शर्मनाक: जननायक से जुड़ी फाइलें हुई चूहों का शिकार, नीतीश सरकार बेपरवाह
पटना (मुकुंद सिंह) कभी बिहार के राजनीति धूरी रहे कर्पूरी ठाकुर जिन्हें समाजवादी नेता के नाम से बिहार का बच्चा-बच्चा जानता है।जिनकी जंयती सभी पार्टी के लोग मनाते है और अपने -आप की तुलना लोकनायक कर्पूरी ठाकुर से करते है। हलांकि बिहार सरकार ने भी उन्हें खुब सम्मान देते हुए इनके नाम पर जननायक कर्पूरी ठाकुर संग्रहालय बनवाया है जो कि राजभवन और मुख्यमंत्री आवास के पास है।

जहां कर्पूरी ठाकुर के जीवन से जुड़ी कई ऐसी चीजें है जो उनकी याद दिलाती है। जैसे उनके चश्मे से लेकर चाभी, चादर, कुर्ता-धोती, खड़ाऊँ । कर्पूरी ठाकुर की जयंती हर साल मनाई जाती है। इस बार उनकी जयंती उनके नाम पर बनाए संग्राहलय में मनाने की तैयारी हो रही है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बिहार सरकार कर्पुरी ठाकुर से जुड़ी यादों को संभाल कर नहीं रख पाई।
संग्रहालय के ऊपर उनसे जुड़ी पुरानी यादें रखी हुई है, जो हमेशा से बंद रहती है वहां किसी को जाने नहीं दिया जाता है, लेकिन जब हम पहुंचें तो पता चला कि कर्पूरी से जुड़े कई अहम कागजात चुहों द्वारा काटे जा चुके हैं। जिस तरह से उन कागजातों को रखा गया था, उसे देखने से ये लगता है कि अब ज्यादा दिन तक उनके दस्तावेज़ को नहीं रखा जा सकता है।
कौन थे कर्पूरी ठाकुर
24 जनवरी 1924 में बिहार के समस्तीपुर जिले के पितौझिया गाँव मे कर्पूरी ठाकुर का जन्म हुआ था। वो शिक्षक के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उन्होने 1952 मे पहली बार ताजपुर विधानसभा से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की। साथ ही लगातार 1972तक निर्वाचित होते रहे थे। शिक्षा मंत्री के रूप मे उन्हें एक ऐतिहासिक फैसला लिया था जिसके तहद मैट्रिक के पाठयक्रम मे अंग्रेज़ी की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई।












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