बिहार में बिगड़ने वाला है BJP-JDU गठबंधन का खेल, क्या होगा सत्ता परिवर्तन ?
बिहार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड में तकरार बढ़ती ही जा रही है।
पटना, 16 मार्च 2022। बिहार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड में तकरार बढ़ती ही जा रही है। सियासी गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि भाजपा-जदयू की साढ़ें चाल साल की दोस्ती टूट सकती है, क्योंकि बिहार विधानसभा अध्य क्ष के साथ हुई नोकझोंक के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। दरअसल हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विधानसभा अध्यक्ष के साथ कहासुनी हो गई थी। जिस वजह से सीएम नीतीश कुमार ने विधानसभा स्पीकर को ही संविधान की नसीहत दे दी थी। सीएम नीतीश कुमार की इस बदसलुकी की वजह विजय सिन्हा मंगलवार को सदन में ग़ैर हाज़िर रहे।

भाजपा-जदयू में सियासी घमासान
जदयू और भाजपा के बीच लखीसराय के पुलिस उपाधीक्षक और थाना प्रभारी के ख़िलाफ़ जांच को लेकर मतभेद हो गया है। बिहार की सियासत में दोनों पार्टी के लिए यह मुद्दा वर्चस्व की लड़ाई बन चुकी है। विधानसभा में हुई नोकझोंक के बाद मुख्यमंत्री नीतीश ने तुरंत हाईलेवल बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि वह अपने कार्यक्षेत्र में इस तरह की हरकत बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। विधानसभा में हुए मामले के बाद से ही एनडीए गठबंधन में गुटबाज़ी शुरू हो गई है। सीएम नीतीश कुमार के पक्ष में विकासशील इन्सान पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी खड़े नज़र आ रहे हैं।

नीतीश कुमार के पक्ष में मुकेश सहनी
बिहार विधानसभा स्पीकर और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच हुए विवाद पर मुकेश सहनी ने कहा कि दोनों के बीच जो हुआ उसकी वजह कुछ और ही है। उन्होंने कहा कि स्पीकर के पार्टी के नेता और मंत्री ही स्पीकर का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह का मुद्दा सदन में उठाने का कोई मतलब ही नहीं बनता है, ऐसे मामले को पार्टी के स्तर पर रखना चाहिए ना कि सदन में। मुकेश सहनी ने कहा की सीएम नीतीश कुमार ने सही कहा है, कुछ भी ग़लत नहीं कहा है। पुलिस की चांज से सदन को कोई मतलब नहीं होना चाहिए। सदन की कमेटी जांच कर रिपोर्ट देगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को सुलझाने के लिए एनडीए नेताओं की जल्दी ही बैठक होनी चाहिए।

सहनी को किनारा करना चाह रही भाजपा
बिहार के सियासी गलियारों में यह भी चर्चा ज़ोरों पर है कि भारतीय जनता पार्टी कैबिनेट से मुकेश सहनी की छुट्टी करना चाहती है। वहीं दूसरी तरफ़ भाजपा के रिश्ते जदयू से बिगड़ते जा रहे हैं। ऐसे में बिहार में विधानसभा सीटों का आंकड़ा समझना बहुत ही ज़रूरी है क्योंकि ज़रा सी भी चूक हुई तो बिहार में सत्ता पलट सकती है। आपको बता दें कि बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं। इनमें 242 सीटों पर सदस्य हैं लेकिन एक सीट अभी खाली है। वहीं बिहार में सत्ता पर क़ाबिज़ होने के लिए 122 सीटों की ज़रूरत होती है, जिसमें एनडीए गठबंधन के पास 127 विधायकों का समर्थन है। वहीं विपक्ष के पास 115 विधायक हैं, आंकड़ो की बाज़ी ज़रा सी भी पलटी तो बिहार में सत्ता परिवर्तन हो सकता है।

बिहार के किस पार्टी के कितने विधायक
बिहार के किस पार्टी के कितने विधायक हैं इस पर नज़र डालें तो एनडीए गठबंधन के पास 127 सीटें हैं। भाजपा के पास 74 विधायक, जदयू के पास 45 विधायक, एचएएम के पास चार विधायक, वीआईपी के पास 3 विधायक और एक निर्दलीय विधायक हैं। वहीं विपक्ष की सीटों की बात की जाए तो आरजेडी के पास 75 विधायक, कांग्रेस के पास 19 विधायक, सीपीआई(माले) के पास 12 विधायक, सीपीआई के पास 2 विधायक, सीपीएम के पास 2 विधायक और एआईएमआईएम के पास पांच विधायक हैं।

बिहार में पलट सकती है बाज़ी
लखीसराय की घटना को लेकर बिहार की सियासत गरमाई हुई है, एनडीए गठबंधन के साथी आपस में ही एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। मुकेश सहनी को किनारा करने के लिए भाजपा रणनीति तैयार कर रही है। वहीं लखीसराय मामले पर भाजपा और जदयू आमन-सामने आ खड़ी हुई है। ऐसे में अगर एनडीए गठबंधन साथी में से किसी एक पार्टी ने भी समर्थन वापस लिया तो बिहार में बाज़ी पलट जाएगी। क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ज्यादा सीटों का फ़ासला नहीं है। बिहार में सत्ता पाने के लिए 122 विधायकों का समर्थन होना ज़रूरी है। विपक्ष के पास पहले से ही 115 विधायक मौजूद हैं। अगर विपक्ष जोड़-तोड़ की राजनीति में कामयाब हुई तो एनडीए गठबंधन बिहार की सत्ता से हाथ धो सकती है।
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