Passport Update: पासपोर्ट नागरिकता का सबूत है? विदेश मंत्रालय ने दिया बड़ा जवाब, ई-पासपोर्ट पर भी अहम अपडेट

Passport Travel Document MEA: भारत में पासपोर्ट से जुड़ी सेवाएं तेजी से बदल रही हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने हाल ही में पासपोर्ट, विदेश यात्रा और भारतीय नागरिकों की वैश्विक आवाजाही को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट किसी व्यक्ति की नागरिकता का प्रमाण नहीं, बल्कि एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, जिसका उपयोग विदेश यात्रा और पहचान सत्यापन के लिए किया जाता है।

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इसके साथ ही सरकार ने देशभर में चिप-युक्त ई-पासपोर्ट (e-Passport) लागू करने, पासपोर्ट सेवा केंद्रों के विस्तार और विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए नई सुविधाओं की जानकारी भी दी।

India e-passport: देशभर में शुरू हुआ ई-पासपोर्ट का दौर, अब सभी नए पासपोर्ट 'चिप' वाले

विदेश मंत्रालय ने बताया कि पिछले साल मई से देश में एक बड़ा बदलाव लागू किया जा चुका है। अब भारत में जितने भी नए पासपोर्ट जारी किए जा रहे हैं, वे सभी चिप-सहित ई-पासपोर्ट (Chip-enabled e-passports) हैं। इन पासपोर्ट्स में एक सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक चिप लगी होती है, जिसमें यूजर की बायोमेट्रिक जानकारी दर्ज होती है।

यह तकनीक इंटरनेशनल सिविल एविशन ऑर्गेनाइजेशन (ICAO) के वैश्विक सुरक्षा मानकों के बिल्कुल अनुरूप है। इससे पासपोर्ट के साथ होने वाली धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा रुकेगा और विदेशी एयरपोर्ट्स पर भारतीय यात्रियों की चेकिंग बेहद आसान और तेज हो जाएगी।

10 साल में छह गुना बढ़ा पासपोर्ट नेटवर्क

सरकार ने बताया कि पिछले एक दशक में देश का पासपोर्ट सेवा नेटवर्क तेजी से बढ़ा है। जहां पहले सीमित संख्या में पासपोर्ट केंद्र हुआ करते थे, वहीं अब देशभर में 545 पासपोर्ट सेवा केंद्र संचालित हो रहे हैं। सरकार इस साल 20 नए पासपोर्ट सेवा केंद्र खोलने की तैयारी कर रही है। लक्ष्य यह है कि वर्ष 2027 तक देश की हर लोकसभा सीट के क्षेत्र में कम से कम एक पासपोर्ट सुविधा केंद्र उपलब्ध हो। अधिकारियों के मुताबिक अब केवल लगभग 30 जिलों में ही समर्पित पासपोर्ट केंद्र नहीं हैं। इन क्षेत्रों में भी सेवाएं पहुंचाने के लिए मोबाइल पासपोर्ट टीमें भेजी जा रही हैं।

दूरदराज के लोगों तक पहुंच रही सुविधा

विदेश मंत्रालय ने बताया कि पिछले साल विशेष शिविरों और आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 3 लाख लोगों को पासपोर्ट जारी किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य उन लोगों तक सेवाएं पहुंचाना था जो दूरस्थ या पिछड़े क्षेत्रों में रहते हैं। सरकार का कहना है कि अब कोशिश यह है कि पासपोर्ट बनवाने के लिए लोगों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े और सेवाएं उनके नजदीक उपलब्ध हों।

अभी भी केवल 10 प्रतिशत भारतीयों के पास पासपोर्ट

हालांकि पासपोर्ट सेवाओं का विस्तार हुआ है, लेकिन भारत की विशाल आबादी को देखते हुए अभी भी पासपोर्ट धारकों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में देश की कुल आबादी में केवल करीब 10 प्रतिशत लोगों के पास पासपोर्ट है। विदेश मंत्रालय का मानना है कि शिक्षा, रोजगार, व्यापार और पर्यटन के बढ़ते अवसरों को देखते हुए आने वाले वर्षों में पासपोर्ट की मांग और बढ़ेगी।

भारतीयों के लिए आसान हो रही विदेश यात्रा

विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने दुनिया के कई देशों के साथ मोबिलिटी एग्रीमेंट किए हैं, जिससे छात्रों, शोधकर्ताओं, प्रशिक्षुओं, पेशेवरों और कारोबारियों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही आसान हो रही है। भारत अब तक 25 देशों के साथ 27 मोबिलिटी समझौते कर चुका है। इनमें यूरोपीय संघ (EU), ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कई खाड़ी देश शामिल हैं। इन समझौतों का उद्देश्य योग्य भारतीय युवाओं और पेशेवरों के लिए विदेशों में अवसर बढ़ाना है।

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भारतीय पासपोर्ट की बढ़ रही ताकत

सरकार के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब पहले की तुलना में अधिक देशों में यात्रा संबंधी सुविधाएं मिल रही हैं। वर्तमान में 27 देश भारतीय नागरिकों को वीजा-फ्री एंट्री देते हैं। 47 देशों में वीजा ऑन अराइवल की सुविधा उपलब्ध है। 66 देशों में ई-वीजा की सुविधा मिलती है। इससे भारतीय यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक हुई है।

विदेश जाने वाले भारतीय मजदूरों और महिलाओं के लिए बड़े कदम

रोजगार के लिए विदेश जाने वाले भारतीय कामगारों की सुरक्षा और मदद के लिए भी सरकार ने कई अहम बदलाव किए हैं:

eMigrate 2.0 पोर्टल: अक्टूबर 2022 से शुरू हुए इस अपग्रेडेड पोर्टल के जरिए अब तक लगभग 7 लाख भारतीय मजदूरों को विदेश जाने की मंजूरी (Emigration Clearance) मिल चुकी है। 17 पासपोर्ट दफ्तरों में रैंडम कंप्यूटर प्रोसेसिंग सिस्टम लागू होने से अब काम में देरी और भ्रष्टाचार खत्म हो गया है।

संस्कृति की ट्रेनिंग: विदेश रवाना होने से पहले मजदूरों को उस देश की संस्कृति, भाषा और काम से जुड़े नियमों की ट्रेनिंग (Pre-departure Orientation) दी जा रही है।

विदेशी नियोक्ताओं से सीधा संपर्क: अगले हफ्ते भारत एक बड़े 'ह्यूमन रिसोर्स मोबिलिटी फोरम' की मेजबानी करने जा रहा है। इसमें जर्मनी, इटली, जापान, रूस और डेनमार्क जैसे देश शामिल होंगे, ताकि भारतीय युवाओं को विदेशों में सुरक्षित और अच्छे रोजगार मिल सकें।

मुसीबत में फंसी महिलाओं को मदद: खाड़ी देशों (Gulf Countries) और सिंगापुर में मुसीबत या संकट में फंसी भारतीय महिलाओं के लिए 'वन-स्टॉप सपोर्ट सेंटर' खोले गए हैं। यहाँ उन्हें कानूनी मदद और मानसिक काउंसलिंग दी जाती है। इसका पूरा खर्च 'भारतीय समुदाय कल्याण कोष' (ICWF) उठाता है।

क्या है सरकार का लक्ष्य?

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य पासपोर्ट को केवल कुछ लोगों तक सीमित सुविधा न रखकर, इसे करोड़ों भारतीयों के लिए सुलभ बनाना है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विदेश यात्रा, शिक्षा, रोजगार और प्रवासन की प्रक्रिया सुरक्षित, व्यवस्थित और पारदर्शी बनी रहे। मंत्रालय का मानना है कि आने वाले वर्षों में ई-पासपोर्ट, नए पासपोर्ट केंद्र और वैश्विक मोबिलिटी समझौते भारतीय नागरिकों के लिए दुनिया के नए अवसरों के दरवाजे खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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