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पाकिस्तान: डिजिटल पहचान पत्र के बिना सेवाओं से वंचित हो रहे लोग

इस्लामाबाद, 27 जुलाई। तीन साल तक डिजिटल पहचान पत्र पाने की नाकाम कोशिश के बाद कराची की रहने वालीं रुबीना ने अपनी लड़ाई को अदालत में लड़ने का फैसला किया. रुबीना के इस प्रयास का नतीजा यह हुआ कि कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. तब तक, पाकिस्तानी नागरिकों को अपना कम्प्यूटरीकृत राष्ट्रीय पहचान पत्र (सीएनआईसी) नहीं मिल सकता था, जब तक कि वे अपने पिता का पहचान पत्र पेश नहीं करते. मतदान से लेकर सरकारी सेवाएं, सरकारी स्कूलों तक पहुंच और स्वास्थ्य देखभाल, बैंक खाता खोलने या नौकरियों के लिए आवेदन करने समेत सभी चीजों के लिए कार्ड अनिवार्य है.

pakistans digital id card locks out millions

21 साल की रुबीना कहती हैं, "जब कभी मैं अपना पहचान पत्र लेने जाती, मुझे अपने पिता का कार्ड लाने के लिए कहा जाता था. मैं उनका पहचान पत्र कैसे पेश कर सकती हूं?" रुबीना बताती हैं कि उनके पिता ने उनके पैदा होते ही परिवार को छोड़ दिया और उनकी मां ने ही उसे पाला पोसा है. वह कहती हैं, "जब पिता ने हमें छोड़ दिया तो हम उनका पहचान पत्र कैसे ला सकते हैं?"

रुबीना की हताशा ने उन्हें सिंध प्रांत के हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करने के लिए मजबूर किया. पिछले साल नवंबर में हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय डेटाबेस और पंजीकरण प्राधिकरण को रुबीना को उसकी मां की नागरिकता के रिकॉर्ड के आधार पर एक आईडी कार्ड जारी करने का आदेश दिया था. रुबीना के लिए इस फैसले का मतलब था कि वह अपनी मां के रिटायरमेंट के बाद राज्य शिक्षा विभाग में एक अटैंडेंट के रूप में अपनी मां की नौकरी लेने के लिए आवेदन कर सकती हैं.

एक गैर-सरकारी संगठन पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के महासचिव हारिस खालिक के मुताबिक व्यापक संदर्भ में एकल माताओं के बच्चों को राष्ट्रीय पहचान पत्र योजना से बाहर रखने की प्रक्रिया को भी इस अदालत ने अपने फैसले में प्रभावी ढंग से खत्म कर दिया है. उन्होंने कहा, "सीएनआईसी के बिना कोई भी सार्वजनिक सेवा तक नहीं पहुंच सकता है या कोई बैंकिंग लेनदेन नहीं कर सकता है. संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि बिना आईडी कार्ड के आप नागरिक नहीं हो सकते हैं. आपको कोई भी अधिकार नहीं दिया जा सकता है."

सीएनआईसी की प्रभारी एजेंसी राष्ट्रीय डेटाबेस और पंजीकरण प्राधिकरण (एनएडीआरए) का कहना है कि वह ऐसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जिन्हें पिता का आईडी कार्ड नहीं होने के कारण अपना खुद का आईडी कार्ड बनवाने में कठिनाई हो रही है.

पहचान पत्र के लिए परेशान भविष्य का करोड़पति

प्रधानमंत्री की रणनीतिक सुधार इकाई परियोजना के प्रमुख सलमान सूफी कहते हैं, ''सरकार की स्पष्ट नीति है कि जिन लोगों को डेटाबेस में पंजीकृत किया जाएगा उन्हें बाहर नहीं रखा जाएगा."

2000 में अपनी स्थापना के बाद से एनएडीआरए राष्ट्रीय बायोमेट्रिक डेटाबेस का प्रबंधन कर रहा है. एनएडीआरए ने अब तक 21 करोड़ लोगों के देश में 96 प्रतिशत वयस्कों को 12 करोड़ पहचान पत्र जारी किए हैं. हर एक कार्ड में एक यूनीक 13 अंक वाली आईडी, कार्डधारक की तस्वीर, हस्ताक्षर और एक माइक्रोचिप होता है जो आंखों के रंग और उंगलियों के निशान जैसी जानकारी रखता है. फिर भी पाकिस्तान में लाखों लोग, जिनमें महिलाएं, ट्रांसजेंडर, प्रवासी श्रमिक और खानाबदोश समुदाय शामिल हैं अभी भी इस कार्ड से वंचित हैं.

एए/वीके (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)

Source: DW

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