पंजाब कांग्रेस में कलह ख़त्म या फिर शुरू होगी कोई रणनीति, सिद्धू की सलाह से रावत ने किया किनारा
पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान के बीच कांग्रेस का अंतरकलह खत्म करने के लिए पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत मंगलवार को चंडीगढ़ पहुंचे और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से मुलाक़ात की
चंडीगढ़ सितंबर 1, 2021। पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान के बीच कांग्रेस का अंतरकलह खत्म करने के लिए पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत मंगलवार को चंडीगढ़ पहुंचे और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से मुलाक़ात की वहीं आज उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से भी मुलाक़ात की। बैठक में हरीश रावत ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ मंत्रियों की नाराज़गी दूर करने की बात कही और भी कई मुद्दे पर चर्चा हुई।

कई मुद्दों पर हुई चर्चा
पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने पार्टी के नेताओं को अपनी बात मीडिया के ज़रिए रखने की बजाए पार्टी के मंच पर रखने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि अगर मैं मीडिया में पार्टी के अंदरूनी मामलों पर बात नहीं करता हूं तो हमारे पंजाब कांग्रेस के सहयोगियों से भी ऐसा ही करने की उम्मीदद रखता हूं। उन्होंने बुधवार को सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ करीब पांच घंटे तक बैठक की। इस दौरान बेअदबी, ड्रग्स, ट्रांसपोर्ट, बिजली समझौते, कृषि कानून इत्यादि मुद्दों पर लंबी चर्चा की।
समझौता नहीं किया जा सकता रद्द
हरीश रावत ने नवजोत सिंह सिद्धू के निजी थर्मल प्लांटों के समझौते रद्द करने के उठाए जा रहे मुद्दे को लेकर साफ़ कर दिया कि ये समझौते रद्द नहीं किए जा सकते है, क्योंकि इसमें कई कानूनी पहलू है। नवजोत सिंह सिद्धू और कुछ मंत्रियों द्वारा सरकार के कामकाज को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर स्थिति को स्पष्ट करने के लिए मुख्यमंत्री ने डीजीपी दिनकर गुप्ता, एसटीएफ प्रमुख हरप्रीत सिद्धू और एडवोकेट जनरल अतुल नंदा की भी हरीश रावत के सामने पेशी करवाई। इन अधिकारियों ने पंजाब कांग्रेस प्रभारी को कानूनी और तकनीकि पहलुओं से अवगत करवाया।
बैठक में सिद्धू नहीं थे शामिल
ग़ौरतलब है कि जिस वक्त हरीश रावत की कैप्टन के साथ बैठक हो रही थी तब तक सिद्धू दिल्ली पहुंच चुके थे। हालांकि सिद्धू दिल्ली क्यों गए हैं यह बात अभी ज़ाहिर नहीं हुई है। आपको बता दें कि मंगलवार को पंजाब कांग्रेस प्रभारी पहरीश रावत ने पंजाब कांग्रेस के अध्यअक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और कार्यकारी प्रधानों के साथ मैराथन बैठक की थी। बैठक में सिद्धू आक्रामक तेवर में नजर आए और उन्होंरने कई मुद्दे उठाए। पंजाब कांग्रेस की कमान संभालने के करीब 50 दिन बाद ही सिद्धू ने धमकी दे दी थी कि अगर ड्रग्स, बिजली, किसानी जैसे मुद्दों का हल नहीं होता है तो उनके प्रधान बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। रावत इस दौरान सिद्धू के ईंट से ईंट बजाने वाले बयान से नाराज़ भी दिखाई दिए और उन्हें अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया।
सिद्धू ने कही मसला हल करने की बात
नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को हरीश रावत से कहा था कि बुधवार को सीएम के साथ बैठक में जो मुद्दे जैसे बिजली, ड्रग्स आदि को हल करवाएं। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस को पंजाब में दोबारा सरकार बनाने से कोई नहीं रोक सकता है। अगर यह मुद्दे हल नहीं हुए तो उनके पंजाब प्रदेश अध्यक्ष बने रहने का कोई मतलब नहीं है। बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस प्रधान की जिम्मेदारी संभालते समय भी कहा था कि कुर्सियां का उन्होंने कोई मोह नहीं किया। कुर्सियां तो उन्होंने दूर फेंकी है। वहीं हरीश रावत ने सिद्धू को नसीहत देते हुए कहा कि आपकी बयानबाज़ी की वजह से पूरे मुल्क में कांग्रेस की छवी ख़राब हो रही है। इसका फ़ायदा विपक्षी पार्टी को मिल रहा है।
कांग्रेस में गुटबाज़ी से किया इनकार
हरीश रावत ने कहा कि छोट मोटे विवाद हैं जिसकी वजह से मुझे यहां पर आना पड़ा। साथ उन्होंने कांग्रेस में गुटबाज़ी से इनकार किया और कहा कि उनका मकसद सभी पक्षों से मुलाकात कर उनकी बातों को सुनना है। उन्होंने ये भी कहा कि सिद्धू ने भरोसा दिलाया है कि अगले 15 दिनों में संगठन के मजबूत करते हुए को कार्य को गियरअप करेंगे। परगट सिंह द्वारा उन पर उठाए गए सवालों को लेकर प्रदेश प्रभारी ने कहा कि उनके अपने समझने की बात है। इसके अलावा कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। गौतलब है की हरीश रावत और सिद्धू के साथ हुई बैठक में सीएम के खिलाफ रहे चार मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया और चरणजीत सिंह चन्नी मौजूद नहीं थे। जबकि यह चारों ही मंत्री सिद्धू कैंप के माने जाते है।












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