पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू क्यों पड़ रहे हैं कमज़ोर, समझिए पूरा मामला
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अपनी बयानबाज़ी की वजह से अब अपनी ही पार्टी में कमज़ोर पड़ते जा रहे हैं।
चंडीगढ़, 13 दिसम्बर, 2021। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अपनी बयानबाज़ी की वजह से अब अपनी ही पार्टी में कमज़ोर पड़ते जा रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी पार्टी पर ही सवालिया निशान लगाते हुए पार्टी आलाकमान की नज़र में अपनी विश्वशनियता खो दी है। पार्टी आलाकमान अब नवजोत सिंह सिद्धू को धीरे-धीरे लगाम कसती हुई नज़र आ रही है। सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर सवालिया निशान लगाते हुए उन्हें इस्तीफ़ा देने पर मजबूर कर दिया। यही वजह है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बग़ावती सुर इख़्तियार करते हुए अपनी सियासी पार्टी बना ली और अब कांग्रेस के लिए कैप्टन की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस ही चुनौती बनी हुई है।

अपनी पार्टी के नेताओं पर साधा निशाना
कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफ़ा देने के बाद जैसे ही चरणजीत सिंह चन्नी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उसके बाद ऐसा लग रहा था कि जैसे पंजाब कांग्रेस में मचे सियासी घमासान पर वीराम लग गया है। लेकिन उसके बाद भी नवजोत सिंह सिद्धू ने कई बार मुख्यमंत्री चन्नी के लिए गए फ़ैसलों पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि यह सब वोट लेने के लिए जनता को लॉलीपोप दिए जा रहे हैं। वहीं उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए, जिसके बाद राहुल गांधी ने कई बार उन्हें दिल्ली में तलब भी किया गया। साथ ही उन्हें अपनी ही सरकार पर निशाना साधने से परहेज़ की सलाह दी, लेकिन सिद्धू फिर भी नहीं माने।

'जो ज़िम्मेदारी दी जाएगी निभाऊंगा'
नवजोत सिंह सिद्धू ने इसके बाद भी अपने ही सरकार को ड्रग्स के मामले पर घेरना शुरू कर दिया। पहले सीएम चन्नी पर निशाना साधा उसके बाद उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा पर भी निशाना साधा, साथ आमरण अनशन तक कि चेतावनी दे डाली। रविवार को एक बार फिर उन्होंने अपनी ही सरकार पर सवालिया निशान लगा दिया, दरअसल चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित ला आडिटोरियम में 'बोलदा पंजाब' कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान सिद्धू से चुनाव के बाद मुख्यमंत्री नहीं बनाने के सवाल पर उन्होंने ने कहा कि 'प्रियंका और राहुल दोनों खानदानी हैं। मैं उनका साथ नहीं छोड़ सकता। मुझे उनके ज़रिये जो भी ज़िम्मेदारी दी जाएगी उसे निभाउंगा।

सिद्धू ने कसा तंज़
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने यह भी कहा कि चुनाव के बाद कांग्रेस की दोबारा सरकार बनने पर यही हाल रहा और कोई बदलाव नहीं हुआ तो मैं ज़िम्मेदारी नहीं लेते हुए छोड़ दूंगा। हालांकि उन्होंने ने यह साफ़ नहीं किया कि वह अध्यक्ष पद, पार्टी या फिर राहुल और प्रियंका गांधी का साथ छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि '2022 में सत्ता में आने के बाद रेत और शराब माफियाओं समेत सभी हालात पुराने जैसे ही रहे तो सिद्धू इन मामलों की ज़िम्मेदारी नहीं लेगा। सिद्धू ने दोहराते हुए कहा कि राजनीतिक सिस्टम में अच्छे लोगों को हमेशा शो पीस की तरह सजा दिया जाता है, लेकिन मैं शो पीस नहीं बनूंगा।' यह आखिरी मौका, अच्छा व्यक्ति नहीं आया तो अराजकता फैल जाएगी।

आवाज़ उठाते रहेंगे सिद्धू
पंजाब में मुख्यमंत्री बदल गया, लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू का अपनी सरकार के प्रति रवैया नहीं बदला। कैप्टन अमरिंदर सिंह से अदावत रखने वाले सिद्धू ने अब चन्नी सरकार को भी धमकाना शुरू कर दिया है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि यदि उनकी सरकार ने ड्रग्स और गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी मामले में रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की तो वह भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे।कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एक बैठक को संबोधित करते हुए सिद्धू ने कहा कि यदि सरकार ने रेत माफिया और शराब माफिया को नहीं मिटाया और टैक्स नहीं जमा कराया तो उनकी सरकार कर्ज से मुक्ति नहीं पा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री इसलिए बदला गया है ताकि गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का मुद्दा सुलझाया जा सके और रेत-शराब माफिया का खात्मा हो। उन्होंने कहा कि अगर पंजाब सरकार एक्शन नहीं लेती है तो वह आवाज उठाते रहेंगे।

खुद को कमज़ोर महसूस कर रहे सिद्धू !
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की अब हालात ऐसे हो गए हैं कि वह अपनी ही पार्टी में अपने आपको कमजोर महसूस करने लगे हैं। सिद्धू ने हाल ही में एक रैली दौरान लोगों को संबोधित करते हुए कहा है कि वह पार्टी के प्रधान तो हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति तक अपनी मर्जी से नहीं कर सकते। उन्होंने अपने आपको पॉवर लेस व्यक्ति बताया है। सिद्धू ने इसके साथ ही कहा है कि अगर उनके हाथ में ताकत होती तो वह राज्य में से नशा और बेअदबी जैसे मामलों में मुजरिमों को सजा दिलवा चुके होते।

सिद्धू पर लगाम लागाने की कोशिश
पंजाब के सियासी गलियारों में यह भी चर्चाएं ज़ोरों पर है कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र अपनी मर्ज़ी के मुताबिक कुछ लोगों की नियुक्तियां करवाना चाहते थे। पार्टी आलाकमान ने नवजोत सिंह सिद्धू की दी गई सूचि को अनदेखा कर दिया। इसके बाद से ही पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू पार्टी में ख़ुद को कमज़ोर महसूस कर रहे हैं। वहीं अपनी बयानबाज़ी में वह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की तारीफ़ों की पुल भी बांधते हुए नज़र आ रहे हैं। ताकि उन्हें आलाकमान की तरफ से चुनाव में पूरी तरह से किनारा न कर दिया जाए।
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