ़ मोहम्मद मुस्तफा पर सिख युवाओं को मारने के आरोप लगते रहे हैं वहीं दुसरी मालविंदर माली इन्हीं युवाओं के मानवाधिकार के मामले उठाते रहे हैं। यह दोनों एक साथ काम कैसे करेंगे यह भी अपने आप में देखने लायक बात होगी।
डॉ प्यारे लाल गर्ग को भी नवजोत सिंह सिद्धू ने अपना सलाहकार नियुक्त किया है। डॉ. प्यारे लाल गर्ग की बात की जाए तो वह बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस के पूर्व रजिस्ट्रार और सोशल एक्टिविस्ट भी रहे हैं। वह कई सालों से चुनाव में सुधार की मुहिल चला रहे हैं। आजकल 'पिंड बचाओ, पंजाब बचाओ' संगठन में काम कर रहे हैं। वह समाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं। विधानसभा चुनाव के मुद्दे पर समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों के साथ डिबेट कर समाज को जागरुक करने का काम भी करते हैं।












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