कतर-सऊदी अरब की जंग में फंसी बेचारे नवाज शरीफ की गर्दन!
कतर और सऊदी अरब की लड़ाई में बेचारे शरीफ यह नहीं तय पा रहे हैं कि वह किस तरफ जाएं। उनके लिए एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति है।
नई दिल्ली। कतर बनाम सऊदी अरब की जंग में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ बुरे फंस गए हैं। ट्रंप के इशारे पर सऊदी अरब के नेतृत्व में गल्फ और बाहर के मुस्लिम राष्ट्रों को कतर-ईरान के खिलाफ एकजुट करने की मुहिम चलाई जा रही है। अब बेचारे शरीफ यह नहीं तय पा रहे हैं कि वह किस तरफ जाएं। उनके लिए एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति है। नवाज शरीफ उन नेताओं में हैं, जिनके दोनों देशों से अच्छे संबंध हैं।

सऊदी अरब के शाही परिवार ने नवाज शरीफ को उस समय जीवनदान दिया था, जब 1999 में परवेज मुशर्रफ ने उनकी सरकार का तख्तापलट कर दिया था। तब पाकिस्तान की सेना ही शरीफ के खून की प्यासी हो गई थी। उस दौर में जब कोई उन्हें शरण देने को तैयार नहीं था, तब सऊदी अरब ने उन्हें पनाह दी थी।
दूसरी ओर कतर है। इस देश के साथ पाकिस्तान के बेहद करीब व्यापारिक रिश्ते हैं। कतर के साथ पाकिस्तान ने पिछले साल ही लिक्यूफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) समझौता किया। इसके तहत कतर 3.75 टन गैस हर साल पाकिस्तान को देगा। इसके अलावा 2000 मेगावाट बिजली नेशनल ग्रिड को देने का करार भी दोनों देशों के बीच हुआ है। ऊर्जा के लिए पाकिस्तान कतर पर निर्भर है। पाकिस्तान की भी छोडि़ए खुद नवाज शरीफ की गर्दन कतर के हाथ में है।
दरअसल, पनामा लीक मामले में नवाज शरीफ और उनके परिवार के सदस्यों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इस मामले को लेकर पाकिस्तान में सुनवाई चल रही है। कोर्ट में चल रही कार्यवाही में कतर के शाही परिवार की ओर से जारी लेटर बेहद अहम सबूत है। ऐसे में नवाज शरीफ कतर के खिलाफ भी नहीं जा सकते हैं। अब आप ही बताइए बेचारे शरीफ आखिर करें तो क्या करें?
आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले सऊदी अरब, मिस्र समेत कई खाड़ी देशों ने कतर से कूटनीतिक रिश्ते खत्म कर दिए। इनमें कई देशों ने कतर के विमानों के अपनी वायुसीमा में प्रवेश पर भी पाबंदी लगा दी है। अमेरिका के इशारे पर सऊदी अरब के नेतृत्व में कतर-ईरान के खिलाफ मुस्लिम राष्ट्रों को एक जगह लामबंद किया जा रहा है। आसान शब्दों में कहें तो दुनिया अब दो गुटों में बंटने जा रही है। एक ओर अमेरिका, सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन और यूएई। दूसरी ओर कतर, ईरान, रूस और चीन, सीरिया जैसे देश हैं। यह है खाड़ी देशों में आए कूटनीतिक तूफान के पीछे का पूरा गणित।












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