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पंजाब: केन्द्र सरकार के ख़िलाफ़ एकता के लिए बुलाई गई बैठक के बाद पक्ष-विपक्ष में पड़ी फूंट, ये है वजह

जहां एक तरफ़ बीएस एफ का दायरा बढ़ाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक साथ खड़े नज़र आए। वहीं बैठक के बाद क्रेडिट लेने की होड़ मच गई।

चंडीगढ़, अक्टूबर 27, 2021: पंजाब में बीएसएफ़ का दायरा बढ़ाने को लेकर मुख्यमंत्री चन्नी ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। जिसमें भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर सभी सियासी दलों ने शिरकत की थी। जहां एक तरफ़ बीएस एफ का दायरा बढ़ाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक साथ खड़े नज़र आए। वहीं बैठक के बाद क्रेडिट लेने की होड़ मच गई। नवजोत सिंह सिद्धू ने बैठक की एक छोटी सी क्लिप सोशल मीडिया पर शेयर की जिसके बाद ही इस मामले में सियासत गरमा गई। शिरोमणि अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा ने सर्वदलीय बैठक में पीपीसीसी अध्यक्ष के वीडियो क्लिपिंग के चुनिंदा लीक पर कड़ी आपत्ति जताई और पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से बैठक का पूरा वीडियो मीडिया को जारी करने का आग्रह किया। ताकि पंजाब के लोग बीएसएफ अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर सभी दलों द्वारा व्यक्त विचारों को जान सकें।

सियासी पार्टियों ने की शिरकत

सियासी पार्टियों ने की शिरकत

पंजाब में बीएसएफ का दायरा बढ़ाने को लेकर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की सर्वदलीय बैठक में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल, लोक इंसाफ पार्टी और शिरोमणि अकाली दल (यूनाइटेड) के कई नेताओं ने शिरकत की। आपको बता दें कि बीएसएफ का दायरा बढ़ाने को लेकर पंजाब में भारतीय जनता पार्टी को छोड़ कर सभी सियासी दल केंद्र सरकार के फ़ैसले के खिलाफ़ है। पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार के इस फैसले को राज्यों के अधिकार में अतिक्रमण बताते हुए कहा कि यह फैसला एकतरफा और अलोकतांत्रिक है। आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों के मद्दे नजर भी इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।

केंद्र के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सियासी दल

केंद्र के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सियासी दल

केंद्र सरकार की विरोधी पार्टियां इस फैसले को पंजाबियों के हित के खिलाफ साबित करने में लगी हुई हैं। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में पारित प्रस्ताव में विभिन्न पक्षों और दलों के साथ मिलकर सरकार को इस अधिसूचना को वापस लेने के लिए विवश करने की बात कही गई है। ग़ौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल के सबसे वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि यह किसी सियासी पार्टी की प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है। शिअद उस पार्टी के का साथ चलने के लिए तैयार है जो केंद्र सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और श्री आनंदपुर साहिब से सांसद मनीष तिवारी ने भी प्रकाश सिंह बादल के इस बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल के सुझाव में दम है। केंद्र सरकार के इस फ़ैसले पर एकतरफ़ा विचारों से ऊपर उठकर एक साथ मिलकर लड़ाई लड़नी चाहिए।

आपस में लड़ना बंद करें

आपस में लड़ना बंद करें

बीएसएफ का दायरा बढ़ाने के मुद्दे के बहाने प्रकाश सिह बादल ने विपक्षी दलों की एकता की पहल को भी दावत दी है। एक वक़्त था कि प्रकाश सिंह बादल कांग्रेस को अपनी सबसे बड़ी दुश्मन पार्टी की संज्ञा देते थे, लेकिन अब वो कांग्रेस से हाथ मिलाने को भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मैं सभी सियासी दलों से कहना चाहता हूं कि केन्द्र के इस फ़ैसले पर आपस में लड़ना बंद करें और केंद्र ख़िलाफ़ साथ मिलकर लड़ें।


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