बिहार चुनाव में किस पार्टी को किस बात का टेंशन?
पटना (मुकुंद सिंह)। बिहार में विधानसभा चुनाव को पांच चरणों में पूरा करने की घोषणा हो चुकी है। इस महासंग्राम में भाजपा नीत राजग और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू, लालू प्रसाद की राजद और कांग्रेस के महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर होने जा रही है। राज्य विधानसभा चुनाव के परिणाम का राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक परिदश्य पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।
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भाजपा के लिये क्यों महत्वपूर्ण
भाजपा के लिए यह चुनाव जीतना बेहद महत्वपूर्ण है, अगर वह नरेन्द्र मोदी सरकार के पक्ष में राजनीतिक बयार को गति देना चाहती है और दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की पराजय और भूमि विधेयक पर कदम पीछे खींचने और जीएसटी, आदि की वजह से लगे दाग मिटाना चाहती है तो यह चुनाव जीतना बेहद जरूरी है। अगर यह चुनाव हारी, तो केंद्र के लिये आगे चलकर मुश्किल हो सकती है।
भाजपा का टेंशन- अगर बिहार में हारे तो भाजपा के लिये 2017 में उत्तर प्रदेश जीतना और भी कठिन हो जायेगा।
जदयू का जादू
राज्य में जदयू 10 साल से सत्ता में है और इस दौरान नीतीश कुमार के हाथों में काफी समय तक राज्य की बागडोर रही। कुमार की पार्टी का इस बार लालू प्रसाद की राजद और कांग्रेस के साथ गठबंधन है। नीतीश भाजपा के साथ 17 साल पुराना गठजोड़ तोड़कर जून 2013 में राजग से अलग हो गए थे। इनके लिये सबसे बड़ी चुनौती महागठबंधन की एकता है। अगर इस गठबंधन में दरार आयी, तो यह ताश के पत्तों के किले की तरह ध्वस्त हो जायेगा।
नीतीश का टेंशन- अगर हारे तो नीतीश कुमार का करियर भी खत्म होने की कगार पर पहुंच जायेगा।
पासवान को नहीं पड़ेगा फर्क
पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव में भाजपा का रामविलास पासवान की लोजपा और उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के साथ गठजोड़ था और भाजपा नीत गठबंधन ने उस चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया था। इस चुनाव में पासवान को ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला। जितनी सीटें आयेंगी, उतने प्लस प्वाइंट उनके खाते में केंद्र में जुड़ेंगे।
पासवान का टेंशन- पासवान को सिर्फ इस बात का टेंशन है कि अगर जाति समीकरण इस बार नहीं चले तो बिहार में उनकी पार्टी की पैठ कम हो सकती है।
आचार संहिता लागू
मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी ने आदर्श आचार संहित तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है। बिहार में कुल 243 सदस्यों वाले बिहार विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को खत्म हो जाएगा। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, मतदान का प्रथम चरण 12 अक्टूबर, दूसरा चरण 16 अक्टूबर, तीसरा चरण 28 अक्टूबर, चौथा चरण एक नवंबर, जबकि पांचवां और अंतिम चरण पांच नवंबर को संपन्न होगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बिहार चुनाव की घोषणा करते हुए बताया कि बिहार में कुल 6.68 करोड़ मतदाता हैं, और इस बार यही मतदाता बिहार में आने वाले समय में कौन मुख्या मंत्री का पद संभालेगा यह निर्णय 8 नवंबर को सबके सामने होगा।













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