पंजाब में सियासी ज़मीन मजबूत कर रही भारतीय जनता पार्टी, इस तरह बढ़ रहा है दायरा
पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पर्टियां जोड़ तोड़ की राजनीति शुरू कर चुकी हैं। हाल ही में शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली है।
चंडीगढ़, 4 दिसम्बर 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पर्टियां जोड़ तोड़ की राजनीति शुरू कर चुकी हैं। हाल ही में शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली है। मनजिंदर सिंह सिरसा के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने से पंजाब के सियासी समीकरण पर काफ़ी असर पड़ने वाला है। सूत्रों की मानें तो पंजाब की राजनीति के अलग-अलग सियासी दलों के कई दिग्गज नेता भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। शिरोमणि अकाली दल और सुखबीर बादल के लिए मनजिंदर सिंह सिरसा काफ़ी अहमियत रखते थे। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके और पूर्व महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा में तकरार के बाद दोनों मे से किसी एक को चुनना था तो सुखबीर सिंह बादल ने सिरसा को चुना था। इनके जाने शिरोमणि अकाली दल को सिरसा के जाने बहुत बड़ा झटका लगा है।

सिसासी पकड़ मज़बूत कर रही BJP
भारतीय जनता पार्टी से तीन कृषि कानून बिलों को लेकर जिन नेताओं ने दूरीयां बनाईं हुई थी। अब कृषि कानूनों की वापसी के बाद अब उन नेताओं के लिए भी रास्ता खुल गया है। ग़ौरतलब है कि शिअद-भाजपा गठबंधन भी कृषि कानूनों के विरोध में ही टूटा था। अब कृषि कानून वापस होने के बाद जिन सीटों पर भाजपा को सिख चेहरों की तलाश थी वह पूरी हो सकती है। सूत्रों की माने तो भाजपा ऐसी रणनीति तैयार कर रही है शिअद-भाजपा गठबंधन के वक्त जिन सीटों पर शिअद की पकड़ अच्छी थी वहां के शिअद प्रत्याशी को तोड़ कर भाजपा की सदस्यता दिला दी जाए। इस काम के लिए शिरोमणि अकाली दल से भाजपा में शामिल हुए मनजिंदर सिंह सिरसा अहम किरदार निभा सते हैं। वहीं क़यास ये भी लगाए जा रहे हैं कि दोबारा से एक अनोखा गठबंधन देखने को मिल सकता है।

'अभी तो पार्टी शुरू हुई है'
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी में मनजिंदर सिंह सिरसा के शामिल होने पर कहा 'अभी तो पार्टी शुरू हुई है', आगे आगे देखिए कि सुखबीर को छोड़कर जाने वालों की कैसे लाइन लगेगी। वहीं कैप्टन ने सुखबीर बादल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने अकाली दल में जत्थेदारी संस्कृति खत्म कर दी। बिजनेस माइंडेड लोगों को आगे कर दिया जो सत्ता के साथ ही रहना चाहते हैं। शिरोमणि अकाली दल के पास अब सत्ता नहीं है और ना ही दिखाई दे रही है। अकालियों के पास भारतीय जनता पार्टी के अलावा कोई विकल्प नहीं है। 1984 के मुद्दे की वजह से कांग्रेस में यह लोग नहीं जा सकते हैं। वहीं पंजाब भाजपा अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने कहा कि मनजिंदर सिंह सिरसा के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने से यह बात साफ़ हो गई की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सिख समुदाय के लिए प्यार और पंजाब हितैषी सोच रखते हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव में सिरसा के आने से भारतीय जनता पार्टी को भारी बहुमत से कामयाबी मिलने की उम्मीद है।

शिअद नेता ने लगाए आरोप
शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता डा. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि सिख समुदाय के खिलाफ भाजपा इंदिरा गांधी वाले हथकंडे अपना रही है। सत्ता का दुरुपयोग करके झूठे मामले दर्ज करके खालसा पंथ की धार्मिक संप्रभुता पर सीधा हमला कर रही है। सिख पंथ को यह चुनौती क़बूल है, पंथ इसका सीधा मुकाबला करेगा। उन्होने कहा कि शिरोमणि अकाली दल दिल्ली इकाई के अध्यक्ष जत्थेदार हरमीत सिंह कालका, मनजिंदर सिंह सिरसा और दिल्ली कमेटी के 11 अन्य सदस्यों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। जत्थेदार हरमीत सिंह और अन्य सदस्य सिख परंपराओं के साथ खड़े हैं। दुर्भाग्य से सिरसा दबाव में आ गए और अपनी आत्मा से सिख पंथ को धोखा दिया।
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