पंजाब में कांग्रेस के 2 और बीजेपी के 1 नेता ने थामा आम आदमी पार्टी का दामन, जानिए तीनों नेताओं के बारे में
चंडीगढ़, अप्रैल 14। पंजाब में आम आदमी पार्टी 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लगी हुई है। पंजाब में छोटे से लेकर बड़े स्तर तक के नेता चुनाव की तैयारियों में लगे हुए हैं, जिसकी वजह से राज्य के अंदर पार्टी की लोकप्रियता में इजाफा हो रहा है। इसी वजह से दूसरी पार्टियों के ने AAP को जॉइन करने में लगे हैं। मंगलवार को कांग्रेस के प्रदेश महासचिव, सचिव और बीजेपी के इंडस्ट्री विंग के अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी जॉइन कर ली।

इन नेताओं ने थामा आम आदमी पार्टी का दामन
AAP जॉइन करने वाले चेहरों में भाजपा नेता अख्तियार सिंह सदिओरा और कांग्रेस नेता राजीव भगत एवं गुरशरण सिंह का नाम शामिल है। इन नेताओं ने अपने कई सहयोगियों के साथ पार्टी जॉइन की। पार्टी मुख्यालय में आप के पंजाब प्रभारी जरनैल सिंह और पार्टी के प्रदेश महासचिव हरचंद सिंह बरसट की उपस्थिति में ये नेता पार्टी में शामिल हुए। पार्टी के अन्य कई पदाधिकारी और विभिन्न जिलों के नेता भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
कौन हैं अख्तियार सिंह?
आपको बता दें कि पंजाब के मोगा जिले के रहने वाले अख्तियार सिंह सदिओरा बीजेपी पंजाब के भारी उद्दोग सेल के अध्यक्ष रहे हैं। सामाजिक कार्यों के अलावा वे माधो एग्रो इंडस्ट्री भी चलाते हैं। सदियोरा सक्रिय रूप से, चल रहे किसान आंदोलन में भाग ले रहे हैं, जहां संघर्षरत किसान दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र के काले खेत कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।
कांग्रेस के राजीव भगत
वहीं अमृतसर के अधिवक्ता राजीव भगत पंजाब प्रदेश कांग्रेस समिति (पीपीसीसी) के महासचिव रहे हैं। वे श्री बी.डी. भगत मेमोरियल सोसाइटी के महासचिव भी हैं और भारतीय मजदूर व्यापार संघ के अध्यक्ष हैं। राजीव भगत, भगत कबीर प्रचार समिति के अध्यक्ष और पीपीसीसी के प्रतिनिधि सदस्य भी रहे हैं। वह 2014 से 2016 तक जिला कांग्रेस कमेटी, अमृतसर के अध्यक्ष भी रहे हैं और 2003 से 2007 तक अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के सदस्य एवं 1998 से 2008 तक पंजाब यूथ कांग्रेस के महासचिव रहे हैं।
अन्य कांग्रेस नेता गुरशरण सिंह
एक अन्य कांग्रेस नेता अमृतसर से गुरशरण सिंह, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव और औद्योगिक बोर्ड के पूर्व सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने उन 17 पंजाबियों को रिहा कराने में बड़ी भूमिका निभाई थी, जिन्हें 2011 में पाकिस्तान के मिसरी खान के मामले में शारजाह में मौत की सजा दी गई थी। उन्होंने 2013 में अमृतसर में कैप्टन अमरिंदर सिंह के एमपी चुनावों में सोशल मीडिया प्रभारी के रूप में भी काम किया है। वे कई एनजीओ और सामाजिक संगठनों से जुड़े हैं।












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