30 सेकेंड का हैंडशेक, 9 घंटे का एनकाउंटर 3 जवानों की शहादत
काठमांडू। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच काठमांडू में सार्क समिट के दौरान 30 सेकेंड के हैंडशेक ने हर जगह सुर्खियां बटोरीं। एक तरह से यह 18वीं सार्क समिट का वह पल बन गया जिसे सार्क के मुद्दों से ज्यादा तवज्जो मिल गई।

बातचीत से इंकार लेकिन हैंडशेक पर इकरार
नरेंद्र मोदी और शरीफ की यह मुलाकात शायद इसलिए भारत और वर्ल्ड मीडिया के लिए अहम हो गई क्योंकि मोदी और शरीफ के बीच सार्क सम्मेलन के शुरुआती दौर से ही एक तल्खी देखने को मिली थी। यहां तक कि दोनों ही लोग एक-दूसरे को नजरअंदाज कर रहे थे। ऐसे में जब दोनों ने हाथ मिलाए तो हैंडशेक को सुर्खियां मिलना लाजिमी था।
पाक के विदेश मंत्री सरताज अजीज ने तो यहां तक कह डाला कि पाक के लिए सार्क समिट भारत के अलावा भी बहुत कुछ है। अब यह तो समय ही बताएगा कि आगे क्या होने वाला है। ऐसे में पाक की मंशा भी साफ-साफ नजर आती है। यहां यह बात भी दिलचस्प है कि पाक ने सार्क सम्मेलन से पहले मोदी-शरीफ की मुलाकात पर कहा था कि पहल भारत की तरफ से होनी चाहिए।
जम्मू में हो रहा था एनकाउंटर
इन 30 सेकेंड्स से अलग, करीब 1,570 किमी दूर, कुछ ऐसा अभी तक चल रहा है जिस पर अब पाकिस्तान को भी शक होने लगा है कि इस घटना का पाक से गहरा नाता है। जम्मू के अरनिया सेक्टर में सुबह आठ बजे से जारी एनकाउंटर में 3 जवान शहीद हो गए तो वहीं 3 नागरिकों की भी जान चली गई।
इस एनकाउंटर में जहां 3 आतंकी भारतीय सुरक्षाबलों की गिरफ्त में आए तो एक आतंकी को मार डाला। सेना को इंटेलीजेंस की ओर से जानकारी मिली थी कि कुछ आतंकियों को उन्होंने यहां पर देखा है। इसी इंटेलीजेंस इनपुट के आधार पर एनकाउंटर शुरू हुआ और करीब नौ घंटे तक एनकाउंटर चला।
द डॉन को शक पाक से गए आतंकी
अरनिया में जहां सेना के पुराने बंकर में आतंकी छिपे वह इंटरनेशनल बॉर्डर से सिर्फ 4-5 किमी ही दूर है। चुनावों के दौरान यह एनकाउंटर वाकई काफी सवाल खड़े करता है।
भले ही नवाज शरीफ और पाक के बुद्धिजीवी इस बात को मानने से इंकार कर दें कि अरनिया सेक्टर में जो कुछ हुआ, उसमें पाक की कोई भूमिका है, लेकिन पाक के ही एक प्रतिष्ठित अखबार 'द डॉन' ने जो कुछ लिखा है, उससे तो यही लगता है कि यह पाक की कारिस्तानी है।
डॉन ने लिखा है, 'विद्रोही, जो हो सकता है कि पाक से दूसरी तरफ गए हैं, वह एक पुराने बंकर में दाखिल हो गए हैं और इसके बाद से यहां पर एनकाउंटर जारी है।'
यहां यह बात गौर करने वाली है कि अगस्त से ही सीमा पार से लगातार फायरिंग जारी है। इसके बावजूद पाक ने हमेशा ही चुप्पी साध रखी है। सार्क के दौरान भी नवाज शरीफ ने भारत को ही कश्मीर पर सलाह दे डाली।
नहीं बदलती पाक की नीयत
इस बात का जिक्र यहां पर इसलिए हो रहा है क्योंकि ऐसा लगता है कि नवाज शरीफ और पाकिस्तान की नीयत में कोई बदलाव आता नहीं दिख रहा है। 30 सेकेंड जब उन्होंने मोदी के साथ हाथ मिलाया तो उनके बीच क्या बात हुई इसका तो पता नहीं चल पाया लेकिन यह भी कहीं न कहीं तय है कि इतने कम समय में तो पाक को समझना मोदी के बस की बात नहीं।












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