Navjot Singh Sidhu: 48 दिन पहले कैसे रिहा हो गए नवजोत सिंह सिद्धू ?

सिद्दू मे जेल से बाहर आते ही दिखाए तीखे तेवर, उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं बची है। अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है।

 Navjot Singh Sidhu

Navjot Singh Sidhu: रोडरेज के एक मामले में पटियाला जेल में बंद कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू आज जेल से रिहा हो गए हैं। वैसे कानूनी तौर पर उनकी रिहाई 18 मई को होने वाली थी लेकिन उनके अच्छे व्यवहार और चाल-चलन के चलते उन्हें 48 दिन पहले रिहा किया गया है। उनके जेल से बाहर आने की जानकारी उनके ट्वीटर अकाउंट पर दी गई थी। सिद्धू के जेल से बाहर आने पर उनके समर्थक खुशी से झूम रहे हैं और ढोल-नगाड़े भी बजा रहे हैं तो वहीं सिद्धू के परिवार वालों के लिए भी ये एक बड़ी राहत है क्योंकि उनकी पत्नी नवजोत कौर की हाल ही में सर्जरी हुई है, उन्हें सेंकड स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर था।

34 साल पुराने एक केस में हुई थी सजा

आपको बता दें कि सिद्धू को 34 साल पुराने एक केस में एक साल की सजा हुई थी। जिसके बाद उन्होंने पटियाला कोर्ट में सरेंडर किया था, जिसके बाद से वो 20 मई 2022 से जेल में बंद थे, ऐसे में सवाल ये उठता है कि सजा जब एक साल की थी तो वो एक साल के पहले कैसे रिहा हो गए। चलिए इसके बारे में जानते हैं विस्तार से।

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Prison Rules को जानिए ?

दरअसल कैदियों के लिए Prison Rules होते हैं, जिसके तहत अगर कोई कैदी अच्छा बर्ताव करता है तो जेल प्रशासन उनकी सजा में से 5 से 7 दिन कम कर देता है। यही नहीं कैदियों को भी साप्ताहिक छुट्टी के साथ-साथ सरकारी छुट्टियां भी मिलती हैं और कैदी पैरोल पर भी बाहर आते हैं। लेकिन सिद्धू ने जेल जाने के बाद ना तो कोई वीकली ऑफ लिया और ना ही उन्होंने सरकारी छुट्टी पर आराम किया और ना ही वो पैरोल पर बाहर आए, बल्कि उन्होंने जेल की ओर से कराए जा रहे सारे कामों को वक्त पर पूरा किया। जब कोई कैदी ऑफ नहीं लेता है तो वो दिन उसकी सजा से काट दिए जाते हैं इसलिए सिद्दू की सजा में से दिन कम हो गए और उनकी 48 दिन पहले ही रिहाई हो गई।

क्या है रोडरेज मामला?

आपको बता दें कि 27 दिसंबर, 1988 सिद्धू अपने मित्र रुपिंदर सिंह संधू के साथ पटियाला के शेरावाले मार्केट में घूम रहे थे। उस वक्त नवजोत सिंह क्रिकेट जगत का लोकप्रिय चेहरा थे। पटियाला की मार्केट में उन्हें देखने के लिए काफी भीड़ जमा हो गई थी और इसी बीच कार की पार्किंग को लेकर सिद्धू और उनके मित्र रुपिंदर सिंह का झगड़ा 65 साल के गुरनाम सिंह से हो गया, जिसमें विवाद बढ़ा और मामला मारपीट तक पहुंच गया और तभी सिद्धू ने अपने घुटने से गुरनाम सिंह को कसकर किक मारी थी, जिसके बाद गुरुनाम सिंह को काफी गंभीर चोट आई, उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां कुछ दिनों बाद उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई इसके बाद सिद्धू पर हत्या का केस दर्ज हुआ था।

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48 दिन पहले हो रही है रिहाई

लेकिन 22 सितंबर, 1999 को ट्रायल कोर्ट ने सिद्धू और रुपिंदर को इस केस में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था लेकिन इसके बाद साल 2002 में यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा लेकिन साल 2006 में दोनों को हाईकोर्ट ने गैर इरादन हत्या का दोषी माना और तीन साल की सजा और एक लाख का जुर्माना लगा दिया लेकिन इसके बाद ये मामला साल 2007 में सुप्रीम कोर्ट चला गया था, जहां 20 मई 2022 को सिद्धू को दोषी माना गया और उन्हें एक साल की सजा सुनाई थी। जिसे काटने के बाद आज वो रिहा हो गए हैं।

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