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क्लीन एयर प्लान लागू करने में पटना बना नंबर 1, जानिए कैसे निबटेगा वायु प्रदूषण से

पटना। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, आदि जहां ढंग से सांस तक नहीं ले पा रहे हैं, वहीं पटना ने क्लीन एयर ऐक्शन प्लान को लागू करने में बाजी मार ली। जी हां पटना इस प्रोग्राम को लॉन्‍च करने में नंबर वन शहर बन गया है। 23 नवंबर को उप मुख्यमंत्री, सुशील कुमार मोदी ने पटना स्वच्छ वायु कार्य योजना (पीसीएएपी) की शुरुआत की। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस कार्य योजना को सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी और अर्बन एमिशन्स की सहायता से विकसित किया है।

Patna

आपको बता दें कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भारत के 122 शहरों को चिन्हित किया था जहां की वायु गुणवत्ता मानकों की तुलना में बेहद खराब है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत सभी 122 शहरों की वायु की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का काम तेजी से शुरु हुआ। लेकिन बाकी की राज्य सरकारें अभी इस पर सोचती ही रहीं, कि बिहार सरकार ने पटना में इस प्रोग्राम को लॉन्‍च भी कर दिया। पटना क्लीन एयर ऐक्शन प्लान के अंतर्गत प्रदूषण को वृहद स्तर पर नियंत्रित किया जायेगा। अनुसंधान समूहों द्वारा अपनाई गई वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित इस योजना को शुरू करने वाला पटना देश का पहला शहर बन गया है। इस काम को सफल बनाने में एशियाई विकास अनुसंधान संस्थान (CEECC, ADRI), पर्यावरण ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन केंद्र, ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीस एंड पावर और सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन ने बड़ी भूमिका निभाई है।

पटना की वायु की गुणवत्ता पर एक नज़र

विश्‍व स्वास्‍थ्‍य संगठन की रिपोर्ट 2016, में बिहार राज्य की राजधानी पटना दुनिया के पांच सबसे प्रदूषित शहरों में पाया गया। शहर को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा भारत के 122 नॉन अटेन्मेंट शहर यानि वे वायु गुणवत्ता मानकों की तुलना में खराब वायु गुणवत्ता लगातार दिखा रहे हों और में से एक के रूप में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के रूप में पहचाना गया। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जब नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम शुरू किया गया तो पटना स्वच्छ वायु कार्य योजना को शुरु किया गया। साल भर के अध्ययन से स्रोत-विशिष्ट नियंत्रण उपायों की पहचान की गई और संचालित करने के लिए उनकी तकनीकी और आर्थिक संभावनाओं का आकलन किया गया। इसी अध्‍ययन के आधार पर इस प्रोग्राम को यहां लॉन्‍च किया गया।

2030 तक क्या होने की आशंका

इस योजना को लॉन्‍च करने से पहले किये गये अध्ययन के अनुसार अगर सब कुछ ऐसे ही चलता रहा, तो 2030 तक कुल PM2.5 उत्सर्जन लोड लगभग 28,000 टन प्रति वर्ष तक पहुंच जायेगा। 2018 में यह 20,000 टन था। परिवहन, घरेलू और औद्योगिक क्षेत्र वर्ष 2030 तक कुल PM2.5 उत्सर्जन में योगदान देने वाले प्रमुख प्रदूषणकारी स्रोतों होंगे। BAU परिदृश्य के तहत, PM2.5 की सांध्रता लगभग 28%, तक बढ़ने की आशंका है।

2018 में यह 104.4 mg/m3 रही, जबकि 2030 तक यह बढ़कर 134.0 /g / m3 हो जायेगी। अगर सबकुछ ऐसे ही चलता रहा तो 2030 में, पटना में घरेलू गैस का प्रदूषण में 23% योगदान होगा। वाहनों से निकलने वाले धुएं का 19%, फैक्ट्रियों आदि से 12%, खुले में कूड़ा जलाने से 11%, धूल 11% और डीजल जनरेटर सेट की वजह से प्रदूशण में योगदान 4% होगा। तीन प्रमुख प्रदूषणकारी क्षेत्रों (घरेलू, परिवहन और उद्योग) से कुल प्रदूषण लगभग 52% होने का अनुमान है।

प्रदूषण के कारण मौसमी उतार चढ़ाव

सभी जानते हैं कि प्रदूषण के कारण मौसमी उतार चढ़ाव होता है। अगर पटना की बात करें तो 2018 में, परिवहन क्षेत्र ने कुल प्रदूषण एकाग्रता का 15% -38% (मौसमी बदलाव) योगदान दिया। इसी तरह, सर्दियों में घरों को गर्म रखने को प्रमुख कारण पहचाना गया जिसके कारण प्रदूषण अचानक बढ़ गया। इसका मुख्य कारण गर्मी पैदा करने के लिए सर्दियों के मौसम में बायोमास का जलना है। यह अनुमान लगाया है कि सर्दियों के महीनों में घरों को गर्म रखने के कारण कुल प्रदूषण केन्द्रीकरण के स्तर में 18% -30% योगदान रहा। हालांकि, शेष वर्ष के दौरान घरेलू हीटिंग से प्रदूषण का प्रतिशत 10% से नीचे रहता है। इस प्रकार, नीतियों को बनाते समय प्रदूषण केन्द्रीकरण स्तरों में मौसमी बदलाव पर विचार किया जाना चाहिए।

प्रदूषण से कैसे निबटेगा पटना

पटना की सड़कों पर अब खुले में कूड़ा जलाना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित होगा। साथ ही निर्माण कार्य, जैनरेटर के उपयोग, या किसी भी ऐसे काम को करने में नियमों का पालन करना होगा, जिसमे धुआं या धूल उठती है।

पटना में, सार्वजनिक परिवहन का साधन का हिस्सा लगभग 21% है। 2030 तक, शहर की गतिशीलता योजना के तहत 40% निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए कम से कम 500 अतिरिक्त सार्वजनिक सीएनजी बसों को संचालित किया जायेगा। अनुमान है कि इस कदम से परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन में 11% तक की कमी आयेगी। इस कार्य में करीब 321 करोड़ रुपए का खर्च आयेगा।

पार्टिकुलेट फिल्टर होगा अनिवार्य

पटना में पंजीकृत सभी ट्रकों में डीज़ल पार्टिकुलेट फिल्टर लगाना अनिवार्य होगा। दो स्ट्रोक वाले ऑटो पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लग जायेगा। प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) मानदंडों को सख्ती से लागू किया जायेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को प्रोत्साहित किया जायेगा।
बिहार सरकार ने ईंट उद्योग में स्वच्छ तकनीक अपनाने को अनिवार्य किया है। ज़िगज़ैग जैसी नई तकनीकों को चिमनी भट्टों की तुलना में कम प्रदूषणकारी माना जाता है। इसलिए, सरकार ने सिफारिश की है कि ईंट उद्योग को ज़िगज़ैग प्रौद्योगिकी में स्थानांतरित कर दिया जाए। ज़िगज़ैग तकनीक के प्रभावी कार्यान्वयन से ईंट भट्टों से उत्सर्जन भार 34% कम हो जाएगा।

सड़क पर कूड़ा जलाया तो खैर नहीं

प्रभावी अपशिष्ट संग्रह और निपटान प्रणालियों को सुनिश्चित करके, खुले में कूड़ा जलने से रोक कर 90% उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। लिहाजा खुले में कूड़ा जलाने वालों की अब खैर नहीं होगी। वहीं कूड़े को नष्‍ट करने व अपशिष्ट-से-ऊर्जा बनाने के संयंत्र लगाये जायेंगे। इन संयंत्रों को स्थापित करने के लिए पटना नगरपालिका को कम से कम 30 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

पटना में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का इस्तेमाल लगभग 90% तक है, फिर भी हमने पाया कि बायोमास को खाना पकाने के ईंधन के रूप में व्यापक उपयोग किया जा रहा है। एलपीजी सिलिंडर को अधिक किफायती और सुलभ बनाकर घरेलू क्षेत्र से उत्सर्जन को लगभग 81% तक कम किया जा सकता है। सरकार को एलपीजी को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी के रूप में लगभग 30 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। धुआं रहित चूल्हा / इंडक्शन स्टोव की शुरूआत भी घरेलू क्षेत्र से उत्सर्जन भार को कम करने में मदद कर सकती है।

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