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पंजाब: 55 सालों से मालवा क्षेत्र से ही बनते आ रहे हैं मुख्यमंत्री, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह ?

पंजाब की सियासत में मालवा क्षेत्र का दबदबा हमेशा से रहा है। चाहे वह विधानसभा सीटों के मामले में हो या फिर मुख्यमंत्री देने वाले क्षेत्र की बात हो।

चंडीगढ़, 20 जनवरी 2022। पंजाब की सियासत में मालवा क्षेत्र का दबदबा हमेशा से रहा है। चाहे वह विधानसभा सीटों के मामले में हो या फिर मुख्यमंत्री देने वाले क्षेत्र की बात हो। ग़ौरतलब है कि 55 सालों से पंजाब के मुख्यमंत्री इसी क्षेत्र से ताल्लुक रखते आ रहे हैं। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा विधानसभा की 69 सीटें हैं। पंजाब के चुनावी रण में उतर चुकी सियासी पार्टियों के मुख्यमंत्री पद के सभी प्रमुख दावेदारों का मालवा से ही ताल्लुक रहा है। हरियाणा से 1966 में पंजाब अलग हुआ था उसके बाद से पंजाब में अब तक 18 मुख्यमंत्री बन चुके है। उनमें से 17 मुख्यमंत्रियों का नाता मालवा क्षेत्र से रहा है। 18 मुख्यमंत्रियों में से सिर्फ़ एक पूर्व मुख्यमंत्री गुरमुख सिंह मुसाफिर का ताल्लुक माझा क्षेत्र से था। ग़ौरतलब है 1966 से लेकर 2021 तक के दौरान कि पंजाब में पांच बार राष्ट्रपति शासन भी लग चुका है ।

मालवा इलाके से कई कद्दावर नेताओं का ताल्लुक

मालवा इलाके से कई कद्दावर नेताओं का ताल्लुक

पंजाब की सियासत और सियासी पार्टी के कई कद्दावर नेता मालवा इलाके से ही ताल्लुक रखते हैं। इससे बात से यह क़यास लगाए जा रहे हैं कि पंजाब में किसी भी पार्टी की सरकार आए मुख्यमंत्री कुर्सी पर मालवा इलाके का ही क़ब्ज़ा रहेगा। पंजाब कांग्रेस की बात की जाए तो मुख्यमंत्री पद के लिए तीन चेहरे दावेदार माने जा रहे हैं। जिनमें चरणजीत सिंह चन्नी, नवजोत सिद्धू और सुनील जाखड़ का नाम शामिल है। ग़ौरतलब है कि इन तीनों नेताओं का ताल्लुक मालवा से ही है। अब अगर शिरोमणि अकाली दल की बात जाए तो शिअद में सीएम पद के प्रबल दावेदार के तौर सुखबीर सिंह बादल ही देखे जा रहे हैं, उनका भी ताल्लुक मालवा से ही है। वहीं आम आदमी पार्टी की बात करें तो भगवंत मान सीएम उम्मीदवार है, वह जहां से सांसद हैं, वह मालवा इलाके में ही आता है।

मालवा इलाके में है सबसे ज़्यादा सीटें

मालवा इलाके में है सबसे ज़्यादा सीटें

पंजाब में कुल 117 विधानसभा 17 सीटें हैं, जिनमें 69 विधानसभा सीटें मालवा इलाके में है, वहीं दूसरे नबंर पर माझा क्षेत्र है जहां 25 विधानसभा सीटें हैं। वहीं तीसरे नंबर पर दोआबा क्षेत्र है, यहां 23 विधानसभा सीटें हैं। यही वजह है कि पंजाब में सियासी एतबार से मालवा इलाके का दबदबा ज़्यादा है और सभी सियासी पार्टी मालवा इलाके पर सियासी पकड़ मज़बूत करना चाहिती है। पंजाब में इस बार किसान आंदोलन, बेअदबी मामले में न्याय नहीं मिलना, बेरोजगारी, अवैध खनन और नशे का मुद्दा मुख्य चुनावी एजेंडा जिसे लेकर सभी सियासी पार्टियां चुनावी दांव खेल रही हैं।

55 सालों से मालवा क्षेत्र से ही बनते आ रहे हैं CM

55 सालों से मालवा क्षेत्र से ही बनते आ रहे हैं CM

55 सालों से मालवा इलाके से जो मुख्यमंत्री बनते आए हैं उनके नामी कू सूची कुछ इस प्रकार है। 1967 में किला रयपुर से गुरनाम सिंह, 1967 में ही धर्मकोट से लक्ष्मण सिंह गिल, 1969 में किला रायपुर से फिर गुरनाम सिंह, 1970 में गिद्दड़बाहा से प्रकाश सिंह बादल, 1972 में श्री आनंदपुर साहिब से ज्ञानी जैल सिंह, 1977 में फिर से गिद्दबाहा से प्रकाश सिंह बादल, 1980 में नकोदर से दरबारा सिंह, 1985 में बरनाला से सुरजीत सिंह, 1992 में बेअंत सिंह जालंधर कैंट से जीते (लुधियाना के पायल के रहने वाले थे), 1995 में श्री मुक्तसर साहिब से हरचरण सिंह बराड़, 1996 में लेहरा से रजिंदर कौर भट्ठल, 1997 में लांबी से प्रकाश सिंह बादल, 2002 में पटियाला से कैप्टन अमरिंदर सिंह, 2007 में लांबी से प्रकाश सिंह बादल, 2012 में लांबी से प्रकाश सिंह बादल, 2017 में पटियाला से कैप्टन अमरिंदर सिंह औऱ 2021 में चमकौर साहिब से चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री बने। इस तरह देखा जाए तो मालवा क्षेत्र से अभी तक 17 सीएम रह चुके हैं। यही वजह है कि पंजाब की सियासत में मालवा क्षेत्र का शुरू से ही दबदबा रहा है।


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