पनामा पेपर लीक्स में JIT के सामने पेश हुए पीएम नवाज, खुद को बताया बेकसूर
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पनामा पेपर लीक्स मामले की जांच के लिए गुरुवार को ज्वॉइन्ट इनवेस्टिगेशन टीम (जेआईटी) के सामने पेश हुए। जेआईटी का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किया गया था। नवाज शरीफ ने जेआईटी के सामने पनामा पेपर लीक्स मामले को उनके खिलाफ एक साजिश करार दिया।

पाक के पहले पीएम नवाज
नवाज पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री हैं जो पद पर रहते हुए, इस तरह के पैनल के सामने पेश हुए हैं। शरीफ ने जेआईटी के सामने अपनी पेशी के बाद कहा कि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की सभी साजिशें नाकाम हो जाएगी क्योंकि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार कोई आरोप नहीं है। नवाज ने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान मेरे परिवार से जवाब मांगे गए थे। ज्यूडीशियल एकेडमी को अस्थाई तौर पर जेआईटी सेक्रेट्रीएट में तब्दील कर दिया गया है और यहां पीएम शरीफ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचे थे और उनके चेहरे पर जरा भी तनाव नजर नहीं आ रहा था। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक 2500 से अधिक सुरक्षाबल को तैनात किया गया था। शरीफ के साथ उनके बड़े बेटे हुसैन नवाज, पंजाब के मुख्यमंत्री और उनके भाई शहबाज शरीफ और दामाद मोहम्मद सफदर मौजूद थे। पूछताछ के लिए बिल्डिंग में दाखिल होने से पहले शरीफ ने वहां मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं का हाथ हिलाकर अभिवादन किया और उनके नारों का जवाब भी दिया। पीएमएल-एन के समर्थक बड़ी संख्या में बिल्डिंग के आसपास इकट्ठा हुए। उन्होंने पार्टी के झंड़े फहराए और शरीफ के पक्ष में नारे भी लगाए।
60 दिन में पूरी करनी है जांच
इससे पहले शरीफ की बेटी मरियम नवाज ने अपने पिता और उनके प्रमुख सहयोगियों की एक तस्वीर पोस्ट करके ट्वीट किया, आज के दिन ने इतिहास रच दिया है और बहु प्रतीक्षित और स्वागत योग्य उदाहरण स्थापित किया है । डॉन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि प्रधानमंत्री अकेले जांच दल के समक्ष हाजिर होंगे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जेआईटी कितनी देर तक उनसे पूछताछ करेगी। शरीफ के कजाखिस्तान से वापस लौटने के बाद उन्हें समन जारी किया गया। शरीफ शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) समिट में हिस्सा लेने के लिए कजाखिस्तान गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने पनामा पेपर मामले में 20 अप्रैल को जेआईटी का गठन किया था और उसे प्रधानमंत्री, उनके बेटे और मामले से जुड़े किसी भी अन्य व्यक्ति से पूछताछ करने का अधिकार दिया था। जेआईटी को 60 दिन में अपनी जांच पूरी करनी है।












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