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पंजाब में चुनाव से पहले कांग्रेस को फिर झटका, इस नेता ने छोड़ा कांग्रेस का दामन

पंजाब विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज़ हो चुकी हैं, सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस पुर ज़ोर मेहनत कर रही है।

चंडीगढ़, 31 दिसंबर 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज़ हो चुकी हैं, सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस पुर ज़ोर मेहनत कर रही है। वहीं दूसरी ओर चुनाव ठीक पहले पंजाब कांग्रेस को झटके पर झटका मिल रहा है। पंजाब कांग्रेस में घमासान थमने का नाम नही लेरहा रहा है। पंजाब कांग्रेस के मौजूदा विधायकों के इस्तीफ़ा देने के बाद वरिष्ट कांग्रेस नेता सुखविंदर राज सिंह लाली ने पंजाब स्टेट ग्रेन्स प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष और निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया है। गौरतलब है कि सुखविंदर राज सिंह लाली ने निजी कारण का हवाला देते हुए पद से इस्तीफ़ा दिया। हालांकि अभी उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है। सूत्रों की मानें तो लगातार 5 साल से उपेक्षित रखे जाने से वह पंजाब कांग्रेस से नाराज चल रहे थे।

Sukhvinder Raj Singh Lali


स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए दिया इस्तीफ़ा
पंजाब स्टेट ग्रेन्स प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष और निदेशक पद से इस्तीफा देने के वक्त सुखविंदर राज सिंह लाली ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए कहा कि वह इस जिम्मेदारी से मुक्त हो रहे हैं। आपको बता दें कि सुखविंदर राज सिंह लाली हलका मजीठा से वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हैं। इस हलके से वह तीन बार चुनाव भी लड़ चुके हैं। पंजाब के सियासी गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि नवजोत सिंह सिद्धू के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से कांग्रेस नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला जारी है। पिछले एक हफ्ते में मौजूदा तीन कांग्रेसी विधायकों ने भी पार्टी छोड़ते हुए भारतयी जनता पार्टी की सदस्यता ले ली। गौरतलब है की तीनों विधायक अमरिंदर सिंह के क़रीबी माने जाते थे इसके बाद भी वह कैप्टन की पार्टी में शामिल नहीं हुए और भाजपा में चवे गए।

मजीठा इलाके में लाली की अच्छी पकड़
2007 के पंजाब विधानसभा चुनाव में सुखविंदर राज सिंह लाली मजीठा हलका से कांग्रेस की टिकट पर चुनावी रण में उतरे थे लड़ा। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इस बात से नाराज होकर हो कर उन्होंने चुनावी रण में निर्दलीय ताल ठोक दी थी। निर्दलीय ताल ठोकने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी से ज्यादा वोट हासिल किया था। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में दोबारा से वह कांग्रेस की टिकट पर चुनावी रण मे बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ उतरे थे। कैप्टन सरकार में साढे़ चार साल तक सुखविंदर सिंह लाली को कोई पद नहीं दिया गया, सरकार के कार्यकाल कुछ महीने चेयरमैन का पद दिया गया जिस बात से वह नाराज़ चल रहे थे। कयाल लगाए जा रहे हैं सुखविंदर राज सिंह लाली किसी दूसरे दल का दामन थाम सकते हैं।

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