भारत से बिगड़े रिश्तों के बीच पाकिस्तान सरकार ने बढ़ाया सेना प्रमुख बाजवा का कार्यकाल
इस्लामाबाद। जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले धारा 370 हटाए जाने को लेकर भारत सरकार के अहम फैसले से पाकिस्तान बेहद परेशान है। यही वजह से उसने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में भी उठाया, बावजूद इसके उसका ये दांव कामयाब नहीं हो सका। वहीं, अमेरिका-रूस समेत दूसरे देशों ने भी कश्मीर के मुद्दे पर उसका साथ नहीं दिया। ऐसे में परेशान इमरान खान सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपने सलाहकारों से बातचीत के बाद सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि उनके फैसले के पीछे 'कश्मीर इफेक्ट' अहम फैक्टर है।

जनरल कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल तीन साल बढ़ा
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल तीन साल के लिए बढ़ाया गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संक्षिप्त अधिसूचना में इस बात की जानकारी दी गई है। इसमें लिखा है, "जनरल कमर जावेद बाजवा का वर्तमान कार्यकाल पूरा होने की तारीख से तीन साल के लिए उनका कार्यकाल बढ़ाया गया है। इस तरह से बाजवा एक और कार्यकाल के लिए सेनाध्यक्ष का पद संभालेंगे।"

इसलिए उठाया इमरान सरकार ने ये कदम
जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री इमरान खान ने ये फैसला क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल को देखते हुए लिया है। दरअसल, भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देते हुए कहा था कि पाकिस्तान से अब जो भी बात होगी वह पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) पर होगी। राजनाथ सिंह के इस बयान के बाद पाकिस्तान सरकार टेंशन में है। भारत की ओर से लगातार उठाए जा रहे कदम से पाकिस्तान सरकार बुरी तरह घिर गई है, ऐसे में उसने पाक आर्मी चीफ के लिए एक बार फिर से बाजवा के नाम पर ही मुहर लगाई है।

2016 में पाक आर्मी चीफ बनाए गए थे बाजवा
बता दें कि जनरल कमर जावेद बाजवा को पहली बार साल 2016 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सेना प्रमुख नियुक्त किया था। 58 वर्षीय जनरल बाजवा के इस साल सेवानिवृत्त होने की उम्मीद थी, लेकिन सेवानिवृत्ति से ठीक दो महीने पहले उन्हें सेवा विस्तार दिया गया है। बाजवा का कार्यकाल तीन साल के लिए बढ़ा दिया है। वहीं सोशल मीडिया पर ऐसी भी चर्चा है कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने खुद ही अपना कार्यकाल बढ़ाने का फैसला लिया। जिसके बाद पाकिस्तान सरकार को इसकी मंजूरी देनी पड़ी।












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