पंजाब की देहरी पर चुनाव, मगर अभी तक 40% लोग ही पूरी तरह से वैक्सीनेटेड, देश में सबसे कम
चंडीगढ़। पंजाब, जहां अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, में भारत के अन्य राज्यों की तुलना में पूरी तरह से वैक्सीनेटेड वयस्क लोगों का प्रतिशत सबसे कम है। यहां केवल 40% वयस्कों को पूरी तरह से टीका लगाया गया है, जो भारत में सबसे कम है। यदि ऐसे में महामारी के दौरान लोग वोट डालने जाएं जो संक्रमित होने का खतरा बहुत ज्यादा होगा। केवल 40% वयस्कों के वैक्सीनेटेड होने का यह खुलासा सरकार के वैक्सीनेशन डेटा वाले वेब पोर्टल CoWIN से हुआ है।

कोविन पर बताया गया है कि, विगत 27 दिसंबर तक, राज्य में लगभग 89 लाख लोगों को कोविड-19 के लिए दूसरा टीका प्राप्त हुआ था। 2021 की जनगणना जनसंख्या के अंदाजे के अनुसार, पंजाब की अनुमानित वयस्क आबादी 2.27 करोड़ है, जिसका अर्थ है कि कुल वयस्क आबादी का लगभग 40 प्रतिशत ही पूरी तरह से टीका लगाया गया है। वर्तमान में, भारत उन कोविड वैक्सीन का उपयोग कर रहा है जिनकी पूर्ण क्षमता को सक्रिय करने के लिए एक निर्धारित अंतराल में दो खुराक की आवश्यकता होती है।

कोविन के आंकड़ों से एक और खुलासा होता है कि, पंजाब के अलावा, केवल दो अन्य बड़े राज्यों - उत्तर प्रदेश (47 प्रतिशत) और झारखंड (43 प्रतिशत) ने अपनी आधी से भी कम आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया है। जबकि, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, मध्य प्रदेश, गुजरात, केरल, उत्तराखंड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और दिल्ली अपनी वयस्क आबादी के कम से कम दो-तिहाई लोगों को पहले ही दोनों टीकों से सुरक्षित कर चुके हैं।

औसतन, भारत के अनुमानित 94 करोड़ वयस्कों में से लगभग 62 प्रतिशत ने टीके के दोनों डोज प्राप्त किए हैं। इस साल जून में, भारत सरकार ने 2021 के अंत तक पूरे देश में टीकाकरण की परिकल्पना की थी। हालांकि, बड़ा सच यह है कि देश की एक तिहाई से अधिक आबादी को अलग-अलग तारीखों पर अपना दूसरा खुराक मिलना बाकी है, और ये साल खत्म होने तक इस लक्ष्य को हासिल करना असंभव लगता है।

पंजाब के स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों ने माना है कि राज्य में लोग "वैक्सीन के प्रति उदासीन" हो गए हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें टीका लगाया गया है या नहीं। एक ने तो यह भी कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारियों की चल रही हड़ताल जिसमें आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) कार्यकर्ता और नर्स शामिल हैं, ने टीकाकरण की रफ्तार को प्रभावित किया है।












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