पंजाब सरकार को बड़ा झटका, NGT ने लगाया 2000 करोड़ रुपये का हर्जाना, जानें क्यों?
चंडीगढ़। पंजाब सरकार को आज एक तगड़ा झटका लगा। दरअसल, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सरकार पर 2000 करोड़ रुपये से अधिक का हर्जाना लगा दिया है। यह हर्जाना पर्यावरणीय मुआवजा के तौर पर लगाया गया। पहले से आर्थिक संकट से गुजर रही पंजाब सरकार की मुश्किलें इससे काफी बढ़ गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पंजाब सरकार पर इतना भारी-भरकम हर्जाना ठोस और तरल कचड़े को सही तरीके से ठिकाने नहीं लगाने व उनका समुचित प्रबंधन नहीं करने के कारण लगाया गया है।

पंजाब सरकार को बड़ा झटका
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की ओर से कहा गया कि, पंजाब सरकार पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले ठोस और तरल कचरे के उचित उपचार को सुनिश्चित करने में पूरी तरह से विफल रही है। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान हुआ है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का कहना है कि, पर्यावरण को लगातार हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए एनजीटी अधिनियम की धारा 15 के तहत मुआवजे वसूल करना आवश्यक हो गया है। पंजाब में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मानदंडों व प्रबंधों की निगरानी करने की जरूरत है।'

'सरकार ने दायित्व नहीं निभाया'
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कहा है कि, इसके साथ ही हालात को सुधारने के लिए आवश्यक दायित्व तय किए बिना केवल आदेश पारित करने से पिछले आठ वर्षों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पांच वर्षों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन की निर्धारित अवधि की समाप्ति के बाद भी कोई ठोस परिणाम नहीं दिखा है।

180 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के अनुसार, लगातार हो रहे नुकसान को रोका जाना चाहिए और पहले हुए नुकसान को सही किया जाना चाहिए। बता दें कि, हर्जाने के बारे में जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली ट्रिब्यूनल ने 22 सितंबर को आदेश पारित किया था। आदेश में वैज्ञानिक रूप से ठोस कचरे के प्रबंधन में विफलता के लिए 180 करोड़ रुपये का हर्जाना लगाया गया है। वहीं, एक अधिकारी ने कहा कि, सरकार पर कुल मुआवजे की राशि 2180 करोड़ रुपये बनते हैं और उसमें 180 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है।'












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