पंजाब में BSF का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने पर CM चन्नी ने जताई आपत्ति, फैसला वापस लेने की मांग
पंजाब में BSF का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने पर CM चन्नी ने जताई आपत्ति, अमित शाह से फैसला वापस लेने की मांग की
चंडीगढ़, 14 अक्टूबर: पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक के बाद एक सियासी विवाद जारी है। पंजाब में अब सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्रा बढ़ाने पर विवाद हो रहा है। बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तीन राज्य पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में सीमा सुरक्षा बल का क्षेत्राधिकार बढ़ाया है। राज्य में बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीट से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। अपने अधिकार क्षेत्र में, बीएसएफ अधिकारियों को पुलिस में अपने समकक्षों के समान गिरफ्तारी, तलाशी और जब्ती का अधिकार है। पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बुधवार को ट्विटर पर सीमा सुरक्षा बल के अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के केंद्र के फैसले की निंदा की है।
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पंजाब के सीएम चन्नी ने केंद्र सरकार के कदम को "संघवाद पर सीधा हमला" बताया है। सीएम चन्नी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस फैसले को वापस लेने का अनुरोध किया है।
पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने ट्वीट किया, ''मैं भारत सरकार के एकतरफा फैसले की कड़ी निंदा करता हूं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे 50 किलोमीटर के दायरे में बीएसएफ को अतिरिक्त शक्तियां देने का फैसला किया गया है, जो कि संघवाद पर सीधा हमला है। मैं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस तर्कहीन निर्णय को तुरंत वापस लेने का आग्रह करता हूं।''
I strongly condemn the GoI's unilateral decision to give additional powers to BSF within 50 KM belt running along the international borders, which is a direct attack on the federalism. I urge the Union Home Minister @AmitShah to immediately rollback this irrational decision.
— Charanjit S Channi (@CHARANJITCHANNI) October 13, 2021
इस पूरे मामले पर पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, राज्य सरकार और संघवाद की भावना को कमजोर करने के अलावा, भारत सरकार द्वारा मौजूदा व्यवस्थाओं को एकतरफा रूप से बदलने के लिए कोई उचित कारण नहीं है।
सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, राज्य सरकारों से सलाह और बिना बात किए या उनकी सहमति प्राप्त किए बिना बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) के अधिकारियों को पुलिस अधिकारियों की शक्तियां प्रदान करके, केंद्र संविधान के संघीय ढांचे को विकृत करने का प्रयास कर रहा है।












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