पंजाब: कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लगाए एक तीर से कई निशाने, जानिए क्या है कैप्टन का दांव

कांग्रेस अदरूनी कलह की वजह से पंजाब में कमज़ोर होते जा रही है इसलिए अमरिंदर सिंह विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को एकजुट कर हर वर्ग के वोट बैंक को साधने की कोशिश में हैं। प्रकाश पर्व सिख समुदाय का सबसे बड़ा पर्व है

चंडीगढ़, अगस्त 27, 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र कांग्रेस पार्टी वोट बैंक साधने में ज़रा सा भी चूक करना नहीं चाह रही है। अब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिख समुदाय के वोट बैंक को साधने के लिए श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व को समर्पित एक दिवसीय विधानसभा का विशेष सत्र की बैठक बुलाई है।

captain amrinder

सिख समुदाय को लुभाने की कोशिश
कांग्रेस अदरूनी कलह की वजह से पंजाब में कमज़ोर होते जा रही है इसलिए कैप्टन अमरिंदर सिंह विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को एकजुट कर हर वर्ग के वोट बैंक को साधने की कोशिश में हैं। प्रकाश पर्व सिख समुदाय का सबसे बड़ा पर्व है और इस दौरान विशेष सत्र में बुलाकर वह सिख समुदाय के वोट बैंक को अपने खाते में डालने की कोशिश में हैं। आपको बता दें कि सिख समुदाय के वोट बैंक को साधने के लिए केन्द्र सरकार ने भी पासा फेक दिया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि गुरु तेगबहादुर जी की शिक्षाओं को दुनिया तक ले जाना है। सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर के 400वें 'प्रकाशोत्सव' का अवसर एक राष्ट्रीय कर्तव्य है।

कैप्टन अमरिंदर का नया दांव
सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाज़ार गर्म है कि पंजाब कांग्रेस में अंदरूरी कलह की वजह कांग्रेस विधायक या मंत्री ही कहीं मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव न ले आएं। इसी डर की वजह से पंजाब सरकार ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व को समर्पित एक दिवसीय विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर एक तीर से कई निशाना लगाने की कोशिश की है। यह सत्र एक तरह से विधानसभा का मानसून सत्र होगा। तीन सितंबर को एक दिन के सत्र में पहले सिर्फ़ श्रद्धांजलियां दी जाएंगी और उसके बाद 11 बजे श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व मनाया जाएगा। विशेष सत्र में उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू, राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह शिरकत कर सकते हैं। इस बाबत सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ़ न्योता भेजा जाएगा।

विपक्ष के नेताओं ने कसा तंज़
आपको बता दें कि चार मंत्रियों ने मुख्यमंत्री बदलने की मुहिम छेड़ रखी है और इनमें से तीन मंत्री कैबिनेट बैठक में शामिल भी नहीं हुए। कैबिनेट बैठक में तृप्त राजिंदर बाजवा के तो एजेंडे भी लगे हुए थे इसके बवाजूद उन्होंने कैबिनेट बैठक में शिरकत नहीं की। कैप्टन सरकार के विधिवत सत्र नहीं बुलाने पर विपक्ष के नेताओं ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर तंज़ कसते हुए कहा कि कांग्रेस के विधायक और मंत्री ही उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं इसलिए उन्होंने विधिवत सत्र नहीं बुलाया। यह लोकतंत्र की हत्या है। कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू ने तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, बिजली प्लांटों के साथ हुए समझौतों को रद करने संबंधी प्रस्ताव लाने की बात भी कही हुई है। क्योंकि इन दिनों मंत्रियों ने कैप्टन के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया हुआ है इसलिए इन दोनों मुद्दों पर सहमति नहीं बनी।

कृषि कानून राज्य सरकार नहीं कर सकती रद्द
वहीं राजनीतिक सलाहकारों का कहना है कृषि कानूनों को रद्द करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं । धारा 254 के तहत राज्य सरकार के पास सिर्फ़ संशोधन का अधिकार था और संशोधन किया जा चुका है। वहीं बिजली खरीद समझौते रद करने के बाद बिजली प्लांटों को खरीदने की नौबत आ जाएगी जिसके लिए 25 हजार करोड़ रुपए की ज़रूरत होगी। सरकार पहले से ही क़र्ज़ के बोझ तले दबी हुई है इसलिए बिजली समझौता रद्द होना मुमकिन नहीं लग रहा है।

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