राज्य सभी की दो सीटों पर ग्रहण लगा सकता है जदयू विधायकों का गुस्सा

शुक्रवार को जदयू विधान पार्षद नीरज ने यह बयान दिया था कि नैतिकता के आधार पर जदयू राज्यसभा की तीन सीटों के लिए हो रहे उप चुनाव में अपना प्रत्याशी नहीं दे। नीरज का तर्क है कि जो सीटें खाली हो रही हैं उनमें दो राजद-लोजपा के तत्कालीन गठबंधन और एक भाजपा की हैं।
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सैद्धांतिक रूप से तीनों विपक्ष की सीट हैं, इसलिए जदयू को अपना उम्मीदवार नहीं देना चाहिए। नीरज के बयान पर जदयू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने स्पष्ट तौर पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन उनका यह वक्तव्य जरूर आया कि नीरज ने सही बात उठाई है।
उन्होंने कहा कि पार्टी इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर है। पार्टी के शीर्ष नेताओं से वह इस बारे में बात करेंगे। राज्यसभा सीट पर जदयू की नीति क्या होगी इस पर पिछले दो दिनों से लगातार मंथन चल रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर जदयू के नेता लगातार मंथन कर रहे हैं। शरद यादव के नाम की सहमित के अलावा दो नामों परजिंच है। बीच में यह चर्चा उठी कि जदयू पवन वर्मा और राजद नेता अली अशरफ फातमी को राज्यसभा भेज सकता है।
पर जिस तरह से पार्टी के कुछ विक्षुब्ध विधायकों ने इस तरह की चर्चा का विरोध किया उसे देख अली अशरफ फातिमी का मामला अब खत्म हो गया है। जदयू के वरिष्ठ नेता इस मूड में हैं कि वोटिंग की नौबत ही नहीं आए।
अगर जदयू के विधायक गुस्से में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को वोट नहीं करते हैं, तो फजीहत हो जाएगी। ऐसे में प्रत्याशी नहीं उतारना ही सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है। अगर केवल शरद यादव को जदयू अपना प्रत्याशी बनाता है तो उनके लिए वोटों के जुगाड़ में उसे कोई परेशानी नहीं होगी। हालांकि अब तक आम राय नहीं बन पाई है, जिससे मामला अब भी बीच में ही उलझ गया है।












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