भारत के लिए ही नहीं दुनिया के लिए भी खतरा बन चुका है पाकिस्तान, जानिए क्यों
नई दिल्ली, 9 सितंबर: पाकिस्तान का कपटी और दोहरा चेहरा फिर हुआ उजागर हो गया है। वर्षों तक ओसामा बिन लादेन को पनाह देने के बाद अब उसको अलकायदा से खतरा नजर आ रहा है। दिलचस्प बात ये है कि दो दिन बाद लादेन के गुनाह की 20वीं बरसी आने वाली है। बता दें के 9/11 हमले का लादेन ही मास्टरमाइंड था, जिसे अमेरिका ने पाकिस्तान में ढूंढकर मारा और उसकी लाश भी ले जाकर समंदर में दफन कर दिया था। अब लादेन के उसी अल-कायदा को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी दुनिया को उपदेश देने में लग गए हैं और उससे अफगानिस्तान की हिफाजत करने की दुहाई दे रहे हैं।

कपटी पाकिस्तान का दोहरा चेहरा फिर उजागर
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी ने अब अल-कायदा को खतरा बताते हुए, अफगानिस्तान को सुरक्षित बनाने का उपदेश देना शुरू कर दिया है। जबकि लगभग ठीक 20 साल पहले 9/11 करके अमेरिका समेत पूरी दुनिया को दहशत में लाने वाले गुनहगार ओसामा बिन लादेन के लिए पाकिस्तान पहले कभी यह मानने के लिए तैयार नहीं हुआ कि उसने उसे पाकिस्तान में ही छिपाकर रखा हुआ है। यही नहीं अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी उसका दोहरा चेहरा दुनिया के सामने आ चुका है, लेकिन भारत के अलावा शायद ही किसी देश ने आतंकवाद का पनाहगार और संरक्षक बन चुके पाकिस्तान को कभी गंभीरता से लेने की कोशिश की है। हालांकि, अफगानिस्तान में जो कुछ भी हो रहा है, उसके पीछे पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई के रोल से पूरा विश्व वाकिफ है।
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अफगानिस्तान को अस्थिर करके आतंकवाद पर उपदेश दे रहा है पाकिस्तान
अफगानिस्तान में आज भी पाकिस्तान एक तरफ तो तालिबान के आतंकियों को पंजशीर के लड़ाकों के खिलाफ हर मुमकिन मदद पहुंचा रहा है, वहीं शाह मेहमूद कुरैशी दुनिया के सामने यह चिंता जताने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं अफगानिस्तान आतंकवाद का गढ़ न बन जाए। कुरैशी ने कहा है कि अल-कायद एक खतरा है और पाकिस्तान उसे अपनी जमीन पर पनाह नहीं देगा। अफगान मसले पर चीन, ईरान, ताजिकिस्तान,तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ वर्चुअल मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के लोगों के हितों पर फोकस जरूरी है, क्योंकि उन्होंने दशकों तक संघर्ष और अस्थिरता की वजह से बहुत ज्यादा संकट झेले हैं। जबकि तथ्य यह है कि अफगानिस्तान की आम जनता तालिबान शासन से कहीं ज्यादा उसमें उसके दखल का विरोध कर रही है।

दुनिया के लिए भी खतरा बन रहा है पाकिस्तान
पाकिस्तानी विदेश मंत्री के बयान से पाकिस्तान की कथनी और करनी में अंतर साफ नजर आता है। सच्चाई ये है कि पाकिस्तान ने दशकों से अपनी जमीन को आतंकवाद का ठिकाना बना रखा है, जिससे न सिर्फ भारत पीड़ित है बल्कि दुनिया के कई और देश भी उसकी वजह से परेशानी झेल रहे हैं। यही नहीं, अफगानिस्तान में जिस तरह से तालिबान ने वहां की सत्ता पर कब्जा किया है, उसमें पाकिस्तान और उसकी एजेंसियों का शुरू से सक्रिय रोल रहा है, जिसकी ओर अफगानिस्तान की पूर्ववर्ती चुनी हुई सरकार और पंजशीर घाटी के लोग हमेशा से इशारा करते रहे हैं। लेकिन, अब वही पाकिस्तान अफगानिस्तान को आतंक का गढ़ नहीं बनने देने और उसकी हिफाजत का उपदेश दे रहा है।

अफगानिस्तान के हालात ने बढ़ाई है भारत की चिंता
बुधवार को ही भारत ने भी रूस को अफगानिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से पाकिस्तान के आईएसआई के तार जुड़े होने के प्रति आगाह किया है। तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद दोनों देशों के बीच अफगानिस्तान के मसले पर पहलीबार विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय समेत बाकी सुरक्षा एजेंसियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई है। भारत ने इस बात की ओर खास ध्यान दिलाया है कि पाकिस्तान का किस तरह से तालिबान और दूसरे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के साथ साठगांठ है, जो अफगानिस्तान में सक्रिय हैं। लेकिन, सवाल है कि जिस पाकिस्तान के लिए आतंकवाद एक 'सरकार प्रायोजित नीति' बन चुकी है, उससे अफगानिस्तान में इसपर लगाम लगाने की जिम्मेदारी उठाने की सोचने में कितनी समझदारी है?












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