बिहार चुनाव की गणित में ओवैसी का गुणा-भाग, लड़ेंगे सीमांचल में चुनाव
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद राजनीतिक दलों में सीटों के बंटवारे को लेकर रार बनी हुई। लेकिन इन सब के बीच एआइएमआइएम ने भी बिहार विधानसभा चुनाव के मैदान में कूदने का ऐलान कर दिया है।
छह वाम दलों के बीच अब-तक 221 सीटों पर सहमति
एआइएमआइएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने आज बिहार में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। ओवैसी ने बिहार के सीमांचल में चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए अख्तर इमाम को बिहार चुनाव की कमान सौंपी है।
चार जिलों में लड़ेंगे चुनाव
ओवैसी ने बिहार के सीमांचल के चार जिलों अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किसनगंज से चुनाव लड़ने की घोषणा की है। हालांकि अभी इस बात की घोषणा नहीं की गयी है कि कितनी सीटों पर वह चुनाव लड़ेंगे।
आखिर सीमांचल से ही क्यों चुनाव लड़ेगी ओवैसी की पार्टी
ओवेसी के बिहार के सीमांचल में चुनावी मैदान में कूदने की वजह को समझना भी यहां काफी जरूरी हो जाता है। दरअसल सीमांचल की कुल आबादी तकरीबन एक करोड़ है और इसमें मुसलमानों की आबादी 40 फीसदी है।
अकेले किसनगंज की 69 फीसदी आबादी मुस्लिम
सीमांचल का मुस्लिम बाहुल्य होना ही ओवैसी के लिए यहां के चुनावी मैदान में कूदने की अहम वजह है। अकेले किसनगंज में 69 फीसदी मुसलमान हैं। इन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए ओवैसी ने यहां चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
सीमांचल के विकास के लिए कूदे चुनाव में
हालांकि सीमांचल से चुनाव की लड़ने की वजह ओवैसी इस क्षेत्र के पिछड़ा होना बताते हैं। वो कहते हैं कि जिस तरह से यहां के क्षेत्र का विकास पूरी तरह से रुका है और यहां के लोगों का जीवन बेहद ही बदतर है उसे चुनाव का मुद्दा बनना चाहिए, जिसकी कोई बात नहीं कर रहा है।
अनुच्छेद 371 के तहत करेंगे राज्य विकास काउंसिल की मांग
ओवैसी ने कहा कि अगर हम सीमांचल में चुनाव जीतते हैं तो हम संसद के जरिए संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत राज्य विकास काउंसिल के निर्माण की मांग करेंगे ताकि यहां के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।













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