पटना में बिना नेतागिरी के हुआ रावण का वध
पटना (मुकुन्द सिंह)। पटना के गांधी मैदान में धूम धाम से रावण वध किया गया। इस वर्ष रावण के पुतले की लंबाई 70 फुट, कुंभकर्ण के पुतले की लंबाई 65 फुट और मेघनाद के पुतले की लंबाई 55 फुट की थी। राम की सेना के गांधी मैदान पहुंचने पर राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने राम की सेना का स्वागत किया।

राम की सेना पहले लंका को जलाया। लंका को हनुमान ने जलाया। इसके बाद राम की सेना ने सबसे पहले मेघनाथ को जलाया गया, इसके बाद कुंभकर्ण को। इसके बाद राम ने अपने तीर मारकर रावण का दहन किया। चुनाव प्रक्रिया शुरू है। बिहार में इसलिए कोई राजनितिक दल के प्रतिनिधि उपस्तिथि नहीं थी।
गौरतलब हो की पिछले वर्ष पटना के गांधी मैदान में दशहरा के दिन रावण दहन कार्यक्रम के दौरान भगदड़ में 33 लोगों की मौत की घटना से सबक लेते हुए प्रशासन ने इस बार सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए थे। गांधी मैदान में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा-व्यवस्था का व्यवस्था अन्य सालो के अपेक्षा बहुत चुस्त थी। सुरक्षा के लिए सभी गेट पर पुलिस के जवानों को तैनात किया जाएगा।
इसके साथ ही वाच टॉवर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और कंट्रोल रूम बनाए गए थे। इस पूरी कमान को संभाले थे पटना के एसएसपी विकास वैभव तथा पटना के डीआईजी शालीन। 40 सीसीटीवी कैमरे से पूरे गांधी मैदान और आसपास के इलाके पर नजर रखें जा रहे थे। गांधी मैदान के बाहरी क्षेत्र के सभी गेट पर अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की थी।
इस बार लंका नगरी की सजावट पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। रावण वध और लंका दहन के लिए इलेक्ट्रॉनिक आतिशबाजी का उपयोग किया गया था, जिससे वातावरण में कम प्रदूषण फैलेगा। अन्य सालो के अपेक्षा आतिशबाजी भी विशेष प्रकार से इंतेजाम किया गया था। गांधी मैदान में शाम 5.00 बजे रावण वध कार्यक्रम प्रारंभ हुआ, जो करीब 45 मिनट तक चला। रावण दहन कार्यक्रम के मद्देनजर मैदान के अंदर एक तथा चार प्रमुख गेट पर एंबुलेंस, फायर बिग्रेड और सात वॉच टॉवर पर पुलिस और दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी।












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