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Pilibhit News: डीएम ने CMS पर उठाए सवाल, शासन ने किया ट्रांसफर, अब पीएम और राज्यपाल से हुई शिकायत

Pilibhit News: पीलीभीत के जिला महिला अस्पताल में कार्यरत कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. राजेश कुमार एक बार फिर चर्चा में हैं। वजह है, उन पर लगे भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और कर्तव्यहीनता के गंभीर आरोप, जिन पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

बताया जा रहा है कि डॉ. राजेश कुमार बीते 23 वर्षों से पीलीभीत में ही तैनात हैं। तबादला नीति के अनुसार किसी भी सरकारी डॉक्टर को इतने लंबे समय तक एक ही जिले में नहीं रखा जा सकता। लेकिन यहां इस नियम को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।

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जनवरी 2025 में तत्कालीन जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने शासन को पत्र भेजकर डॉ. राजेश को हटाने की सिफारिश की थी। उन्होंने पत्र में आरोप लगाया था कि डॉ. राजेश वित्तीय गड़बड़ियों में संलिप्त हैं और उनका व्यवहार भी मरीजों व स्टाफ के प्रति अमर्यादित है।

शासन को दो बार लिखा गया पत्र

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कायाकल्प योजना के तहत अस्पताल को 10 लाख रुपये की राशि मिली थी। इस फंड से अस्पताल को पर्यावरण अनुकूल बनाना था, लेकिन इन पैसों से डॉ. राजेश ने निजी पार्टी का आयोजन कर लिया।

इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि कोविड-19 के दौरान अस्पताल में उपलब्ध वेंटीलेटर भी समय पर नहीं चल पाए। इसकी जिम्मेदारी भी CMS पर ही आई थी, जिसके चलते उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई थी। बावजूद इसके वे अब तक अपने पद पर कायम हैं।

डीएम संजय कुमार सिंह के पत्र के बाद फरवरी 2025 में बरेली की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने भी इस मामले को उठाया। उन्होंने अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र लिखकर CMS पर लगे आरोपों की जांच कर कार्रवाई करने की बात कही थी।

हालांकि, दोनों ही पत्रों को शासन ने अब तक नजरअंदाज कर दिया। आश्चर्यजनक रूप से डॉ. राजेश कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, उलटे पत्र लिखने वाले डीएम का ही तबादला कर दिया गया। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिकायतकर्ता ने राज्यपाल व प्रधानमंत्री को भेजा पत्र

इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता सुमित सक्सेना लगातार आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में नए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह से मिलकर कार्रवाई की मांग दोहराई है। साथ ही राज्यपाल और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि अगर ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं होगी तो इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। सरकार को तुरंत संज्ञान लेकर सीएमएस को हटाकर जांच शुरू करनी चाहिए।

उन्‍होंने यह भी कहा कि डॉ. राजेश कुमार जैसे अफसरों पर जब सवाल उठते हैं और वे बिना किसी जांच के पद पर बने रहते हैं। यह व्यवस्था की नाकामी को उजागर करता है।

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