खुद को आतंकवाद से पीड़ित बता रहे पाक में 10 खतरनाक आतंकी संगठन
न्यूयॉर्क। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने बुधवार को यूनाइटेड नेशंस जनरल एसेंबली यानी उंगा में भाषण दिया। साधारणतौर पर यहां पर किसी भी नेता को बोलने के लिए 15 मिनट का समय दिया जाता है।
पीएम नवाज के भाषण से पहले उम्मीदें थीं कि वह कम से कम 20 से 25 मिनट ले सकते हैं। लेकिन उन्होंने सिर्फ आठ मिनट में अपने भाषण को पूरा कर दिया। इस आठ मिनट में जो स्क्रिप्ट उन्होंने पढ़ी, उसे सुनकर साफ लग रहा था इसे रावलपिंडी में तैयार किया गया था।
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अगर आपको नहीं मालूम है तो आपको बता दें कि रावलपिंडी पाकिस्तानी सेना का हेडक्वार्टर है। नवाज ने कश्मीर का राग छेड़ा तो फिर से खुद को आतंकवाद से पीड़ित बता डाला।
नवाज ने आईएसआईएस का जिक्र किया लेकिन वह भूल गए कि उनकी सरजमीं पर दो दर्जन से ऐसे आतंकी संगठन हैं जिन्होंने भारत और अफगानिस्तान से लेकर अमेरिका तक की नाक में दम किया हुआ है।
आइए आज हम आपको उन 10 आतंकी संगठनों के बारे में बताते हैं जिन्होंने पाक समेत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आतंक को फैलाने का जिम्मा लिया हुआ है।

लश्कर-ए-तैयबा
भारत में 26/11 जैसे हमलों को अंजाम देने वाले लश्कर-ए-तैयबा को अमेरिका से लेकर यूनाइटेड नेशंस तक ने बैन किया हुआ है। वहीं पाकिस्तान कभी भी इस बात को मानने को तैयार नहीं होता कि लश्कर आतंकी संगठन है और हाफिज सईद एक आतंकी है। आज भी हाफिज सईद पाक के लाहौर और कराची जैसे शहरों में खुलेआम रैलियां करता है और मुजफ्फराबाद में इसके ट्रेनिंग कैंप्स हैं।

जमात उद दावा
लश्कर की ही एक और शाखा, जमात-उद-दावा (जेेयूडी)और इसे भी वर्ष 2014 में अमेरिका ने बैन कर दिया था। लश्कर जमात को एक चैरिटेबल संस्था बताता है लेकिन चैरिटी की आड़ में दरअसल यह संस्था भी आतंका का एजेंडा भारत में फैलाने के काम में लगी है। लश्कर और जेयूडी मिलकर एक मैगजीन भी निकालते हैं जिसका नाम है 'नन्हें मुजाहिद।'

हिजबुल मुजाहिद्दीन
जम्मू कश्मीर में आठ जुलाई से जो तांडव मचा है उसकी वजह हिजबुल मुजाहिद्दीन का कश्मीर कमांडर बुरहान वानी की मौत है। वहीं वानी जिसे पीएम नवाज ने कश्मीर का लीडर बताया था। सैय्यद सलाउद्दीन के अगुवाई वाले इस संगठन का मकसद कश्मीर में आतंकवाद को आगे बढ़ाना है। इसकी शुरुआत वर्ष 1989 में हुई थी।

जैश ए मोहम्मद
वही जैश जिसने पहले पठानकोट में आतंकी हमले को अंजाम दिया और फिर रविवार को उरी के आर्मी बेस पर आतंकी हमला किया। वर्ष 1999 में आईएसआई ने हरकत-उल-मुजाहिदीन टूटे आतंकियों की मदद से इस संगठन की स्थापना की। फिर इन्हीं आतंकियों ने वर्ष 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट को हाइजैक किया। मौलानाा मसूद अजहर इसका मुखिया है।

हक्कानी नेटवर्क
वहीं हक्कानी नेटवर्क जिसके खिलाफ अमेरिका ने कई बार पाक से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वर्ष 1970 में शुरू हुआ यह आतंकी संगठन संचालित तो अफगानिस्तान से होता है लेकिन इसका आका मौलवी जलालुद्दीन हक्कानी पाक में ही है। जलालुद्दीन और उसका बेटा सिराजुद्दीन हक्कानी इस संगठन का नेतृत्व करते हैं। इस संगठन ने अफगानिस्तान में मौजूद अमेरिकी सेना पर कई बार हमला किया है।

हरकत-उल-मुजाहिदीन (हूजी)
वर्ष 1980 में जब अफगानिस्तान में सोवियत संघ की सेना पहुंची तो हरकत-उल-जेहाद-अल-इस्लामी से कुछ आतंकी टूटे और उन्होंने हरकत-उल-मुजाहिदीन (हूजी) की शुरुआत की। इसके कनेक्शन अल-कायदा से हैं तो ओसामा बिन लादेन से कई आतंकियों की करीबियां रही हैं। इस संगठन का असली नाम हरकत-उल-मुजाहिदीन-अल-इस्लामी था लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन की सख्ती के बाद नाम बदलकर यह पाक में मौजूद हैं।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान(टीटीपी)
वर्ष 2007 से ही यह आतंकी संगठन सक्रिय है और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर इस संगठन की पकड़ है। पाकिस्तान तालिबान, अफगान तालिबान का समर्थन है लेकिन इसका मकसद सिर्फ पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाना है। वर्ष 2010 में टाइम्स स्क्वॉयर कार बॉम्बिंग और वर्ष 2009 में कैंप चैपमैन हमले के लिए यह संगठन ही जिम्मेदार है। वहीं वर्ष 2014 में पेशावर स्थित आर्मी स्कूल पर भी इसी संगठन ने आतंकी हमला किया था।

लश्कर-ए-झांगवी
वर्ष 1996 में इस संगठन की स्थापना हुई थी और आज यह पाक के अंदर एक खतरनाक आतंकी संगठन बन चुका है। वर्ष 2013 में क्वेटा में कई बम धमाकों में इसने 200 शिया मुसलमानों की जान ले ली थी। इसके बाद वर्ष 2002 में मशहूर अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल की किडनैपिंग और फिर उनके मर्डर में यही संगठन शामिल था। इसके बाद वर्ष 2009 में श्रीलंका की क्रिकेट टीम पर आतंकी हमले को अंजाम दिया।

हरकत-उल-जेहाद-अल-इस्लामी
यह वहीं संगठन है जिसने वर्ष 2011 में पुणे स्थित जर्मन बेकरी में आतंकी हमले को अंजाम दिया था। 1984 के दशक में इसका गठन हुआ और पाकिस्तान स्थित यह पहला आतंकी संगठन बना। आज बांग्लादेश और पाकिस्तान में इसकी अच्छी पकड़ है।

तहरीक-ए-जफारिया
तहरीक-ए-जफारिया (टीजेपी) की स्थापना वर्ष 1992 में हुई थी और इसका मकसद पाकिस्तान में सुन्नी समुदाय को निशाना बनाना था। इस आतंकी संगठन को पाक में शिया दबाव वाला संगठन माना जाता है।












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