Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी आज, क्या है शुभ मुहूर्त-कथा और पूजाविधि? पारण का टाइम भी नोट करें

Nirjala Ekadashi 2026: आज निर्जला एकादशी का पावन पर्व है, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को हिंदू पंचांग की सभी 24 एकादशियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति पूरे वर्ष की अन्य एकादशियों का व्रत नहीं रख पाता है, तो उसे केवल इस एक व्रत को सच्चे मन से करने से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त हो जाता है।

'इसलिए भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु इस दिन बड़ी श्रद्धा के साथ उपवास रखते हैं और भगवान हरि की आराधना करते हैं। यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आता है।'

Nirjala Ekadashi 2026

निर्जला एकादशी 2026 का शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 05 मिनट से सुबह 04 बजकर 45 मिनट तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर.

पारण का समय

26 जून को सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक


निर्जला एकादशी 2026 का महत्व

पंडित दयानंद शास्त्री ने कहा कि 'निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु अन्न और जल दोनों का त्याग कर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पापों का नाश होता है, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।'

निर्जला एकादशी की पूजा विधि

पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक निर्जला एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के पूजा स्थल में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान को पीले वस्त्र, पीले पुष्प, तुलसी दल, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।

शाम के समय पुनः भगवान विष्णु की आरती करें

व्रत के दौरान अन्न और जल का त्याग किया जाता है। शाम के समय पुनः भगवान विष्णु की आरती करें और जरूरतमंदों को जल से भरा घड़ा, पंखा, छाता, फल तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें। अगले दिन द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त के अनुसार पारण कर व्रत का समापन करें। मान्यता है कि विधिपूर्वक की गई यह पूजा भगवान विष्णु को प्रसन्न कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती है।

निर्जला एकादशी 2026 की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडवों की माता कुंती, द्रौपदी, अर्जुन, नकुल और सहदेव सभी एकादशी का व्रत रखते थे। भगवान विष्णु की कृपा पाने और पापों से मुक्ति के लिए वे पूरे नियमों के साथ उपवास करते थे।पांडवों में सबसे बलशाली भीमसेन थे। उन्हें भोजन बहुत प्रिय था और वे अपनी तीव्र भूख के कारण महीने में दो बार आने वाली एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे। इस बात को लेकर वे चिंतित रहते थे कि उन्हें अन्य भाइयों की तरह व्रत का पुण्य कैसे मिलेगा।

भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास से अपनी समस्या बताई

एक दिन भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास से अपनी समस्या बताई। उन्होंने कहा कि वे भगवान विष्णु के भक्त हैं, लेकिन भूख सहन न कर पाने के कारण नियमित एकादशी व्रत नहीं कर सकते।भीम की बात सुनकर वेदव्यास जी ने उन्हें एक विशेष उपाय बताया। उन्होंने कहा कि यदि वे ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर एक बार कठोर व्रत कर लें, तो उन्हें वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त हो सकता है।

भीमसेन ने ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के दिन व्रत रखा

ऋषि ने समझाया कि इस एकादशी में अन्न ही नहीं, बल्कि जल का भी त्याग करना होगा। सूर्योदय से लेकर अगले दिन पारण तक बिना पानी ग्रहण किए भगवान विष्णु का स्मरण करना होगा। इसी कारण इस व्रत को निर्जला एकादशी कहा गया। वेदव्यास के निर्देशानुसार भीमसेन ने ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के दिन संकल्प लेकर निर्जला व्रत शुरू किया। उन्होंने पूरे दिन भगवान विष्णु का ध्यान किया और किसी भी प्रकार का अन्न या जल ग्रहण नहीं किया।

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं

व्रत के दौरान भीमसेन को अत्यधिक प्यास और भूख लगी, लेकिन उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति से व्रत का पालन किया। उनकी तपस्या और श्रद्धा से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण करने के बाद भीमसेन को सभी एकादशी व्रतों के बराबर पुण्य प्राप्त हुआ। तभी से इस व्रत को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाने लगा।

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2026 में निर्जला एकादशी की तिथि कब है?
2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा, जबकि एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून की शाम से होता है।
निर्जला एकादशी में पूजा के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त क्या है?
25 जून 2026 को पूजा का उत्तम मुहूर्त सुबह 10 बजकर 39 मिनट से दोपहर 2 बजकर 9 मिनट तक माना गया है।
निर्जला एकादशी का व्रत पारण किस समय किया जा सकता है?
25 जून को उपवास रखने पर 26 जून 2026 की सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट के बीच पारण किया जा सकता है।
निर्जला एकादशी व्रत में पानी और अन्न के नियम क्या हैं?
इस व्रत में अन्न और जल दोनों का ग्रहण वर्जित है। व्रत एकादशी के सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक चलता है, और पूजा के समय केवल आचमन हेतु तीन बूंद जल की अनुमति है।
निर्जला एकादशी पर दान-पुण्य का क्या महत्व बताया गया है?
इस दिन कठिन उपवास के साथ दान का भी शास्त्रों में विशेष महत्व है, खासकर मीठे और ठंडे जल की व्यवस्था, प्याऊ लगवाना और जल सेवा करना। साथ ही मिट्टी के नए घड़े में जल भरकर जरूरतमंद या ब्राह्मण को खरबूजा, पंखा, नए वस्त्र और दक्षिणा के साथ आदरपूर्वक दान करने की बात कही गई है।
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