विपक्षी एकता बैठक: क्या खामियों को छिपाने के लिए अतिगोपनीय रखी गयी ?
Opposition meet Patna : पटना में 15 विपक्षी दलों की बैठक बेहद गोपनीय तरीके से सम्पन्न हुई। माना जा रहा है यह गोपनीयता इसलिए बरती गयी ताकि बैठक के दौरान अगर कोई गतिरोध उत्पन्न हो तो वह सार्वजनिक न हो। कमरे की बात कमरे में ही रहे। मीडिया को वही बात बतायी गयी जो उनके अनुकूल हुई। बैठक में अरविंद केजरीवाल की शर्त पर क्या कोई चर्चा हुई ? अगर केजरवाल ने बैठक का बहिष्कार नहीं किया तो जाहिर है उन्हें कुछ आश्वासन मिला होगा। लेकिन एक बात तो तय है कि आने वाले समय में कांग्रेस ही विपक्षी एकता की मुहिम का नेतृतव करेगी। अगली बैठक कांग्रेस शासित राज्य हिमाचल की राजधानी शिमला में होगी और बैठक की अगुआई
राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे केरेंगे यह बैठक अगले महीने की 10-12 तारीख के बीच होने वाली है।
केजरीवाल की शर्त पर नीतीश का संकेत
अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के सामने जो शर्त रखी थी उसके बारे में तो कोई स्पष्ट बात सामने नहीं आयी लेकिन इस संबंध में नीतीश कुमार ने एक संकेत जरूर दिया। संयुक्त प्रेस वार्ता की शुरुआत करते हुए नीतीश कुमार ने कहा, अगर किसी राज्य में कोई चुनौती आती है तो हम सब लोग उसके खिलाफ मिल कर लड़ेंगे। यानी शिमला बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा होगी। हालांकि संयुक्त प्रेस वार्ता से पहले अरविंद केजरीवाल का दिल्ली प्रस्थान करना, एकता की मुहिम पर सवाल खड़ा कर गया।

आगे कांग्रेस बड़ी भूमिका में होगी
आगे कांग्रेस बड़ी भूमिका निभाने वाली है। जब नीतीश कुमार ने राहुल गांधी को कुछ बोलने के लिए बार बार अनुरोध किया तो कई नेता उनकी तरफ देखने लगे। ऐसा लग रहा था कि राहुल गांधी इस बैठक में के बारे में कुछ बोलना नहीं चाहते थे। लेकिन नीतीश के जोर देने पर वे बोले। बात की शुरुआत हल्के फुल्के अंदाज में की। लिट्टी-चोखा और गुलाब जामुन खिलाने के लिए नीतीश कुमार का धन्यवाद किया। राहुल गांधी से पहले मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी बात रखी। अगली मीटिंग की तारीख और स्थान की उन्होंने ने ही जानकारी दी।
अलग राज्य के लिए अलग रणनीति
विपक्षी एकता का प्रथम चरण सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ा है। पटना की बैठक में एक साथ मिल कर चुनाव लड़ने पर सहमति बनी। जुलाई में होने वाली शिमला बैठक काफी अहम है। इस बैठक में ही यह चर्चा होगी कि कौन दल कहां से लड़ेंगे। स्टेट बाई स्टेट चुनावी रणनीति बनेगी। एक राज्य की रणनीति दूसरे राज्य के लिए सटीक नहीं रहेगी। बिहार में कैसे चुनाव लड़ेंगे, महाराष्ट्र में कैसे चुनाव लड़ेंगे, ये परिस्थितियों के मुताबिक तय किया जाएगा। कुछ असहमतियों के बावजूद सभी दल मिल कर काम करेंगे।
नीतीश के बगल में बैठे लालू यादव
संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस के एक प्रमुख किरदार लालू यादव भी रहे। वे नीतीश कुमार के बगल में बैठे थे। इसका मतलब है लालू यादव अब पूरी तरह फिट हैं और विपक्षी एकता की मुहिम में अपने राजनीतिक कौशल का इस्तेमाल करेंगे। अब नीतीश कुमार को उन्हें भी इसका श्रेय देना पड़ेगा। लालू यादव ने कहा, अरसे बाद पीसी (प्रेस कांफ्रेंस) कर रहे हैं। मैं पूरी तरह फिट हूं और अब मोदी को फिट करना
है।
कांग्रेस पर लालू यादव कभी नरम तो कभी गरम
लालू यादव आज भले राहुल गांधी की मेहनत की तारीफ कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस के साथ उनका इतिहास नरम गरम रहा है। वे कभी कांग्रेस के साथ खड़े रहे तो को कभी बिना औकात वाली पार्टी कह दी। 2004 में लालू यादव मनमोहन सिंह की सरकार में रेल मंत्री थे। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव के पहले उनकी कांग्रेस से खटपट शुरू हो गयी। लोकसभा चुनाव के समय उन्होंने कहा दिया कि बिहार में काग्रेस की औकात एक-दो सीट से अधिक लेने की नहीं है। नतीजतन शीट शेयरिंग नहीं हुई। चुनाव प्रचार के समय लालू यादव ने कह दिया था कि विवादित स्थान (राममंदिर) का ताला खुलवाने में राजीव गांधी सरकार का हाथ था। इस बायन के बाद कांग्रेस, लालू यादव पर भड़क गयी थी। 2009 के चुनाव में जब यूपीए फिर सत्ता में लौटी तो लालू यादव को मंत्री नहीं बनाया गया।
2024 में सबसे अधिक परेशानी बिहार में होगी
2024 के लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक परेशानी बिहार में ही आनेवाली है। जदयू, राजद, भाकपा माले के बीच कांग्रेस को कितनी सीट मिलेगी, कुछ कहा नहीं जा सकता। कहा जा रहा है जिन राज्यों मे क्षेत्रीय दलों की सरकार है वहां कांग्रेस को कुर्बानी देनी होगी। इस हिसाब से तो बिहार में इस बार भी कांग्रेस याचक की तरह ही दिखेगी। क्या उस कांग्रेस को यह मंजूर होगा जो राहुल गांधी को अगला
प्रधानमंत्री बनाने का सपना देख रही है ?












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