गर्मी के इस साइड इफेक्ट से बचकर रहियेगा आप!

पटना। गर्मी में पारा चढ़ते ही लोग गर्मी के साइड इफेक्ट गिनाने लगते हैं। कहते हैं धूप से आते ही ठंडा पानी मत पियो, नंगे बदन धूप में मत घूमो, एसी से निकलकर सीधी धूप में मत जाओ, वगैरह-वगैरह... लेकिन एक साइड इफेक्ट जिसकी बात हम करने जा रहे हैं, उससे बचने के सुझाव कोई नहीं देता। वो साइड इफेक्ट है आग।

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जी हां इस गर्मी अग्नि के प्रकोप से देश के कई इलाकों में करोड़ों का नुकसान हुआ है। ठाणे की इमारत में आग लगी, कोलकाता की झुग्ग‍ियां जलीं, भोपाल की फैक्ट्री में आग लगी, मुजफ्फरपुर में आधा गांव जल गया, लुध‍ियाना में केमिकल फैक्ट्री जल गई और फरीदाबाद में मेट्रो डिपो में आग लग गई। और भी कई जगहों से आग लगने की खबरें मिलीं।

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गर्मी के इस साइड इफेक्ट से बचकर रहियेगा आप!

गर्मी के इस साइड इफेक्ट से बचकर रहियेगा आप!

अब बात बिहार की

बीते एक सप्ताह में बिहार में लगभग डेढ़ दर्जन लोगों की मौत तथा करोड़ों की गेहूं की फसल व अन्य सामान जलकर राख हो गया। करीब 5 हजार से अधिक लोगों का आशियाना जलकर खाक हो गया है। प्रकृति के इस कहर से पूरा बिहार त्रस्त है। जब प्रशासन पर जनता और जनप्रतिनिधियों का दबाव बढ़ा तब वह हरकत में आई, वह भी आधी अधूरी तैयारी के साथ।

बात करते हैं दूरदराज के गांव में रह रहे लोगों की जिनका घर बार खेत खलियान तबाह हो गया-

  • 3 दिन पूर्व वैशाली के सोरहथी में भयंकर आग लगी, जिसमें 600 घर जलकर खाक हो गए। इसमें दो लोगों की मौत हो गई।
  • उसी दिन देसरी प्रखंड के धर्मपुर पंचायत में आग लगने से लगभग 400 घर जलकर राख हो गए।
  • पटना ,नालंदा ,कटिहार, मुजफ्फरपुर ,शिवहर ,पूर्वी चंपारण ,कैमूर ,सारण, सिवान ,सुपौल ,मधुबनी ,गोपालगंज, दरभंगा आदि में आग की अलग-अलग घटनाओं में अबतक दो दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है।
  • सरकारी रिकार्ड के अनुसार इस गर्मी अलग-अलग जगह आग लगने से 11 लोगों की मौत हुई है।

अगर मिस्ट टेक्नोलॉजी वाले फायर ब्रिगेड वाहन की बात करें तो तो 2 वर्ष पूर्व सरकार ने थाना स्तर पर वाहन उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। लेकिन अब तक केवल 202 थानों को यह वाहन मिला है। वहीं 274 को अगले 2 माह में मिलने की संभावना है। शेष 400 थानों को कब वाहन मिलेंगे, इसकी ठोस कार्य योजना नहीं है।

भीषण अग्निकांड होने पर सरकार पीड़‍ित परिवार को अनुग्रह राशि के रूप में 7800 रुपए की दर से राहत उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, लेकिन ग्राउंड लेवल पर इसकी हकीकत कुछ और ही है। जिन कर्मियों को सर्वेक्षण करने की जिम्मेवारी दी जाती है, वह मनमर्जी तरीके से सर्वे करते हैं। फिर भी अनुग्रह अनुदान की राशि उन्हें मिल जाती है। मानकों को दरकिनार कर किये गये सर्वे के कारण घर जल गए हैं और खेत खलियान में रखे फसल जलकर राख हो गए हैं।

प्रावधान के अनुसार जिनके घर जले, उन्हें इंदिरा आवास योजना से आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन जिनके आवास पिछले वर्ष जले थे उन्हें आज तक आवास नहीं मिले हैं।

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